6 नवंबर 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

chaitra navratri 2018 : इस आसान मंत्र से करें मां की पूजा, नहीं होगा कुछ गलत

चैत्र नवरात्र 18 मार्च से शुरू हो गये हैं, 25 को अष्टमी और नवमी है, 26 मार्च को नवरात्र का व्रत तोड़ा जाएगा
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

लखनऊ

•

image

Hariom Dwivedi

•

Updated: 18 Mar 2018, 9:14 AM IST

chaitra navratri 2018

लखनऊ. चैत्र नवरात्र का आज यानी 18 मार्च को पहला दिन है। 25 मार्च को अष्टमी है। हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र नवरात्र से ही नये साल की शुरुआत होती है। वैसे तो साल भर में चार नवरात्र होते हैं, लेकिन दो मुख्य माने जाते हैं, एक चैत्र मास का और दूसरा अश्विन मास (क्वार) का। चैत्र मास में महीने में पड़ने वाले नवरात्र को ही वासंतिक नवरात्र कहा जाता है। 18 मार्च से शुरू होने वाल नवरात्र का व्रत 26 मार्च को तोड़ा जाएगा। इस बार एक ही दिन यानी 25 मार्च को अष्टमी और नवमी पड़ रही है।

लखनऊ के फेमस बड़ी काली जी मंदिर के पुजारी आचार्य बल्लभ व्यास बताते हैं कि नवरात्र के पहले दिन महाकाली के शैलपुत्री स्वरूप की पूजा होती है। रविवार को यायीजय योग और सर्वार्थ सिद्धि योग बना रहा है, जिसे बहुत ही शुभ माना जाता है। आज सुबह से ही घरों, दुर्गा मंदिरों व पूजा पंडालों में कलश की स्थापना के बाद ही अन्य अनुष्ठान किये जाएंगे।

नवरात्र पर मां के इन स्वरूपों की होती है पूजा
आचार्य बल्लभ व्यास ने बताया कि नवरात्र पर मां की पूजा विशेष फल देने वाली होती है। इस दौरान महाशक्ति के जिन नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। वे हैं मां शैलपुत्री, मां ब्रह्मचारिणी, मां चंद्रघंटा, मां कुष्मांडा, मां कात्यायनी, मां स्कंदमाता, मां कालरात्रि, मां महागौरी और मां सिद्धिदात्री। ये सभी महाकाली, महाशक्ति और महामाया के अलग-अलग स्वरूप हैं। नवरात्र पर इस सभी की पूजा विशेष फल देने वाली होती है।

मां की पूजा जितनी है कठिन है, उतनी ही सरल भी है
आचार्य बल्लभ व्यास बताते हैं कि मां की पूजा जितनी कठिन है, उतनी ही सरल भी है। मतलब अगर आप पुराणों वर्णित मंत्रों और श्लोकों का उच्चारण नहीं कर सकते तो नवरात्र के हर दिन माता के एक छोटे से मंत्र का जाप कर मां को खुश कर सकते हैं। लेकिन शर्त है कि इस साधारण मंत्र के शब्द आपके प्रेम, समर्पण और भक्तिभाव की चासनी में डूबे होने चाहिये। फिर देखिये जगतमाता कैसे आपके कष्टों को चुटकियों में दूर कर सकती है। ध्यान रखें कि महाकाली को आपके चढ़ावे की कोई आवश्यकता नहीं, जरूरत है तो बस आपके सच्ची भक्ति भावना की। आइए जानते हैं माता का वो साधारण मंत्र, जिससे आप मातारानी को खुश कर सकते हैं।

इस मंत्र से करें मां को खुश
घर में, मंदिर में या फिर पांडाल में जहां भी हों माता के सामने निश्छल भाव और सच्ची निष्ठा से आंखें बंद कर ध्यानमग्न हो कर बैठ जायें। और अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार इस मंत्र का जाप करें-

मां शैलपुत्री
ऊं या देवी सर्वभूतेषु शैलपुत्री रूपेण संस्थिता
नस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:

मां ब्रह्मचारिणी
ऊं या देवी सर्वभूतेषु ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता
नस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:

मां चंद्रघंटा
ऊं या देवी सर्वभूतेषु चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता
नस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:

मां कुष्मांडा
ऊं या देवी सर्वभूतेषु कुष्मांडा रूपेण संस्थिता
नस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:

मां कात्यायनी
ऊं या देवी सर्वभूतेषु कात्यायनी रूपेण संस्थिता
नस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:

मां स्कंदमाता
ऊं या देवी सर्वभूतेषु स्कंदमाता रूपेण संस्थिता
नस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:

मां कालरात्रि
ऊं या देवी सर्वभूतेषु कालरात्रि रूपेण संस्थिता
नस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:

मां महागौरी
ऊं या देवी सर्वभूतेषु महागौरी रूपेण संस्थिता
नस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:

मां सिद्धिदात्री
ऊं या देवी सर्वभूतेषु सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता
नस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: