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ILFS केस में SFIO ने दाखिल किया पहला चार्जशीट, ऑडिटर्स समेत पूर्व निदेशकों पर लगे गंभीर आरोप

SFIO ने IL&FS केस में 30 व्यक्तियों व ईकाइयों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल किया है। बिजनेसमैन सी शिवशंकरन और IL&FS फाइनेंशियल सर्विसेज के 9 पूर्व निदेशकों का भी नाम है। SFIO ने यह चार्जशीट बीते दिन यानी गुरुवार को दर्ज की है।
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Updated: 31 May 2019, 12:19 PM IST
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ILFS केस में SFIO ने दाखिल किया पहला चार्जशीट, ऑडिटर्स समेत पूर्व निदेशकों पर लगे गंभीर आरोप

नई दिल्ली। गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय ( SFIO ) ने IL&FS केस में 30 व्यक्तियों व ईकाइयों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल किया है। चार्जशीट दाखिल किए जाने वाले व्यक्तियों के नाम में बिजनेसमैन सी शिवशंकरन और IL&FS फाइनेंशियल सर्विसेज के 9 पूर्व निदेशकों का भी नाम है। SFIO ने यह चार्जशीट बीते दिन यानी गुरुवार को दर्ज की है।

किन-किन के खिलाफ दायर किया गया चार्जशीट

SFIO ने BSR & Co LLP और Deloitte Haskins & Sales समेत अन्य पर अहम जानकारियां छुपाने और अकाउंट में गड़बड़ी का आरोप लगाया है। SFIO ने कहा कि सिवा ग्रुप को बिना पर्याप्त कोलेटरल के ही कर्ज दे दिया गया था। जिन अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट दायर की गई है, उनमें IL&FS के वाइस चेयरमैन हरी संकरन और IFIN के पूर्व प्रबंध निदेशक रमेश बावा है।

बता दें कि इन दोनों कि ये दोनों पहले ही हिरासत में है। बीएसआर और डिलॉयट को भी ऑडिट पार्टनर्स उद्यन सेन, कल्पेश मेहता और संपत गणेश के खिलाफ भी चार्जशीट दाखिल किया गया है। इस लिस्ट में अन्य लोगों की बात करें तो कंपनी के ऑडिट कमिटी मेंबर्स, स्वतंत्र निदेशक और सिवा ग्रुप के चेयरमैन व उनकी सहायक कंपनियां शामिल हैं। अन्य निदेशकों में रवि पार्थसारथी, विभव कपूर और के रामचंद का भी नाम है।

पिछले साल सितंबर माह में यह डिफॉल्ट आया था सामने

इन सभी पर यह चार्ज कंपनी एक्ट ( Company Act ) और इंडियन पिनल कोड ( IPC ) के तहत फ्रॉड करने और आपराधिक साजिश करने के आरोप में लगाया गया है। बता दें कि पिछले साल सितंबर माह में IL&FS डिफॉल्ट सामने आया था जिसके बाद वित्तीय बाजार को तरलता की संकट से गुजरना पड़ा था। गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थानों ( NBFC ) की मौजूदा संकट के पीछे भी यही प्रमुख कारण है। IL&FS संकट के सामने आने के बाद सरकार ने कंपनी बोर्ड को बदल दिया था। इसके बाद से ही SFIO इस बात की जांच कर रही है कि आखिर क्या वजह रही जिसके बाद कंपनी को करीब 91 हजार करोड़ रुपए डिफॉल्ट करने के लिए मजबूर होना पड़ा।

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