Grok AI Controversy: बंद हुआ 'बिकनी' वाला गंदा खेल! मस्क ने रातों-रात बदले Grok AI के नियम। भारत सहित दुनिया के तमाम देशों की सख्ती के बाद अब X पर अश्लील फोटो बनाना होगा नामुमकिन। पढ़ें पूरी डिटेल।
Grok AI Controversy: कहते हैं न कि जब चौतरफा दबाव बढ़ता है, तो बड़े-बड़ों को झुकना पड़ता है। एलन मस्क और उनके सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पहले ट्विटर) के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ है। लंबे समय से चल रहे विवाद और दुनिया भर की सरकारों की नाराजगी के बाद, मस्क ने आखिरकार अपने AI चैटबॉट 'Grok' के लिए लक्ष्मण रेखा खींच दी है। अब अगर कोई Grok के जरिए किसी महिला या नाबालिग की अश्लील फोटो बनाने या उसे 'बिकनी' पहनाने की कोशिश करेगा, तो यह AI साफ इनकार कर देगा।
दरअसल, पिछले कुछ समय से X पर एक बेहद ही गंदा खेल चल रहा था। लोग Grok AI का इस्तेमाल करके महिलाओं और यहां तक कि मासूम बच्चों की तस्वीरों के साथ छेड़छाड़ कर रहे थे। इसे तकनीकी भाषा में 'डीपफेक' कहा जाता है। यानी ऐसी नकली तस्वीरें जो देखने में बिल्कुल असली लगें। एलन मस्क शुरू में इसे फ्री स्पीच का नाम देकर टालते रहे, लेकिन जब बात पानी से ऊपर निकल गई, तो उन्हें रातों-रात नियम बदलने पड़े।
मस्क के इस यू-टर्न के पीछे सबसे बड़ी वजह कानूनी कार्रवाई का डर है। भारत सरकार ने X को पहले ही सख्त अल्टीमेटम दे दिया था। साफ कर दिया गया था कि अगर महिलाओं की डिजिटल सुरक्षा से खिलवाड़ हुआ, तो X को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।
इतना ही नहीं, ब्रिटेन की सरकार भी इस मामले में आर-पार के मूड में है। वहां की रेगुलेटर संस्था Ofcom ने जांच बिठा दी है और एक नया कानून भी ला रही है, जिसके तहत बिना सहमति के अश्लील डीपफेक बनाना अब सीधे जेल की हवा खिलाने वाला अपराध होगा। इसी ग्लोबल प्रेशर ने मस्क को मजबूर कर दिया कि वो Grok की मनमानी पर लगाम कसें।
मस्क की कंपनी ने मंगलवार को आधिकारिक तौर पर अपनी पॉलिसी में बदलाव की घोषणा तो कर दी, लेकिन क्या सच में गंदगी साफ हो गई है? इस पर अभी भी सवालिया निशान हैं। The Verge की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जब कुछ पत्रकारों ने इस दावे की टेस्टिंग की, तो नतीजा चौंकाने वाला था। मस्क के लाख दावों के बावजूद बुधवार को भी Grok अश्लील तस्वीरें बनाता हुआ पकड़ा गया।
इससे एक बात तो साफ है कि कंपनी की कथनी और करनी में अभी भी फर्क है। हालांकि, मस्क का कहना है कि वे लगातार फिल्टर बेहतर कर रहे हैं, ताकि किसी भी आपत्तिजनक कंटेंट को रोका जा सके।
कुल मिलाकर, मस्क ने नियम तो बदल दिए हैं, लेकिन असली परीक्षा तब होगी जब यह AI टूल वाकई में सुरक्षित साबित होगा। फिलहाल के लिए इतना ही कि अब X पर डिजिटल चीरहरण करने वालों के लिए रास्ता थोड़ा मुश्किल जरूर हो गया है।