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Safer Internet Day 2026: सिर्फ ‘ना’ कहने से नहीं चलेगा काम, फोन में ऑन करें ये सेटिंग्स, बच्चों से दूर रहेगा अडल्ट कंटेंट

Safer Internet Day 2026 पर जानें बच्चों को अडल्ट कॉन्टेंट से सुरक्षित रखने के आसान उपाय। फोन की जरूरी सेटिंग्स और पैरंटल कंट्रोल टिप्स की पूरी जानकारी।

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Feb 08, 2026
Safer Internet Day 2026 (Image: ChatGPT)

Safer Internet Day 2026: हर साल 10 फरवरी को Safer Internet Day मनाया जाता है, ताकि इंटरनेट के सुरक्षित और जिम्मेदार इस्तेमाल को लेकर जागरूकता बढ़ाई जा सके। आज जब बच्चों की पढ़ाई मोबाइल, लैपटॉप और टैबलेट पर निर्भर हो चुकी है, तब यह दिन पैरंट्स के लिए और भी अहम हो जाता है। ऑनलाइन क्लास, होमवर्क और मनोरंजन के बीच बच्चे कब और कैसे अडल्ट या आपत्तिजनक कॉन्टेंट तक पहुंच जाते हैं, इसका अंदाजा कई बार घरवालों को भी नहीं लग पाता। ऐसे में सिर्फ मना करना काफी नहीं होता, बल्कि सही जानकारी और सही उपाय जरूरी हो जाते हैं।

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खतरा अब सिर्फ वेबसाइटों तक सीमित नहीं

पहले माना जाता था कि अश्लील कॉन्टेंट कुछ गिनी-चुनी वेबसाइटों पर ही मिलता है। आज हालात बदल चुके हैं। सोशल मीडिया की रील्स, शॉर्ट वीडियो, स्टोरीज और यहां तक कि गेमिंग प्लेटफॉर्म्स में भी यह कॉन्टेंट अलग-अलग रूपों में मौजूद है। एल्गोरिद्म बार-बार ऐसे वीडियो सुझा देता है, जिससे बच्चा अनजाने में उसी तरह के कॉन्टेंट की ओर खिंचता चला जाता है।

सिर्फ ‘मत देखो’ कहना क्यों नहीं करता काम

कई पैरंट्स बच्चों को सख्त शब्दों में फोन से दूर रहने को कहकर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान लेते हैं। लेकिन डिजिटल दौर में यह तरीका न तो कारगर है और न ही व्यवहारिक। मोबाइल और इंटरनेट बच्चों की पढ़ाई, दोस्ती और मनोरंजन का हिस्सा बन चुके हैं। ज्यादा रोक-टोक कई बार बच्चों को छुपकर देखने की ओर भी ले जा सकती है। बेहतर तरीका यह है कि इस्तेमाल को सुरक्षित और सीमित किया जाए।

पैरंटल कंट्रोल ऐप्स से मिलेगी मदद

आज ऐसे कई ऐप्स मौजूद हैं, जिनकी मदद से पैरंट्स बच्चों के फोन इस्तेमाल पर नजर रख सकते हैं। इन ऐप्स के जरिए यह तय किया जा सकता है कि बच्चा कौन-से ऐप्स इस्तेमाल करेगा, कितनी देर फोन चलाएगा और किन साइट्स तक उसकी पहुंच होगी। कुछ ऐप्स स्क्रीन टाइम लिमिट, लोकेशन ट्रैकिंग और लाइव मॉनिटरिंग जैसी सुविधाएं भी देते हैं।

मोबाइल की इन-बिल्ट सेटिंग्स को नजरअंदाज न करें

अगर आप iPhone या Android इस्तेमाल कर रहे हैं, तो उसमें पहले से मौजूद Screen Time और Digital Wellbeing जैसे फीचर्स काफी काम के हैं। इनसे डेली फोन इस्तेमाल की सीमा तय की जा सकती है और जरूरत पड़ने पर कुछ ऐप्स को लॉक भी किया जा सकता है। यह तरीका छोटे बच्चों के लिए खासतौर पर फायदेमंद साबित होता है।

सोशल मीडिया और वीडियो प्लेटफॉर्म की सेटिंग्स जरूरी

YouTube, Instagram जैसे प्लेटफॉर्म बच्चों के बीच सबसे ज्यादा लोकप्रिय हैं। YouTube पर Restricted Mode और YouTube Kids जैसे विकल्प अडल्ट कॉन्टेंट को काफी हद तक फिल्टर कर देते हैं। वहीं Instagram पर अकाउंट को प्राइवेट करना, सेंसिटिव कॉन्टेंट कम पर सेट करना और कमेंट व मैसेज कंट्रोल करना बच्चों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम हैं।

AI टूल्स पर भी रखें नजर

आजकल बच्चे पढ़ाई और जानकारी के लिए AI टूल्स का भी इस्तेमाल कर रहे हैं। ये टूल्स मददगार हैं, लेकिन बिना निगरानी के इनका गलत इस्तेमाल भी हो सकता है। फैमिली अकाउंट और पैरंटल कंट्रोल फीचर्स के जरिए यह देखा जा सकता है कि बच्चा इन्हें कैसे और कितना इस्तेमाल कर रहा है।

बच्चों से बातचीत सबसे जरूरी

हर तकनीकी उपाय के बावजूद सबसे अहम भूमिका पैरंट्स की ही होती है। बच्चों से डराकर नहीं, बल्कि भरोसे के साथ बात करें। उन्हें समझाएं कि इंटरनेट पर हर चीज सही नहीं होती और अगर कुछ अजीब या असहज लगे, तो तुरंत घरवालों को बताएं।

Safer Internet Day सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि यह याद दिलाने का मौका है कि बच्चों को डिजिटल दुनिया में सुरक्षित रखना हमारी जिम्मेदारी है। इंटरनेट से दूरी बनाना समाधान नहीं है, बल्कि उसका सही, सुरक्षित और समझदारी भरा इस्तेमाल ही बच्चों के बेहतर भविष्य की कुंजी है।

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Published on:
08 Feb 2026 02:00 pm
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