WhatsApp Privacy Case: व्हाट्सएप की प्राइवेसी पर अमेरिका में केस, भारत समेत 5 देशों के यूजर्स ने Meta को घेरा। मुकदमे के बाद Elon Musk की एंट्री से विवाद और तेज।
WhatsApp Privacy Case: अमेरिका में WhatsApp की प्राइवेसी को लेकर एक बड़ा कानूनी विवाद खड़ा हो गया है। मैसेजिंग ऐप की एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन (E2E) को लेकर दायर एक क्लास-एक्शन मुकदमे में भारत समेत पांच देशों के यूजर शामिल हैं। इस केस ने दुनियाभर में करोड़ों यूजर्स की डिजिटल निजता को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
यह मुकदमा सैन फ्रांसिस्को की यूएस डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में दायर किया गया है, जिसमें भारत, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, मैक्सिको और साउथ अफ्रीका के यूजर्स वादी हैं। आरोप है कि Meta ने WhatsApp की सुरक्षा को लेकर भ्रामक दावे किए और दावा किया कि वह यूजर्स की पूरी तरह निजी चैट्स को स्टोर, विश्लेषण और एक्सेस कर सकता है, जबकि कंपनी लगातार एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन का भरोसा दिलाती रही है।
मुकदमे में कहा गया है कि WhatsApp ने अपने प्रचार में यह दावा किया कि उसकी चैट्स पूरी तरह सुरक्षित हैं, लेकिन व्हिसलब्लोअर के हवाले से यह आरोप लगाए गए हैं कि यूजर कम्युनिकेशन उतना निजी नहीं है जितना बताया जाता है। वादी पक्ष का कहना है कि यह भ्रामक मार्केटिंग वैश्विक प्राइवेसी कानूनों का उल्लंघन हो सकती है।
Meta ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए मुकदमे को 'फ्रिवोलस' यानी निराधार बताया है। कंपनी का कहना है कि WhatsApp की एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन तकनीक यह सुनिश्चित करती है कि केवल मैसेज भेजने वाला और पाने वाला ही संदेश पढ़ सकता है। Meta के अनुसार, एन्क्रिप्शन की चाबियां यूजर के फोन में होती हैं, कंपनी के पास नहीं।
इस विवाद को तब और हवा मिली जब Elon Musk ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर WhatsApp को 'सुरक्षित नहीं' बताया। उन्होंने यहां तक कहा कि Signal भी पूरी तरह भरोसेमंद नहीं है और यूजर्स को X के नए चैट फीचर अपनाने की सलाह दी। Musk की इस टिप्पणी के बाद प्राइवेसी को लेकर बहस और तेज हो गई।
WhatsApp के प्रमुख Will Cathcart ने Musk के दावों को 'पूरी तरह झूठा' बताते हुए कहा कि यह एक 'नो-मेरिट, हेडलाइन-सीकिंग' मुकदमा है। Cathcart ने स्पष्ट किया कि WhatsApp किसी भी यूजर की चैट नहीं पढ़ सकता और कंपनी के पास एन्क्रिप्शन की चाबियां नहीं होती हैं।
भारत WhatsApp का सबसे बड़ा बाजार है, जहां करोड़ों लोग रोजमर्रा की बातचीत, बिजनेस और पेमेंट्स के लिए इस ऐप का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में इस केस का असर भारतीय यूजर्स के भरोसे पर पड़ सकता है। हालांकि प्राइवेसी विशेषज्ञों का कहना है कि WhatsApp की E2E एन्क्रिप्शन ट्रांजिट के दौरान मजबूत है, लेकिन क्लाउड बैकअप और मेटाडेटा जैसे मुद्दे अभी भी चिंता का विषय बने हुए हैं।
फिलहाल यह मामला कोर्ट में है और इसका फैसला आने में समय लग सकता है। लेकिन इतना तय है कि यह केस सिर्फ WhatsApp तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी टेक इंडस्ट्री में यूजर प्राइवेसी और डेटा सुरक्षा पर नई बहस को जन्म देगा। Meta ने Musk के आरोपों पर औपचारिक रूप से कोई अतिरिक्त टिप्पणी नहीं की है, लेकिन आने वाले दिनों में यह विवाद और गहराने की संभावना है।