Collagen Deficiency Symptoms: अगर शरीर में हो रही है कोलेजन की कमी, तो त्वचा और सेहत में दिखते हैं ये संकेत। इसलिए समय रहते पहचानें और समाधान अपनाएं। आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ दिखने वाले लक्षणों के बारे में।
Collagen Deficiency Symptoms: हमारे शरीर में कोलेजन (Collagen) एक बेहद जरूरी प्रोटीन होता है, जो त्वचा की लोच, हड्डियों की मजबूती, जोड़ों की लचीलापन और बालों की सेहत को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है। उम्र बढ़ने के साथ-साथ या गलतलाइफस्टाइल के कारण शरीर में कोलेजन का लेवल कम होने लगता है, जिसका असर हमारी त्वचा, मांसपेशियों और हड्डियों पर साफ नजर आने लगता है। आइए जानें कोलेजन की कमी के कुछ प्रमुख संकेत और उसे बढ़ाने के घरेलू उपाय।
अगर आपकी त्वचा अचानक रूखी, ढीली और झुर्रियों से भरने लगे, तो यह कोलेजन की गिरती मात्रा का संकेत हो सकता है।
कोलेजन की कमी से जोड़ों में लुब्रिकेशन घटता है, जिससे चलने-फिरने पर दर्द और जकड़न महसूस होती है।
बालों का तेजी से झड़ना और उनका पतला होना भी कोलेजन की कमी का इशारा करता है।
नाखून अगर बार-बार टूटते हैं या बहुत पतले और कमजोर हो गए हैं, तो इसका कारण कोलेजन की कमी हो सकता है।
कोलेजन आंतों को मजबूत रखता है, इसकी कमी से गैस, सूजन और अपच हो सकता है।
कोलेजन मांसपेशियों को मजबूत बनाता है, इसकी कमी से कमजोरी और जल्दी थकान होती है।
त्वचा की नमी बनाए रखने के लिए कोलेजन जरूरी है। कमी के कारण स्किन बेजान और दागदार दिखने लगती है।
नींबू, आंवला, संतरा, कीवी और हरी मिर्च जैसे विटामिन C से भरपूर फूड्स कोलेजन के निर्माण में सहायक होते हैं।
दालें, अंडा, दूध, पनीर और सोया प्रोटीन का अच्छा स्रोत हैं, जो कोलेजन बनाने के लिए जरूरी अमीनो एसिड प्रदान करते हैं।
हड्डियों से बना शोरबा कोलेजन का प्राकृतिक स्रोत माना जाता है और यह आंत, त्वचा और जोड़ों के लिए फायदेमंद है।
एलोवेरा जेल और आंवला रस कोलेजन बढ़ाते हैं और त्वचा को अंदर से पोषण देते हैं।
ग्रीन टी में एंटीऑक्सीडेंट होते हैं और हल्दी में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण, जो शरीर को स्वस्थ रखते हुए कोलेजन स्तर को बनाए रखते हैं।
धूप में मौजूद UV किरणें कोलेजन को नुकसान पहुंचाती हैं। बाहर निकलते समय स्किन को प्रोटेक्ट करना जरूरी है।
तनाव से कोर्टिसोल बढ़ता है, जो कोलेजन कम करता है। अच्छी नींद और योग से तनाव कम करें।
डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।