
Monkey Viral News India: देश की राजधानी दिल्ली में इन दिनों एक अजीबोगरीब 'जॉब वैकेंसी' चर्चा का विषय बनी हुई है। दिल्ली विधानसभा परिसर में बंदरों का आतंक इतना बढ़ गया है कि सरकार को उन्हें डराने के लिए बाकायदा 'इंसानी लंगूर' (लंगूर की आवाज निकालने वाले लोगों) की वैकेंसी निकाली है। लेकिन सवाल यह है कि क्या सरकारी इंसानी लंगूरों के डर से बंदर मान जाएंगे? आज के बंदर अब पुराने जमाने जैसे सीधे- साधे नहीं रहे, वे अब 'स्मार्ट चोर' और 'नशेड़ी' बन चुके हैं। मथुरा-वृंदावन की गलियों से लेकर यूपी-बिहार की शराब दुकानों तक, बंदरों के ऐसे कारनामे जिन्हें पढ़कर आप जाएगें।
बंदरों में नशे की लत एक गंभीर समस्या बनती जा रही है। कानपुर का 'कलुआ' बंदर केस इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। अपने मालिक की वजह से उसे शराब की ऐसी लत लगी कि वह हिंसक हो गया। शराब न मिलने पर उसने करीब 250 लोगों को काटकर घायल कर दिया, जिसके बाद उसे कानपुर चिड़ियाघर में उम्रकैद की सजा दी गई। इसी तरह रायबरेली में भी बंदर शराब की दुकानों से बीयर की कैन छीनकर पीते देखे गए हैं।
वृंदावन और मथुरा में बंदर अब किसी 'प्रोफेशनल पॉकेटमार' की तरह काम कर रहे हैं। वे जानते हैं कि इंसान के लिए उसका मोबाइल कितना कीमती है। वे चुपचाप आते हैं, पलक झपकते ही फोन छीनते हैं और ऊंचाई पर जा बैठते हैं। जब तक आप उन्हें उनकी पसंदीदा 'फ्रूटी' या खाने का सामान नहीं दिखाते, वो फोन वापिस नहीं करते हैं।
दिल्ली विधानसभा एक सेफ एरिया है, लेकिन यहां बंदरों का आतंक बढ़ गया है। इसलिए अब सरकार ने ऐसे लोगों की भर्ती निकाली है जो लंगूर की हूबहू आवाज निकाल सकते हैं। इन लोगों का काम विधानसभा परिसर के गेट पर तैनात रहकर डरावनी आवाजें निकालना है, ताकि बंदरों को लगे कि आसपास लंगूर मौजूद हैं और वे डरकर भाग जाएं। पहले बंदरों को भगाने के लिए असली लंगूरों का इस्तेमाल होता था, लेकिन वन्यजीव नियमों के कारण उन पर पाबंदी लग गई।
जंगलों के खत्म होने और इंसानों के बहुत करीब रहने के कारण बंदरों के व्यवहार बदलने लगा है। जब पर्यटक मजे के लिए उन्हें इंसानों की खाने वाली चीजें देते हैं, तो बंदरों का दिमाग उन्हें इनाम की तरह देखने लगता है। अब बंदरों की नई जनरेशन धीरे- धीरे और ज्यादा आतंकी और 'गैंग' बनाकर चोरी करना सीख रहे हैं।