Tawang Travel Guide in Hindi: अगर आप इस समर वेकेशन दिल्ली, नोएडा और गुड़गांव जैसे शहरों की भीड़भाड़ से दूर किसी शांत और सुकून भरी जगह जाना चाहते हैं, तो हमारी आज की यह स्टोरी आपके काम आ सकती है।
Best Places To Visit in Tawang in Summer: अगर आप दिल्ली नोएडा और गुड़गांव जैसे शहरों के भीड़भाड़ से दूर कहीं सुकून के पल बिताना चाहते हैं, तो हमारी आज की स्टोरी आपके लिए है। आज की स्टोरी में हम एक ऐसी जगह के बारे में बताने जा रहे हैं जहां बादल सिर्फ आसमान में ही नहीं बल्कि इंसानों के साथ-साथ चलते हैं, जहां नेचर और इंसान मिलकर एक साथ रहते हैं और जहां खूबसूरती किसी एक जगह नहीं बल्कि कोने-कोने में रहती है। ऐसे में अगर आप इस समर वेकेशन किसी ऐसी जगह जाना चाहते हैं तो अपना बैग पैक कीजिए और अपना ट्रिप प्लान कर लीजिए। आइए जानते हैं इस जगह के बारे में विस्तार से।
अरुणाचल प्रदेश का तवांग एक ऐसी जगह है, जहां पहुंचकर आपको यकीन हो जाएगा कि खूबसूरती असल में क्या होती है। इसे धरती का स्वर्ग भी कहें तो कम है। यहां की सबसे खास बात यह है कि यहां सिर्फ पहाड़ और नदियां ही नहीं हैं, बल्कि एक अलग ही तरह की शांति है। यहां कुदरत और इंसान इतने करीब हैं कि आपको लगेगा ही नहीं कि आप किसी शहर से आए हैं। तवांग में आपको बादलों को देखने के लिए गर्दन ऊपर करने की जरूरत नहीं पड़ती। यहां बादल आपके साथ-साथ सड़कों पर चलते हैं। कभी-कभी तो ऐसा होता है कि आप अपने होटल की खिड़की खोलते हैं और ठंडे-ठंडे बादल सीधे आपके कमरे के अंदर आ जाते हैं। ऐसा लगता है जैसे आप बादलों के बीच में कोई सपना देख रहे हों। यह एहसास इतना जादुई होता है कि आप घंटों बस उन्हें देखते रह सकते हैं और महसूस कर सकते हैं कि कुदरत आपके कितने करीब है।
यहां के लोग और यहां का माहौल देखकर आपको समझ आएगा कि कुदरत के साथ मिलकर कैसे रहा जाता है। यहां की मोनपा जनजाति के लोग पहाड़ों को अपनी जान से ज्यादा प्यार करते हैं। वे पेड़ों और नदियों को नुकसान पहुंचाने के बजाय उनकी पूजा करते हैं। यहां न कोई शोर-शराबा है और न ही प्रदूषण। लोगों का रहन-सहन बहुत सादा है और वे आज भी अपनी पुरानी परंपराओं को मानकर पहाड़ों की हिफाजत कर रहे हैं।
वैसे तो तवांग में घूमने के लिए बहुत सी खूबसूरत जगहें हैं जो आपका दिल जीत लेंगी। यहां का तवांग मठ पूरे भारत का सबसे बड़ा मठ है, जहां की शांति आपको अंदर तक सुकून देती है। इसके अलावा सेला पास की बर्फीली चोटियां और वहां की जम चुकी झील को देखना किसी अजूबे से कम नहीं है। आप माधुरी झील (Madhuri Lake) भी जा सकते हैं जो ऊंचे पहाड़ों के बीच बसी है और अपनी सुंदरता के लिए जानी जाती है। तवांग वार मेमोरियल जाकर आप देश के वीर जवानों को याद कर सकते हैं और नूरानांग वाटरफॉल (Nuranang Waterfall), जिसे जांग फॉल्स या बोंग बोंग फॉल्स के नाम से भी जाना जाता है, इसे देखने भी आप जा सकते हैं।
तवांग जाने का सबसे सही समय मार्च से जून और फिर सितंबर से अक्टूबर के बीच का होता है। लेकिन अगर आपको बर्फबारी और जमा देने वाली ठंड पसंद है, तो आप दिसंबर या जनवरी में जा सकते हैं, लेकिन उस समय भारी बर्फ की वजह से कभी-कभी सेला पास वाले रास्ते बंद हो जाते हैं। मानसून के दौरान यहां जाने से बचना चाहिए क्योंकि भारी बारिश की वजह से पहाड़ों पर रास्ता मिलना मुश्किल हो जाता है।
दिल्ली से तवांग जाने के लिए पहले आप दिल्ली से गुवाहाटी के लिए फ्लाइट या ट्रेन ले सकते हैं। गुवाहाटी पहुंचने के बाद आप वहां से टैक्सी या बस ले सकते हैं जो आपको तेजपुर या बोमडिला होते हुए तवांग ले जाएगी। चूंकि गुवाहाटी से तवांग का सफर लंबा और थका देने वाला होता है, इसलिए ज्यादातर लोग रास्ते में बोमडिला या दिरांग में एक रात रुकना पसंद करते हैं ताकि वे पहाड़ों के नजारों का मजा ले सकें।
तवांग जाने के लिए सबसे जरूरी चीज वहां का एंट्री परमिट है, जिसे इनर लाइन परमिट कहा जाता है। आप यह परमिट ऑनलाइन या गुवाहाटी और तेजपुर जैसे शहरों में बने अरुणाचल सरकारी दफ्तरों से आसानी से बनवा सकते हैं। इसके बिना आपको बॉर्डर पर रोक दिया जाएगा, इसलिए यात्रा शुरू करने से पहले अपने आईडी प्रूफ के साथ इसे तैयार रखना बहुत जरूरी है।
तवांग की यात्रा पर निकलने से पहले अपनी पैकिंग और खान-पान का खास ख्याल रखना जरूरी है। वहां साल भर काफी ठंड रहती है, इसलिए अपने साथ भारी गरम कपड़े, जैकेट, दस्ताने और ऊनी टोपी जरूर रखें। पहाड़ों पर कभी भी बारिश हो सकती है, इसलिए एक रेनकोट साथ रखना बहुत काम आता है। खाने की बात करें तो वहां के गरमा-गरम मोमोज और थुपका आप ट्राई कर सकते हैं। इसके अलावा यहां की मशहूर बटर टी यानी सुजा पीना भी आ पी सकते है जो शरीर को अंदर से गरम रखती है। इसके साथ ही वहां के लोकल स्नैक्स और पहाड़ी जायकों को चखना आपकी ट्रिप को यादगार बना देगा।