Black Turmeric For Cancer : आईआईएमएस बीएचयू (IMS-BHU) समेत पांच प्रमुख विभागों द्वारा हो रहे शोध में पाया गया कि ब्लैक हल्दी से सर्वाइकल कैंसर का इलाज हो सकता है। ये कीमोथेरेपी से भी बेहतर हो सकता है।
Black Turmeric For Cancer Treatment : पीली हल्दी तो हमने देखी है। पर, काली हल्दी शायद कम ही लोग जानते हैं। इसको लेकर एक खुशखबरी है। साइंस डायरेक्ट पर प्रकाशित आईआईएमएस बीएचयू (IMS-BHU) समेत पांच प्रमुख विभागों द्वारा हो रहे शोध में पाया गया कि ब्लैक हल्दी से कैंसर सेल्स को खत्म किया जा सकता है। सर्वाइकल कैंसर इलाज में हल्दी से नई उम्मीद जगी है।
विज्ञान और आयुर्वेद का ये संगम कैंसर को हराने के काम आ सकता है। इस शोध का मुख्य केंद्र रही है 'काली हल्दी' (Black Turmeric), जिसे वैज्ञानिक भाषा में Curcuma caesia कहा जाता है। ये अब कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए यूज होगी।
इस रिसर्च में वैज्ञानिकों ने काली हल्दी के ‘मेथिलोनिक एक्सट्रैक्ट’ (Methylonic Extract) का उपयोग किया। शोधकर्ताओं का दावा है कि यह अर्क कैंसर की कोशिकाओं को न केवल नष्ट करने में सक्षम है, बल्कि उनकी वृद्धि को रोकने में भी अत्यंत प्रभावी साबित हुआ है।
इस अध्ययन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि जहां कीमोथेरेपी जैसे पारंपरिक इलाज शरीर की स्वस्थ कोशिकाओं को भी नुकसान पहुंचाते हैं, वहीं काली हल्दी का यह अर्क सामान्य कोशिकाओं पर बहुत कम या न के बराबर असर डालता है।
वैज्ञानिकों के अनुसार, इसके इस्तेमाल से शरीर पर कोई गंभीर दुष्प्रभाव (Side Effects) नहीं दिखे, जो इसे भविष्य के कैंसर उपचार के लिए एक सुरक्षित विकल्प बनाता है।
बीएचयू का यह शोध कैंसर के उपचार में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। यदि काली हल्दी से बनी दवाएं क्लिनिकल ट्रायल में सफल रहती हैं, तो यह कम लागत और बिना साइड इफेक्ट वाला इलाज प्रदान करेंगी।
mskcc.org रिपोर्ट के अनुसार, पीली हल्दी भी कैंसर सेल्स को खत्म करने में सक्षम है। इसके ऊपर भी शोध किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि पीली हल्दी से कैंसर इलाज का ट्रायल फेज 2 चल रहा है।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी विभिन्न शोधों और वैज्ञानिक अध्ययनों पर आधारित है, जिसका उद्देश्य केवल जागरूकता बढ़ाना और शैक्षिक जानकारी प्रदान करना है। इसे किसी बीमारी के उपचार या डॉक्टरी सलाह के रूप में न लें। अपनी जीवनशैली या आहार में कोई भी बदलाव करने से पहले किसी योग्य चिकित्सक या संबंधित विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।