Cleanest Village in India Satara Maharashtra: आज के लेख में आइए जानते हैं एक ऐसे गांव के बारे में जिसके आगे शहर भी फेल हैं। अगर आप चाहें तो इस समर वेकेशन शहर की भीड़-भाड़ से दूर सुकून के कुछ पल बिताने के लिए इस गांव में घूमने जा सकते हैं।
Cleanest Village in India Satara Maharashtra: अक्सर जब भी गांव की बात होती है, तो सबसे पहले ज्यादातर लोगों के दिमाग में खेत और खलिहान के बाद धूल, मिट्टी, कीचड़ और गंदगी की तस्वीरों के साथ ही स्कूल और 24 घंटे बिजली जैसी जरूरी चीजों का आसानी से ना मिल पाना आता है। और हो भी क्यों ना, आज के समय में कई शहरों के भी यही हाल हैं। लेकिन कैसा होगा अगर हम कहें कि हमारे देश में एक ऐसा गांव भी है जहां ऑटोमैटिक सोलर स्ट्रीटलाइट्स के साथ ही बुजुर्गों के लिए खास 'हैंगआउट स्पॉट' भी है? यहां की सड़कों पर धूल-मिट्टी तो छोड़िए, यहां के लोग इतनी सफाई रखते हैं कि तबेले से भी बदबू नहीं आती है। सुनने में यह थोड़ा अजीब लग सकता है लेकिन यह सच है। आज की इस स्टोरी में हम देश के एक ऐसे गांव के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां आपको शहरों से भी ज्यादा साफ-सफाई और व्यवस्था मिलेगी। आइए जानते हैं इस गांव के बारे में विस्तार से और अगर आप चाहें तो इस समर वेकेशन शहर की भीड़-भाड़ से दूर कुछ सुकून के पल बिताने के लिए इस गांव में घूमने भी जा सकते हैं।
हम जिस गांव की बात कर रहे हैं, वह महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले में ताडोबा नेशनल पार्क के पास बसा सातारा गांव है। यह गांव किसी फिल्म के सेट जैसा साफ और व्यवस्थित है। यहां के लोगों ने मिलकर अपने गांव को ऐसा बना दिया है कि बड़े-बड़े शहर भी इसके आगे फेल हैं। इस गांव में घुसते ही आपको सबसे पहले सोलर लाइट्स दिखेंगी, जो रात होते ही अपने आप जल जाती हैं, जिससे गांव हमेशा उजला रहता है। इसके साथ ही यहां का माहौल बिगाड़ने वालों के लिए सख्त नियम है। अगर किसी ने गाली-गलौज की, तो उसे सीधे 500 रुपये का जुर्माना भरना पड़ता है।
इस गांव में सिर्फ हाई-टेक सुविधा ही नहीं है, बल्कि यहां के सीनियर सिटीजन्स का भी खास ख्याल रखा गया है। उनके लिए एक 'हैंगआउट स्पॉट' बनाया गया है जहां वे आराम कर सकते हैं और आपस में जी भरकर बातें कर सकते हैं। वहीं बच्चों के पढ़ने के लिए एक प्यारी सी छोटी लाइब्रेरी भी है, ताकि वे खेल-कूद के साथ पढ़ाई भी करें।
सफाई के मामले में तो यह गांव मिसाल है। यहां आपको कहीं भी गंदगी या खुला टॉयलेट नहीं दिखेगा। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यहां के मवेशियों (Cattle Sheds) के रहने की जगह भी इतनी साफ है कि वहां से जरा भी बदबू नहीं आती। गांव वालों ने मिलकर रेन वाटर हार्वेस्टिंग और खाद बनाने (Composting) का सिस्टम भी लगाया है, जिससे पर्यावरण एकदम शुद्ध रहता है।
इस गांव की सबसे अच्छी बात यह है कि यहां जो कुछ भी है, उसके लिए सरकार से खास तौर पर पैसे नहीं मांगे गए हैं। गांव के लोगों ने खुद अपनी जेब से पैसे जुटाए, खुद मजदूरी की और अपना समय देकर इस गांव को संवारा है। इसके अलावा इस गांव की सबसे ज्यादा गर्व की बात यह है कि यहां महिलाओं का बहुत सम्मान है और वे गांव चलाने में आगे रहती हैं। ताडोबा नेशनल पार्क में जो महिलाएं सफारी गाइड का काम करती हैं, उनमें से ज्यादातर इसी सातारा गांव की रहने वाली हैं।
बता दें, इस गांव में यह सब अचानक नहीं हुआ है, बल्कि इस बड़े बदलाव के पीछे गजानन नाम के एक शख्स का हाथ है। गजानन को पूरे गांव को इस नई सोच के लिए तैयार करने में 5 साल लग गए। उन्होंने एक-एक घर जाकर लोगों को समझाया और आज उनकी मेहनत रंग लाई है। सातारा गांव हमें सिखाता है कि अगर हम ठान लें और सब साथ मिलकर काम करें, तो हम अपने आस-पास की दुनिया को वाकई बदल सकते हैं।