Eid Mubarak 2026 : भारत में आज ईद मनाई जा रही है। वहीं, दुबई, सउदी अरब, कतर में कल ईद मनाई गई। ईरान इजरायल युद्ध के बीच वहां पर ईद कैसे मनाई गई। पत्रिका के साथ बातचीत में कई मुस्लिम ने अपना अनुभव शेयर किया।
Indian Muslims from Qatar Dubai Eid Celebration 2026 : अमेरिका, इजरायल और ईरान का युद्ध (Iran Israel war Latest News) जारी है। इसको लेकर दुबई, कतर, सऊदी अरब पर भी बमबारी जारी है। इस युद्ध के कारण ना जाने कितने भारतीय मजदूर फंसे हैं। आसमान से बरसते बम के बीच ईद का चांद भी निकला और गल्फ देश में कल यानी 20 मार्च को ईद मनाई गई। पत्रिका के रवि कुमार गुप्ता ने वहां पर फंसे भारतीय मुस्लिमों से बातचीत की। उन्होंने बताया कि युद्ध के बीच ईद (Eid 2026) कैसे मनी।
दुबई में काम कर रहे शेख वसीम अकरम, (मूलरूप से बांका, बिहार) ने बताया, हम लोग महीने भर से आसमान में मिसाइल देख रहे हैं। सिर के ऊपर से ये मिलाइलें जा रही हैं। कई बार ऐसा लगता है कि कहीं ये हमारे वर्कशेड पर गिरी तो घर के लोगों को खबर तक नहीं होगी। पूरा रमजान का महीना इस डर के साए में गुजर गया। लग रहा था कि ईद नहीं मना पाएंगे पर ईद भी मना ली। हर दिन डर के साथ गुजरता है। ईद मनाते वक्त भी यही सब बातें चल रही थीं। हम लोग सोच रहे थे कि पता नहीं ये हमारी आखिरी ईद ना हो जाए! बस, इसलिए हम लोगों ने सोचा कि क्यों ना इस ईद बेहतर तरीके से मना लें। जितना संभव था बिरयानी से लेकर कबाब, मिठाई, सेवई जी भरकर खाया। घर पर भी वीडियो कॉल के जरिए ईद की मुबारकबाद दे दी।
वसीम ने अपनी मासूम बेटी को याद करते हुए कहा, बेटी टीवी चैनल पर युद्ध की खबरें देखती है। वो जब पूछती है कि पापा कब घर आओगे। कुछ जवाब नहीं दे पाता हूं। उसके सामने रो नहीं पाता। पर, उसकी खुशी के लिए कह देता हूं कि बेटा तेरे पापा सबसे सेफ जगह पर हैं। उनके ऊपर ना बम गिरेगा ना मिसाइल।
कतर में काम कर रहे गोपालगंज के सद्दाम शेख कहते हैं, हमने ईद को वैसे ही मनाया जैसे पहले मनाया करते थे। युद्ध के कारण तो डर हमारे भीतर भी है। पर, इसकी खातिर खुश होने का ये एक मौका भी कैसे गंवा दे। अगर खुदा ने चाहा तो अगली ईद घर-परिवार के साथ भारत में मनाएंगे।
हमने इनसे पूछा कि आप अपने मुल्क क्यों नहीं लौट आते। इस पर वसीम कहते हैं, बात फ्लाइट की नही हैं। अभी कर्ज लेकर भारत से आया हूं। कुछ ही महीने हो रहे हैं। अगर चला गया तो कर्ज कैसे भरूंगा। घर-परिवार कैसे गुजारा करेंगे। घर पर क्या करेंगे। ऐसी मजबूरी सिर्फ मेरी नहीं है। अधिकतर भारतीयों को हाल ऐसा ही है। हर कोई यहां पर मजबूरी में ही काम करने आया है। पर, मजबूरी को किनारे करके पूछा जाए तो दिल कहता है कि घर लौट जाना चाहिए।