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Mineral Deficiency: डाइट ठीक फिर भी कमजोरी? महिलाओं में मिनरल की कमी के संकेत जानें

Mineral Deficiency: कई बार महिलाएं घर का बना, संतुलित खाना खाती हैं, फिर भी शरीर में कमजोरी, थकान या चक्कर जैसी समस्याएं बनी रहती हैं। इसका एक बड़ा कारण शरीर में जरूरी मिनरल्स की कमी हो सकता है। ये कमियां धीरे-धीरे असर दिखाती हैं, इसलिए अक्सर नजरअंदाज हो जाती हैं।

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Jan 04, 2026
Female body nutrition|फोटो सोर्स – Gemini@Ai

Mineral Deficiency In Women: अगर आपकी डाइट ठीक है, फिर भी शरीर में लगातार कमजोरी, थकान या एनर्जी की कमी महसूस हो रही है, तो इसे नजरअंदाज न करें। खासतौर पर महिलाओं में मिनरल की कमी एक आम लेकिन छुपी हुई समस्या बनती जा रही है। नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के मुताबिक, मिनरल्स महिलाओं की ओवरऑल हेल्थ, हार्मोनल बैलेंस और रिप्रोडक्टिव हेल्थ के लिए बेहद जरूरी होते हैं। इसलिए शरीर के इन शुरुआती संकेतों को समझना और समय पर ध्यान देना बहुत जरूरी है।सही समय पर इसके संकेत पहचान लिए जाएं, तो बड़ी हेल्थ प्रॉब्लम से बचा जा सकता है।

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सोडियम की कमी

बार-बार सिरदर्द, जी मिचलाना, मांसपेशियों में खिंचाव, लो ब्लड प्रेशर और चक्कर आना ये सोडियम की कमी के आम संकेत हैं।जो महिलाएं ज्यादा सीना बहाती हैं, बहुत कम नमक लेती हैं या जरूरत से ज्यादा पानी पीती हैं, उनमें यह समस्या ज्यादा देखी जाती है। इसके लिए साधारण नमक सीमित मात्रा में, छाछ, नारियल पानी, सूप, दही, घर का बना नमकीन भोजन।

मैग्नीशियम की कमी

लगातार थकान, नींद न आना, बेचैनी, सिरदर्द, मसल क्रैम्प्स और पीरियड्स का अनियमित होना मैग्नीशियम की कमी का संकेत हो सकता है। यह कमी पीरियड्स से पहले होने वाले मूड स्विंग्स और दर्द को भी बढ़ा देती है। ऐसे में डाइट में हरी पत्तेदार सब्जिया, केला, बादाम, काजू, मूंगफली, साबुत अनाज और सीमित मात्रा में डार्क चॉकलेट शामिल करना फायदेमंद रहता है।

जिंक की कमी

अगर बाल ज्यादा झड़ रहे हैं, बार-बार इंफेक्शन हो रहा है, घाव देर से भरते हैं, मुंह का स्वाद कम लगता है या पिंपल्स बढ़ गए हैं, तो यह जिंक की कमी का संकेत हो सकता है। जिंक पीरियड्स, स्किन और फर्टिलिटी को भी प्रभावित करता है। इसकी भरपाई के लिए कद्दू के बीज, चना, राजमा, दालें, नट्स, अंडा और साबुत अनाज खाना फायदेमंद माना जाता है।

कैल्शियम की कमी

हड्डियों और पीठ में दर्द, नाखूनों का कमजोर होना, दांतों की परेशानी, बार-बार फ्रैक्चर और मांसपेशियों में ऐंठन कैल्शियम की कमी के लक्षण हो सकते हैं। लंबे समय तक यह कमी रहने से ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा बढ़ जाता है। कैल्शियम की पूर्ति के लिए दूध, दही, पनीर, तिल, रागी, सोयाबीन, बादाम और हरी सब्ज़ियाँ डेली डाइट में शामिल करनी चाहिए।

आयरन की कमी

महिलाओं में आयरन की कमी सबसे आम है, खासकर पीरियड्स और प्रेग्नेंसी के कारण। इसके लक्षणों में लगातार थकान, चेहरे की रंगत फीकी पड़ना, सांस फूलना, चक्कर आना, बाल झड़ना और ध्यान न लगना शामिल हैं। आयरन लेवल बढ़ाने के लिए पालक, चुकंदर, अनार, सेब, गुड़, खजूर, किशमिश, दालें और बाजरा खाएं। साथ ही आयरन के बेहतर अवशोषण के लिए विटामिन C युक्त फल लेना भी जरूरी है।

सेलेनियम की कमी

कमज़ोर इम्युनिटी, बालों का पतला होना, मांसपेशियों में दर्द, लगातार थकान और थायरॉइड से जुड़ी दिक्कतें सेलेनियम की कमी से जुड़ी हो सकती हैं। ऐसी स्थिति में ब्राजील नट्स, सूरजमुखी के बीज, अंडा, मछली, साबुत अनाज और दूध को डाइट का हिस्सा बनाना मददगार हो सकता है।

कॉपर की कमी

अगर आयरन लेने के बाद भी एनीमिया ठीक नहीं हो रहा, हाथ-पैर सुन्न रहते हैं, बार-बार बीमार पड़ती हैं या बाल समय से पहले सफेद होने लगे हैं, तो यह कॉपर की कमी का संकेत हो सकता है। कॉपर की पूर्ति के लिए काजू, अखरोट, तिल, सूरजमुखी के बीज, साबुत अनाज, दालें और सीमित मात्रा में डार्क चॉकलेट लेना फायदेमंद माना जाता है।

डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

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