Holi Special Moong Dal Kachori Recipe: आज की इस स्टोरी में हम स्टेप बाय स्टेप राजस्थान की फेमस मूंग दाल कचौड़ी की रेसिपी बताने जा रहे हैं। इस आसान तरीके को फॉलो करके आप खस्ता और फूली फूली कचौड़ी बड़े आसानी से बना सकती हैं। आइए जानते हैं इसे बनाने का सही तरीका।
Holi Special Moong Dal Kachori Recipe: होली 2026 के आने में अब ज्यादा दिन नहीं बचे हैं। ऐसे में लोग घर की सफाई के साथ-साथ चावल की कचरी, आलू के चिप्स और पापड़ जैसी पारंपरिक चीजें पहले से बनाना शुरू कर दिए हैं। होली के दिन वैसे तो कई तरह के पकवान बनाए जाते हैं, लेकिन अगर कुछ चीजें पहले से तैयार हों तो त्योहार वाले दिन मेहमानों के साथ समय बिताने और आराम से होली खेलने का अच्छा मौका मिल जाता है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए आज की इस स्टोरी में हम स्टेप बाय स्टेप राजस्थान की फेमस मूंग दाल कचौड़ी की रेसिपी बता रहे हैं। इस आसान तरीके को फॉलो करके आप खस्ता और फूली फूली कचौड़ी बड़े आसानी से बना सकती हैं। इसके अलावा इस कचौड़ी की खास बात यह है कि इसे आप 15 दिनों तक स्टोर करके भी रख सकती हैं। आइए जानते हैं इसे बनाने का तरीका।
कचौड़ी के लिए परफेक्ट आटा लगाने के लिए सबसे पहले एक कप मैदा लें। इसमें आधा चम्मच नमक और आधा चम्मच अजवाइन डालकर अच्छी तरह मिला लें। खस्ता कचौड़ी के लिए मोयन सबसे जरूरी होता है। मोयन के लिए घी की जगह तेल भी इस्तेमाल कर सकती हैं। घी या तेल डालने के बाद आटे को हथेलियों से अच्छी तरह रगड़ते हुए मिलाएं, ताकि तेल आटे में अच्छी तरह मिल जाए। इसके बाद मोयन सही से लगा है या नहीं, यह देखने के लिए थोड़ा सा आटा हाथ में लेकर लड्डू बनाएं। अगर लड्डू आसानी से बन जाए और हल्का दबाने पर टूट जाए, तो मोयन सही है। ध्यान दें, अगर मोयन सही नहीं होगा तो कचौड़ी खस्ता नहीं बनेगी। मोयन लगाने के बाद अब थोड़ा थोड़ा पानी डालते हुए हल्का सॉफ्ट आटा गूंध लें। आटा ज्यादा सख्त नहीं होना चाहिए। गूंधने के बाद इसे ढककर 15 से 20 मिनट के लिए रख दें।
एक कप बिना छिलके वाली मूंग दाल को 2 से 3 घंटे पहले पानी में भिगो दें। ध्यान रखें दाल बहुत ज्यादा गलनी नहीं चाहिए और ना ही बहुत कड़क रहनी चाहिए। भीगने के बाद दाल को धो लें और मिक्सी में दरदरा पीस लें। ध्यान दें इसे बिल्कुल बारीक पेस्ट न बनाएं, हल्के दाने दिखने चाहिए।
दाल तैयार करने के बाद अब मसाला तैयार करें। मसाले के लिए अब आप एक चम्मच साबुत धनिया, एक चम्मच सौंफ और 10 से 12 काली मिर्च को दरदरा पीस लें। इसके बाद कढ़ाई में तेल गरम करें और उसमें आधा चम्मच जीरा डालें। जीरा चटकने लगे तो पिसा हुआ मसाला और एक चुटकी हींग डाल दें। फिर 4 छोटे चम्मच बेसन डालकर धीमी आंच पर खुशबू आने तक भूनें। अब दरदरी पिसी मूंग दाल डालें और आंच धीमी कर के इसे चलाते हुए भूनें। दाल को अच्छी तरह से भूननें के बाद इसमें 1 चम्मच लाल मिर्च पाउडर, आधा चम्मच हल्दी, आधा चम्मच धनिया पाउडर, 1 चम्मच नमक, आधा चम्मच गरम मसाला, आधा चम्मच अमचूर, आधा चम्मच चाट मसाला और थोड़ी सी कसूरी मेथी डालकर धीमी आंच पर लगातार चलाते रहें। जब मसाला एक दम सूख जाए और अलग अलग होने लगे, तब गैस बंद कर दें और ठंडा होने दें।
कचौड़ी बनाने के लिए आटे की छोटी लोई लें। उसे हल्का सा बेलें और बीच में स्टफिंग रखें। फिर किनारों को ऊपर की तरफ लाकर बंद करें और अतिरिक्त आटा हटा दें। ध्यान रखें लोई ज्यादा मोटी न हो। हल्का पतला रखें, तभी कचौड़ी अच्छे से फूलेगी।
कचौड़ी तलते समय तेल सामान्य गर्म होना चाहिए, बहुत तेज नहीं। पहले एक छोटी लोई डालकर तेल चेक करें। अगर वह नीचे बैठ जाए तो तेल सही है। गैस की आंच धीमी रखें। कचौड़ी जब ऊपर तैरने लगे तभी पलटें। ऊपर से हल्का सा तेल डालते रहें ताकि कचौड़ी अच्छे से फूले और खस्ता बने।
पहले कचौड़ी को हल्का सुनहरा होने तक एक बार तलें। फिर उसे बाहर निकाल के दोबारा तेल को थोड़ा ठंडा होने दें और फिर दोबारा धीमी आंच पर तलें। इससे कचौड़ी ज्यादा खस्ता बनेगी और रंग भी अच्छा आएगा।
गरमा गरम खस्ता मूंग दाल कचौड़ी को इमली की चटनी और तली हुई हरी मिर्च के साथ परोसें। होली पर जब मेहमान आपके हाथ की बनी यह कचौड़ी चखेंगे, तो उन्हें यकीन ही नहीं होगा कि यह घर पर तैयार की गई है।