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Destination wedding: लाखों खर्च कर विदेश में शादियां करने का क्रेज, थाईलैंड और यूरोप में फेरे ले रहे भारतीय

Destination Wedding: भारतीय परिवारों में डेस्टिनेशन वेडिंग का ट्रेंड तेजी से बढ़ा है, जहां थाईलैंड और वियतनाम पहली पसंद बन रहे हैं। सुरक्षा के लिए ट्रैवल इंश्योरेंस की मांग में भी भारी उछाल आया है।

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Feb 05, 2026
भारत के लोगों में विदेश में डेस्टिनेशन वेडिंग का क्रेज। ( फोटो: AI)

International Destination Wedding: भारतीय शादियों का अंदाज (Wedding Trends 2026) अब पूरी तरह बदल रहा है। कभी घर के आंगन या शहर के बैंक्वेट हॉल में होने वाली शादियां अब सात समंदर पार विदेशी लोकेशंस पर हो रही हैं। पॉलिसीबाजार (PolicyBazaar) की एक हालिया रिपोर्ट ने इस बात की तस्दीक की है कि भारतीयों में 'इंटरनेशनल डेस्टिनेशन वेडिंग' (Destination Wedding) का खुमार सिर चढ़ कर बोल रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, विदेशों में शादी करने वाले परिवारों द्वारा ट्रैवल इंश्योरेंस (Travel Insurance) खरीदने की रफ्तार में भारी उछाल आया है।

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इस बारे में आंकड़े क्या कहते हैं ?

यह बदलाव रातों-रात नहीं हुआ, बल्कि पिछले कुछ सालों में यह ट्रेंड मजबूत हुआ है। आंकड़ों पर नजर डालें तो साल 2023 से 2024 के बीच डेस्टिनेशन वेडिंग के लिए ट्रैवल इंश्योरेंस की बिक्री में 27.4% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। वहीं, 2024-25 में भी यह ग्रोथ बरकरार है। यह बताता है कि विदेश में शादी करना अब सिर्फ अमीरों का शौक नहीं, बल्कि एक सामान्य चलन बनता जा रहा है।

थाईलैंड बना भारतीयों की पहली पसंद

विदेश में शादी के लिए 'थाईलैंड' (Thailand) सबसे हॉट फेवरेट डेस्टिनेशन बन कर उभरा है। इसके पीछे तीन बड़ी वजहें हैं:

आसान वीजा: यहां का वीजा मिलना बेहद सरल है।

कम दूरी और बजट: भारत से पास होने के साथ-साथ यहां का खर्च भी कई अन्य देशों के मुकाबले कम है।

रीति-रिवाज: थाईलैंड में भारतीय शादियों के लिए जरूरी इंतजाम आसानी से मिल जाते हैं।

वियतनाम और श्रीलंका भी खूब पसंद किए जा रहे

इसके अलावा, लग्जरी शादियों के लिए दुबई (UAE) और कम बजट में बेहतरीन अनुभव के लिए वियतनाम और श्रीलंका भी खूब पसंद किए जा रहे हैं। वहीं, जो परिवार भीड़भाड़ से दूर छोटी और रॉयल शादी चाहते हैं, वे इटली, स्पेन और ग्रीस जैसे यूरोपीय देशों का रुख कर रहे हैं।

लोग अब पहले से ज्यादा सतर्क

सुरक्षा को लेकर जागरूक हुए परिवार शादी के जश्न में कोई भंग न पड़े, इसके लिए लोग अब पहले से ज्यादा सतर्क हैं। रिपोर्ट बताती है कि लोग फ्लाइट कैंसल होने, सामान खोने या मेडिकल इमरजेंसी जैसी स्थितियों से बचने के लिए ट्रैवल इंश्योरेंस को प्राथमिकता दे रहे हैं।

बड़ा कवर: ज्यादातर परिवार 2,50,000 अमेरिकी डॉलर (करीब 2 करोड़ रुपये) तक की कवर राशि चुन रहे हैं।

बुजुर्गों का ख्याल: चूंकि शादियों में दादा-दादी और नाना-नानी भी साथ जाते हैं, इसलिए 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के लिए मेडिकल कवर और पुरानी बीमारियों के इलाज वाला बीमा सबसे ज्यादा मांगा जा रहा है।

शादी का सीजन / इंश्योरेंस का सीजन

भारत में शादियों का सीजन आते ही ट्रैवल इंश्योरेंस की मांग भी बढ़ जाती है। नवंबर-दिसंबर (सर्दियों की शादियां) और जनवरी-मार्च के दौरान इंश्योरेंस की ग्रुप बुकिंग में करीब 28% की तेजी देखी गई है। यह दिखाता है कि अब पूरा का पूरा परिवार एक साथ विदेश यात्रा कर रहा है। यह रिपोर्ट भारतीय समाज की बदलती मानसिकता और आर्थिक ताकत का सुबूत है।

आर्थिक शक्ति: डेस्टिनेशन वेडिंग का बाजार 16 बिलियन डॉलर को पार कर गया है, जो बताता है कि भारतीय मिडिल क्लास और अपर-मिडिल क्लास की खर्च करने की क्षमता (Spending Power) बढ़ी है।

रिस्क मैनेजमेंट: पहले लोग ट्रैवल इंश्योरेंस को 'फालतू खर्चा' मानते थे, लेकिन अब इसे 'जरूरत' मान रहे हैं। यह वित्तीय साक्षरता (Financial Literacy) की दिशा में एक बड़ा और सकारात्मक कदम है। लोग अब 'सेलिब्रेशन' के साथ 'सिक्योरिटी' को भी महत्व दे रहे हैं।

वीजा-फ्री एंट्री का असर

हाल ही में थाईलैंड, मलेशिया और ईरान जैसे देशों ने भारतीयों के लिए वीजा-फ्री एंट्री की घोषणा की है। इसका डेस्टिनेशन वेडिंग बाजार पर क्या असर पड़ा?

घरेलू बाजार को चुनौती

अगर ज्यादा लोग विदेश जा रहे हैं, तो क्या राजस्थान (उदयपुर/जयपुर) और गोवा के वेडिंग इंडस्ट्री को नुकसान हो रहा है? एक तुलनात्मक रिपोर्ट।

वेडिंग प्लानर्स की राय

वेडिंग प्लानर्स से बात करें कि विदेश में शादी प्लान करते समय किन 5 बातों का सबसे ज्यादा ध्यान रखना चाहिए।

'वियतनाम' है नया 'गोवा'?

एक दिलचस्प एंगल यह है कि वियतनाम और श्रीलंका जैसे देश अब भारत के गोवा और केरल को टक्कर दे रहे हैं। कई रिपोर्ट्स बताती हैं कि गोवा के महंगे होटल रेट्स और टैक्सी के झंझट के कारण, लोग उतने ही बजट में वियतनाम जाकर शादी करना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। यह भारतीय टूरिज्म सेक्टर के लिए एक खतरे की घंटी (Wake-up Call) भी हो सकती है।

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