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Makar Sankranti 2026: इस एक त्योहार के हैं अनेक नाम, जानें मकर संक्रांति को किस राज्य में क्या कहते हैं और कैसे मनाया जाता है?

Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति एक ऐसा त्योहार है जिसके अनेक नाम और रूप हैं। ये भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दिखाता है और हमें याद दिलाता है कि विविधता में ही हमारी असली ताकत है। तो आइए जानें कि भारत के किस कोने से इसे क्या कहा जाता है और कैसे मनाया जाता है।
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Jan 06, 2026
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मकर संक्रांति | फोटो स्रोत: एआई जेमिनी

Makar Sankranti 2026: भारत में नए साल की शुरुआत ही त्योहारों के अलग-अलग रंगों से होती है। देश में कोने-कोने में ऐसे कई खास त्योहार मनाए जाते हैं, जिनके नाम तो अलग होते हैं पर वे त्योहार और उसे मनाने का तरीका सब एक ही होता है। मकर संक्रांति, लोहरी, पोंगल और माघ बिहू वो खास त्योहार हैं। ये सर्दियों के खत्म, सूर्य के उत्तरायण होने और फसल के कटने की खुशी में मनाया जाता है। तो आइए जानें कि भारत के किस राज्य में मकर संक्रांति क्या कहा और कैसे मनाया जाता है।

उत्तर भारत में इसे मकर संक्रांति और खिचड़ी कहते हैं

उत्तर भारत में मकर संक्रांति | फोटो स्रोत: एआई जेमिनी

भारत के उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और आस-पास की जगहों पर इस त्योहार को मकर संक्रांति या फिर खिचड़ी के नाम से मनाया जाता है। ये ज्यादातर 14 जनवरी को मनाया जाता है। इस खास दिन लोग उड़द की दाल और चावल की खिचड़ी बना कर घी के साथ खाते हैं। तिल, गुड़ और मूंगफली का इस दिन विशेष महत्व होता है। कई लोग नदियों में स्नान और दान-पुण्य भी करने जाते हैं।

पंजाब और हरियाणा में कहा जाता है लोहड़ी

पंजाब और हरियाणा में लोहड़ी | फोटो स्रोत: एआई जेमिनी

लोहड़ी सिखों और पंजाबियों का बेहद खास त्योहार है। ये 13 जनवरी को मकर संक्रांति से एक रात पहले मनाया जाता है। इस त्योहार के दिन अलाव (बॉनफायर) जला कर इसमें रेवड़ी, गुड़, मूंगफली और पॉपकॉर्न को डाला जाता है, और लोग इसके चारों ओर नाचते-गाते हैं। लोहड़ी के बाद दिन बड़े होने लगते हैं। इस दिन सिखों और पंजाबियों के घर सरसों का साग और मक्की की रोटी खासतौर पर बनाई जाती है।

तमिलनाडु में इसे पोंगल नाम से जानते हैं

तमिलनाडु में पोंगल| फोटो स्रोत: एआई जेमिनी

तमिलनाडु में और इसके आप-पास की जगहों पर मकर संक्रांति को पोंगल नाम से मनाया जाता है। यहां ये त्योहार पूरे 4 दिन के लिए मनाया जाता है, जिसमें पहले दिन भोगी पोंगल, दूसरे दिन सूर्य पोंगल, तीसरे दिन मट्टू पोंगल और चौथे दिन कन्या पोंगल मनाया जाता है। यहां एक अलग ही रिवाज है, जैसे कि लोग इस दिन मिट्टी के बर्तन में चावल, दूध और गुड़ को उबालते हैं। जब ये उबाल खाकर बर्तन से बाहर निकलने लगता है, तो सब मिलकर "पोंगलो पोंगल" नारे लगाते हैं। इस पकवान को सबसे पहले सूर्य भगवान को चढ़ाया जाता है।

गुजरात में इसे उत्तरायण के नाम से मनाते हैं

गुजरात में उत्तरायण | फोटो स्रोत: एआई जेमिनी

गुजरात में मकर संक्रांति को उत्तरायण के नाम से मनाते हैं और यहां इसे पतंगबाजी का त्योहार माना जाता है। अहमदाबाद में तो इंटरनेशनल पंतग मेला ही ऑर्गनाइज किया जाता है। सुबह से लेकर शाम तक आसमान में केवल रंग-बिरंगी पतंगे ही दिखाई देती हैं।

असम में होता है बिहू

असम में बिहू | फोटो स्रोत: एआई जेमिनी

असम में इस त्योहार को माघ बिहू या भोगाली बिहू के नाम से मनाया जाता है। पहले दिन उरुका होता है, जब युवा लोग खेतों में भेलाघर नाम की झोपड़ी बनाते हैं। अगले दिन सुबह मेजी (अलाव या बॉनफायर) जलाई जाती है और भगवान से प्रार्थना की जाती है। इस दिन चावल से बने केक बनाए जाते हैं। लोग ट्रेडिशनल गेम खेलते हैं और डांस गाना करते हैं।

पश्चिम बंगाल इसे कहा जाता है पौष संक्रांति

पश्चिम बंगाल पौष संक्रांति | फोटो स्रोत: एआई जेमिनी

बंगाल में इस दिन को पौष संक्रांति कहा जाता है। धान की फसल की कटाई के इस समय चावल के आटे से अलग-अलग तरीके के पीठे बनाए जाते हैं। खजूर के गुड़ से बनी चावल की खीर बनाई जाती है। घरों को सजाया जाता है और रंगोली बनाई जाती है। देवी लक्ष्मी की पूजा की जाती है।

कर्नाटक इसे मनाया जाता है एल्लू बिरोधु के नाम से

कर्नाटक एल्लू बिरोधु | फोटो स्रोत: एआई जेमिनी

कर्नाटक में इसे एल्लू बिरोधु कहा जाता है। महिलाएं एल्लू बेला बनाती हैं जो कि तिल, गुड़, नारियल और गन्ने से बनाया जाता है। ये बनाकर वे कम से कम दस घरों में इसे बांटती हैं। किसान अपने बैलों को सजाते हैं और 'किच्चू हायिसुवुडु' नाम की पूजा करते हैं और आग के ऊपर से कूदते हैं, माना जाता है ऐसा करने से बुरी शक्तियों को दूर भगाती हैं।

Updated on:
06 Jan 2026 04:07 pm
Published on:
06 Jan 2026 04:07 pm