Mangala Lakshadweep Express Delhi to Kerala: आज की स्टोरी में हम देश की एक ऐसी ट्रेन के बारे में बताने जा रहे हैं जिसे ट्रेवल करने पर आपको इतने खूबसूरत नजारे देखने को मिलेंगे कि आप विदेशों में जाकर 5 या 7 स्टार होटल जाना भूल जाएंगे। आइए जानते हैं इस ट्रेन के बारे में विस्तार से।
Mangala Lakshadweep Express Delhi to Kerala: अक्सर बात जब कहीं घूमने जाने की होती है तो ट्रेन की कंफर्म टिकट नहीं मिल पाने की वजह से प्लान कैंसिल करना पड़ता है क्योंकि पीक सीजन में फ्लाइट से ट्रेवल कर पाना सबके लिए आसान नहीं होता या फिर वंदे भारत जैसी ट्रेनों का ट्रेवल वाले रूट पर ना चलने की वजह से रास्ता काफी ज्यादा बोरिंग हो जाता है। जिससे अपनी जगह पर पहुंचते-पहुंचते घूमने का मन ही नहीं करता। ऐसे में अगर आप भी घूमने के शौकीन हैं लेकिन इन सब के चलते अपना प्लान कैंसिल कर देते हैं तो हमारी आज की स्टोरी आपके काम आ सकती है। आज की स्टोरी में हम देश की एक ऐसी ट्रेन के बारे में बताने जा रहे हैं जिसे ट्रेवल करने पर आपको इतने खूबसूरत नजारे देखने को मिलेंगे कि आप विदेशों में जाकर 5 या 7 स्टार होटल जाना भूल जाएंगे। आइए जानते हैं इस ट्रेन के बारे में विस्तार से।
अगर आप उन लोगों में से हैं जो ट्रेन की खिड़की वाली सीट के लिए किसी से भी लड़ सकते हैं और आपका जवाब हां है तो आप इस समर वेकेशन मंगला लक्षद्वीप एक्सप्रेस (12618) से सफर करने का प्लान बना सकते हैं। दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन स्टेशन से शुरू होकर केरल के एर्नाकुलम तक जाने वाली यह ट्रेन करीब 2,761 km किलोमीटर का लंबा सफर तय करती है। लगभग 48 से 50 घंटों की यह जर्नी आपको भारत के दिल से निकालकर दक्षिण के खूबसूरत तटों तक ले जाती है। यह सिर्फ एक जगह से दूसरी जगह जाने का जरिया नहीं है, बल्कि खिड़की के बाहर बदलती हुई तस्वीरों का एक ऐसा कोलाज है जिसे हर ट्रेवलर को अपनी लाइफ में एक बार जरूर महसूस करना चाहिए।
इस पूरी यात्रा का सबसे जादुई हिस्सा तब शुरू होता है जब ट्रेन महाराष्ट्र और गोवा के बीच कोंकण रेलवे के ट्रैक पर आती है। यहां का नजारा ऐसा होता है कि आप पलक झपकना भी भूल जाएंगे। आपका मन करेगा कि काश ट्रेन थोड़ी और धीरे चले। एक तरफ अरब सागर की नीली लहरें आपका पीछा करती हैं और दूसरी तरफ पश्चिमी घाट की ऊंची पहाड़ियां बादलों को चूमती नजर आती हैं। ट्रेन इन दोनों के बीच से ऐसी रफ्तार से निकलती है कि हर फ्रेम किसी फिल्मी सीन जैसा लगने लगता है। मानसून के समय तो यहां की हरियाली और झरने इस सफर में चार चांद लगा देते हैं। मानसून के दिनों में तो यहां की खूबसूरती ऐसी होती है कि अच्छे से अच्छा कैमरा भी उसे कैद करने में छोटा पड़ जाए।
इंजीनियरिंग के नजरिए से देखें तो यह रूट किसी करिश्मे से कम नहीं है। इस पूरे रास्ते में लगभग 90 से ज्यादा सुरंगें और करीब 2,000 छोटे बड़े पुल आते हैं। सफर के दौरान यह अनुभव बहुत ही रोमांचक होता है। एक पल आप एक लंबी और अंधेरी सुरंग के अंदर होते हैं और अगले ही पल जैसे ही ट्रेन बाहर निकलती है, आपके सामने दूध जैसा सफेद झरना या समुद्र का विशाल किनारा खड़ा होता है। इसी रूट के पास मशहूर दूधसागर फॉल्स भी है, जो रेल यात्रियों के बीच काफी पॉपुलर है। जो इस सफर को और भी ज्यादा यादगार और सिनेमैटिक बना देता है।
भले ही यह सफर बहुत खूबसूरत है, लेकिन 50 घंटे ट्रेन में बिताना एक बड़ा टास्क भी है। 50 घंटे का यह सफर जितना हसीन है, उतना ही थकाने वाला भी हो सकता है। ट्रेन कभी कभी लेट भी हो जाती है, तो अपने साथ ढेर सारे स्नैक्स और एक अच्छी प्लेलिस्ट या किताबें जरूर रखें। साथ ही, आप अपने सामान को सुरक्षित रखते हैं तो यह यात्रा सुखद होगी।
इस ट्रेन से दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन से केरल के एर्नाकुलम तक के जनरल कोच (GN) का किराया 505 से 530 रुपये के बीच रहता है, वहीं स्लीपर क्लास (SL) के लिए आपको करीब 1,015 से 1,080 रुपये देने होते हैं। अगर आप एसी में सफर करना चाहते हैं, तो AC 3 इकोनॉमी (3E) का किराया 2,450 से 2,510 रुपये और स्टैंडर्ड AC 3 टायर (3A) का किराया 2,530 से 2,600 रुपये के आसपास रहता है। इसके अलावा, ज्यादा सुविधा वाले AC 2 टायर (2A) का किराया लगभग 3,650 से 3,770 रुपये के बीच आता है। ध्यान दें कि ये सभी रेट्स अनुमानित हैं और बुकिंग के समय थोड़े बदल सकते हैं, इसलिए हमेशा आईआरसीटीसी (IRCTC) की आधिकारिक वेबसाइट से इसे वेरिफाई जरूर करें।