Jharia Burning City: आज के इस लेख में हम एक ऐसी जगह के बारे में बताने जा रहे हैं जो अपनी खूबसूरती की वजह से नहीं, बल्कि सालों से जलती हुई आग की वजह से जानी जाती है। आइए, इस लेख में विस्तार से जानते हैं इस जगह के बारे में।
Underground Coal Fire India: झारखंड को लैंड ऑफ फॉरेस्ट्स यानी वनों की भूमि कहा जाता है और यह प्राकृतिक सुंदरता, झरनों और प्रमुख तीर्थ स्थलों का केंद्र भी है। लेकिन बेहद कम लोग जानते हैं कि झारखंड में एक ऐसी जगह भी है जो दिखने में किसी फिल्म जैसी लगती है। हालांकि, यह अपनी खूबसूरती की वजह से नहीं, बल्कि धरती के नीचे जल रही आग की वजह से चर्चा में है। सुनने में यह अजीब लग सकता है कि जमीन के नीचे कैसे आग लग सकती है, लेकिन यह सच है। झारखंड के धनबाद जिले में बसा झरिया पिछले 100 सालों से भी ज्यादा समय से जमीन के नीचे सुलग रही आग के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। आइए, इस लेख में इस जगह के बारे में विस्तार से जानते हैं।
झरिया में जमीन के नीचे लगी आग की पहली जानकारी साल 1916 में सामने आई थी। तब से लेकर आज तक, यानी एक सदी से ज्यादा बीत जाने के बाद भी यह आग बुझने का नाम नहीं ले रही है। हैरानी की बात यह है कि तमाम कोशिशों के बावजूद अब तक कोई भी इस पर पूरी तरह काबू नहीं पा सका है। जमीन के अंदर फैली इस भीषण आग की वजह से वहां की सतह से लगातार जहरीली गैसें निकलती रहती हैं और जमीन धंसने की घटनाएं आम हो गई हैं।
पिछले कुछ वर्षों में झरिया आने वाले विदेशियों की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई है। बाहर से आने वाले लोग यहां की आग को एक अजूबे और रिसर्च के तौर पर देखते हैं। उनका मुख्य मकसद यह समझना होता है कि आखिर कोई शहर इतने लंबे समय से आग के ऊपर कैसे बसा है, लोग वहां अपनी रोजमर्रा की जिंदगी कैसे बिता रहे हैं और यह प्रदूषण वहां के वातावरण को कैसे प्रभावित कर रहा है। उनके लिए यह एक अध्ययन का विषय बन गया है।
झरिया को सिर्फ आग के लिए ही नहीं, बल्कि काले सोने यानी कोयले के लिए भी जाना जाता है। यहां भारत का सबसे उच्च कोटि यानी बिटुमिनस कोयला मिलता है। इस कोयले का सबसे बड़ा उपयोग कोक बनाने में होता है, जो स्टील बनाने वाली फैक्ट्रियों के लिए बेहद जरूरी ईंधन है। यही कारण है कि झरिया का नाम झारखंड के साथ-साथ दुनिया के इंडस्ट्रियल मैप पर भी काफी मशहूर है।