
Vasudhara Waterfall | image credit gemini and instagram-pahadan_on_road
Vasudhara Waterfall Mystery: क्या आपने कभी किसी ऐसे झरने के बारे में सुना है जिसका पानी हर किसी पर नहीं गिरता? सुनने में यह थोड़ा अजीब लग रहा होगा कि आखिर ऐसा कैसे हो सकता है, लेकिन यह सच है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम चैनल pahadan_on_road पर स्तुति रावत द्वारा शेयर किए गए एक वीडियो और फेसबुक चैनल UKvani के अनुसार ऐसा होता है। इसके साथ ही इस झरने से जुड़ी पौराणिक मान्यताएं भी हैं। आइए, आज इस अजूबे झरने के बारे में विस्तार से जानते हैं कि ऐसा क्यों होता है, इसकी क्या मान्यताएं हैं और आप यहां कैसे जा सकते हैं।
यह झरना उत्तराखंड के बद्रीनाथ से करीब 8 किलोमीटर और माना गांव से लगभग 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, जिसे वसुधारा वाटरफॉल कहते हैं। इसे लेकर स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं के बीच एक बहुत ही दिलचस्प मान्यता है कि इस झरने की धारा सिर्फ उन्हीं लोगों पर गिरती है जिन्होंने जीवन में कोई पाप नहीं किया है। अगर आपने गलत काम किए हैं, तो आप झरने के नीचे खड़े होकर भी भीग नहीं पाएंगे, क्योंकि पानी अपना रास्ता बदल लेता है। यह झरना 400 फीट की ऊंचाई से गिरता है और दिखने में बेहद खूबसूरत है।
ग्रंथों में भी इसका जिक्र है, जहां बताया गया है कि यहां पांच पांडवों में से एक, सहदेव ने अपने प्राण त्यागे थे। इसके साथ ही पुराणों और किंवदंतियों के अनुसार, इस झरने का पानी कई जड़ी-बूटियों और खास पौधों को छूकर नीचे आता है, इसीलिए माना जाता है कि इसमें आयुर्वेदिक गुण हैं। जो लोग इस पानी के नीचे खड़े हो पाते हैं, ऐसा विश्वास है कि उनके आधे दोष खत्म हो जाते हैं।
अगर आप इस जगह को अपनी आंखों से देखना चाहते हैं या खुद को परखना चाहते हैं, तो आपको माना गांव जाना होगा। यहां पहुंचने के लिए माना गांव से लगभग 5 से 6 किलोमीटर की पैदल यात्रा या ट्रेकिंग करनी पड़ती है, जो सरस्वती मंदिर से शुरू होती है। इस ट्रेक को पूरा करने में आमतौर पर 2 घंटे का समय लगता है और रास्ता थोड़ा कठिन व पतला हो सकता है, इसलिए सावधानी रखनी जरूरी है। इसके अलावा ध्यान रखें, इस पूरे रास्ते में खाने-पीने की सुविधा नहीं मिलती है, इसलिए अपने साथ पानी और हल्का-फुल्का खाना लेकर जरूर चलें।
Published on:
25 Apr 2026 01:45 pm
बड़ी खबरें
View Allलाइफस्टाइल
ट्रेंडिंग
स्वास्थ्य
