
Rahul Gandhi Lifestyle: रायबरेली के सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी आज अपना 56वां जन्मदिन मना रहे हैं। राहुल गांधी राजनीति से परे भी कमाल का जीवन जीते हैं। उनके शौक और लोगों से घुलने-मिलने का अंदाज उन्हें काफी खास बनाता है। आइए, आज उनके जन्मदिन पर उनकी लाइफस्टाइल से जुड़ी कुछ खास बातों को जानते हैं।
राहुल गांधी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वे किसी खास उम्र या वर्ग तक सीमित नहीं हैं। अगर आप उनके सोशल मीडिया, खासकर इंस्टाग्राम को देखें, तो समझ आएगा कि वे छोटे बच्चों से लेकर युवाओं और सीनियर सिटीजन्स तक, हर किसी के बीच काफी लोकप्रिय हैं। वे हर उम्र के लोगों के साथ बड़ी सहजता से एक खास कनेक्शन बना लेते हैं।
राहुल गांधी के पास भले ही आने-जाने के लिए बेहतर साधन मौजूद हैं, लेकिन उन्हें कई बार ऑटो या पब्लिक ट्रांसपोर्ट में सफर करते देखा गया है। वे दिखावे से दूर रहकर आम जनता के बीच उनकी तरह ही सफर करना पसंद करते हैं।
खाने-पीने के मामले में भी राहुल गांधी सिंपल हैं। वे महंगे रेस्टोरेंट्स के साथ-साथ सड़क किनारे बने छोटे ढाबों पर भी बड़े मजे से खाना खाते दिख जाते हैं। उनके इंस्टाग्राम पर मौजूद वीडियो में उन्हें गैस सिलेंडर बांटने वाले लोगों के साथ जमीन पर पेपर बिछाकर खाना खाते हुए देखा जा सकता है।
राहुल गांधी केवल राजनीति तक सीमित नहीं हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, राहुल जापानी मार्शल आर्ट 'आइकिडो' में ब्लैक बेल्ट हासिल कर चुके हैं, साथ ही वे ब्राजीलियन जिउ-जित्सु के भी जानकार हैं और कॉलेज के दिनों में बॉक्सिंग में भी सक्रिय थे। इसके अलावा, वे एक सर्टिफाइड 'डाइवमास्टर' हैं और उनके पास विमान उड़ाने के लिए प्राइवेट पायलट लाइसेंस (PPL) भी है।
राहुल गांधी की फिटनेस का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने 'भारत जोड़ो यात्रा' के दौरान पूरे भारत की पैदल यात्रा की थी। इसके साथ ही वे नियमित रूप से साइकिलिंग और रनिंग करते भी दिख जाते हैं। फुर्सत के समय में वे इतिहास और राजनीति की किताबें पढ़ना और नई जगहों की यात्रा करना पसंद करते हैं।
राजनीति से अलग राहुल गांधी देश के हर जरूरी मुद्दे पर अपनी राय बेबाकी से रखते हैं। चाहे वो छात्रों के भविष्य और परीक्षाओं से जुड़ा मुद्दा हो, या फिर पर्यावरण, पेड़ों की कटाई और गैस सिलेंडर की किल्लत जैसी गंभीर समस्याएं, राहुल गांधी हर विषय पर न केवल अपनी आवाज उठाते हैं, बल्कि उन समस्याओं को समझने के लिए जमीनी स्तर पर जाकर लोगों से बात भी करते हैं।