
Ear Infection After Swimming: बरसात के मौसम में आप तैराकी करते हैं या नहा कर आते हैं और कान में दर्द होने लगता है तो इसे नजरअंदाज मत कीजिए। तैरने या नहाने के बाद कान के अंदर पानी रह जाए तो वहां नमी बनी रहती है। इस नमी में बैक्टीरिया और फंगस आसानी से बढ़ सकते हैं और इससे कान की बाहरी नली में इंफेक्शन हो सकता है। इसे स्विमर्स ईयर यानी ओटाइटिस एक्सटर्ना कहा जाता है। आइए जानते हैं कि यह क्यों होता है और इससे बचने के लिए क्या करना चाहिए।
क्लीवलैंड क्लिनिक (Cleveland Clinic) के अनुसार कान में खुजली, दर्द, लालिमा और सूजन इसके आम लक्षण हैं। कान से पानी या दूसरा तरल निकल सकता है और कान भरा हुआ महसूस हो सकता है। कुछ लोगों को कम सुनाई देने जैसी परेशानी भी हो सकती है। शुरुआत में लक्षण हल्के हो सकते हैं, लेकिन इंफेक्शन बढ़ने पर दर्द और खुजली ज्यादा हो सकती है।
कान की नली में पानी फंसने से वहां नमी बन जाती है। क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार ऐसा माहौल बैक्टीरिया और फंगस के बढ़ने के लिए अनुकूल हो सकता है। यह संक्रमण पैदा कर सकता है। इसके अलावा कान के अंदर की त्वचा को कॉटन बड, उंगली या किसी दूसरी चीज से नुकसान पहुंचाने पर भी इंफेक्शन का खतरा बढ़ सकता है।
मेयो क्लिनिक (Mayo Clinic) के अनुसार तैरने या नहाने के बाद सिर को बारी-बारी से बाईं और दाईं ओर झुका कर कान में जमा पानी को बाहर निकलने देना चाहिए। कान के बाहरी हिस्से को मुलायम तौलिए से धीरे से सुखाया जा सकता है। तैरते समय कान को पानी से बचाने के लिए ईयरप्लग या स्विमिंग कैप का इस्तेमाल भी किया जा सकता है।
मेयो क्लिनिक (Mayo Clinic) के अनुसार कान के अंदर कॉटन बड, हेयरपिन, उंगली या किसी दूसरी चीज से खुजली करने या वैक्स निकालने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। इससे कान की त्वचा पर खरोंच या चोट लग सकती है और इंफेक्शन का खतरा बढ़ सकता है।
अगर तैरने के बाद कान में दर्द, खुजली, सूजन या कान से तरल निकलने जैसी परेशानी हो तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। तेज दर्द या बुखार होने पर तुरंत मेडिकल मदद लेनी चाहिए।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।