
Tilbhandeshwar Mahadev Temple: सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र माना जाता है। इस दौरान शिवभक्त देशभर के प्राचीन शिव मंदिरों के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में अगर आप भी इस सावन श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के दर्शन के लिए काशी जाने की योजना बना रहे हैं, तो तिलभांडेश्वर महादेव मंदिर भी दर्शन करने जा सकते है। यह प्राचीन शिवधाम काशी के उन चुनिंदा मंदिरों में शामिल है, जहां स्वयंभू शिवलिंग विराजमान है। मान्यता है कि यहां का शिवलिंग हर वर्ष स्वाभाविक रूप से तिल के बराबर बढ़ता है। यही कारण है कि सदियों से यह मंदिर शिवभक्तों की अटूट आस्था और श्रद्धा का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।
तिलभांडेश्वर महादेव मंदिर उत्तर प्रदेश के वाराणसी (काशी) में पांडेय हवेली क्षेत्र में स्थित है। यह मंदिर श्री काशी विश्वनाथ मंदिर से लगभग 500 मीटर की दूरी पर है। मंदिर प्रतिदिन सुबह 4:30 बजे से रात 9:00 बजे तक श्रद्धालुओं के लिए खुला रहता है।
अगर आप वाराणसी रेलवे स्टेशन या लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचते हैं, तो वहां से टैक्सी, ऑटो या ई-रिक्शा के जरिए मंदिर तक आसानी से पहुंच सकते हैं। इसके अलावा, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर से भी यह मंदिर पैदल दूरी पर स्थित है।
तिलभांडेश्वर महादेव मंदिर के दर्शन के बाद आप श्री काशी विश्वनाथ मंदिर, विशालाक्षी देवी मंदिर, अन्नपूर्णा भवानी मंदिर, धुंडिराज गणेश मंदिर, केदारेश्वर मंदिर, काल भैरव मंदिर और दशाश्वमेध घाट जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों के भी दर्शन कर सकते हैं। इसके अलावा, शाम के समय दशाश्वमेध घाट पर होने वाली भव्य गंगा आरती का दिव्य नजारा आपकी काशी यात्रा को और भी यादगार बना सकता है।
तिलभांडेश्वर महादेव मंदिर अपने धार्मिक महत्व और अनोखी मान्यता के लिए प्रसिद्ध है। मान्यता है कि यहां स्थापित स्वयंभू शिवलिंग का आकार हर वर्ष तिल के बराबर बढ़ता है। सावन के महीने में यहां शिवभक्त सुबह से ही जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना के लिए लंबी कतारों में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करते हैं।