Viral Trend: सोशल मीडिया पर नींद से जुड़े अजीबोगरीब ट्रेंड्स की भरमार है, लेकिन इनमें सबसे ज्यादा चर्चा में है ‘Potato Bed’ चैलेंज। लेकिन क्या यह वाकई काम करता है या सिर्फ इंटरनेट का एक और फनी ट्रेंड है? चलिए जानते हैं, इस वायरल हैक के पीछे का असली सच।
Viral Trend: आजकल सोशल मीडिया पर नींद से जुड़े कई अजीब लेकिन इंटरेस्टिंग ट्रेंड्स वायरल हो रहे हैं, जैसे कि ‘Potato Bed’ (पोटैटो बेड), ‘Sleepy Girl Mocktail’ (स्लीपी गर्ल मॉकटेल) और ऐसे ही कई ट्रेंड्स। हर कोई इन हैक्स की मदद से अपनी नींद को बेहतर बनाने की कोशिश कर रहा है। असल में, ये ट्रेंड्स यही बताते हैं कि हम सब थक चुके हैं और सुकून की नींद की हमें बहुत जरूरत है।
TikTok और Instagram पर वायरल हो रहा ‘Potato Bed’ ट्रेंड असल में आराम का एक नया तरीका बन गया है। इसमें लोग अपने बिस्तर को तकिए, कुशन और रजाई लगाकर एक कोकून (घोंसले जैसा) बना देते हैं। लोगों का कहना है कि इससे शरीर और दिमाग दोनों को कडल यानी गले लगाने जैसा फील होता है, जिससे दिमाग रिलैक्स रहता है और नींद जल्दी आती है।
यह तरीका सैनिकों के लिए बनाया गया था ताकि वे स्ट्रेस में भी जल्दी सो सकें। इसमें शरीर की हर मसल को ढीला छोड़कर गहरी सांस ली जाती है और शांत जगह को इमेजिन किया जाता है। विज्ञान के अनुसार, यह तरीका हार्ट रेट कम करता है और मेलाटोनिन हार्मोन को बढ़ाता है।
रात में हल्की या बिना रोशनी के नहाना ताकि शरीर को "सोने का इंडिकेशन" मिले। यह दिमाग को शांत करता है और स्क्रीन टाइम से दूर रखता है।
इसमें सोने से पहले मुंह पर टेप लगाई जाती है, जिससे सिर्फ नाक से सांस ली जा सके। कहा जाता है कि इससे खर्राटे और मुंह सूखने की समस्या कम होती है।
यह वायरल ड्रिंक टार्ट चेरी जूस, मैग्नीशियम और स्पार्कलिंग वॉटर से बनती है। इसे 'नेचुरल स्लीप एड' कहा जाता है क्योंकि यह शरीर में मेलाटोनिन बढ़ाती है।
मेलाटोनिन एक प्राकृतिक हार्मोन है, जिसे हमारे दिमाग की पीनियल ग्रंथि (Pineal Gland) बनाती है। इसका मुख्य काम हमारे शरीर की नींद–जागने की प्रक्रिया (Sleep-Wake Cycle) को नियंत्रित करना है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, ये सभी ट्रेंड्स हमारी “स्लीप क्राइसिस” यानी नींद नहीं आने की समस्या की ओर इशारा करते हैं।न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. बिपन कुमार शर्मा बताते हैं,“लोग अपनी लाइफस्टाइल में कोई बदलाव नहीं करना चाहते, इसलिए इंटरनेट के हैक्स पर भरोसा कर रहे हैं। लेकिन ये हैक्स सिर्फ टेम्परेरी राहत देते हैं, स्थायी समाधान नहीं हैं।”