Watermelon Death : मुंबई में चिकन बिरयानी (Biryani watermelon) के बाद तरबूज खाने से मौत की घटना से आप भी डरे हैं क्या? अगर हां, तो आयुर्वेदिक डॉक्टर अर्जुन राज (BAMS) से समझिए तरबूज को खाने का सही तरीका।
Watermelon Death News Mumbai : मुंबई में चिकन बिरयानी (Biryani watermelon) के बाद तरबूज खाने से मौत की घटना ने सबको डरा दिया है। खबर आ रही है कि मुंबई के बाजारों से तरबूज गायब हो गए हैं। दुकानदार बेचने से भी डर रहे हैं। जबकि, बिना मिलावट वाले तरबूज को भी गलत तरीके से खाया जाए गंभीर फूड पॉइजनिंग हो सकती है और कुछ मामलों में मौत भी।
आयुर्वेदिक डॉ. अर्जुन राज ( BAMS) ने समझाया कि तरबूज खाने को लेकर लोग लापरवाही करते हैं। यही लापरवाही जानलेवा बन जाती है। आइए, पूरी बात को नीचे समझते हैं-
अक्सर बड़े तरबूज सड़क के किनारे कटकर भी बेचे जाते हैं। कई लोग उनको खरीदते हैं और कुछेक वहीं सड़क किनारे खाते हैं। जबकि चिलचिलाती धूप में घंटों कटे रखे तरबूज पर जैसे साल्मोनेला बैक्टीरिया पनपते हैं। ये फूड पॉइजनिंग का सबसे बड़ा कारण होते हैं। इसलिए, सड़क किनारे किसी भी कटे फल को खरीदने या खाने से बचें।
अगर हम अपने घर पर भी तरबूज लाते हैं तो उसको काटकर फ्रिज में रख देते हैं। ये काम अधिकतर लोग करते हैं। अगर आप ये गलती कर रहे हैं तो संभल जाएं। फलों को काटकर तुरंत खाएं। उनको रखने के बाद खतरनाक बैक्टीरिया घर कर लेते हैं। जब आप खाएं तो सीधे अस्पताल जाने की नौबत पड़ सकती है।
आयुर्वेद में तरबूज जैसे फल के साथ दूध और मटन, चिकन जैसे मांसाहारी चीजों को खाना वर्जित है। मांस को पचने में 4 से 6 घंटे लग सकते हैं, जबकि तरबूज 20-30 मिनट में पच जाता है। जब इन्हें एक साथ खाया जाता है, तो फल मांस के पचने तक पेट में रुका रहता है, जिससे वह फर्मेंट होने लगता है। इस प्रक्रिया से गैस, पेट फूलना और गंभीर मामलों में पाचन से जुड़ी फूड पॉइजनिंग का खतरा बढ़ जाता है।
दूध को लेकर कहा जाता है कि दो अलग-अलग प्रकार के प्रोटीन एक साथ पचाने में शरीर पर अत्यधिक दबाव डालते हैं। यह पाचन तंत्र में विषाक्त पदार्थ पैदा कर सकता है, जिससे मतली या त्वचा संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।
अगर आप तरबूज का आनंद लेना चाहते हैं तो उसको खाली पेट या फिर ब्रेकफास्ट या लंच के 3-4 घंटे बाद ही ताजा काटकर सेवन करें। साथ ही आपको 150-200 ग्राम तक ही खाना चाहिए। इससे अधिक सेवन नुकसान पहुंचा सकता है।
अक्सर लोग फूड पॉइजनिंग को अनदेखा करते हैं। उन्हें लगता है कि उल्टी, दस्त होने के बाद सब ठीक हो जाएगा जबकि कई ऐसे मामले देखने को मिलते हैं जिनमें मौत हो जाती है। इसलिए, फूड पॉइजनिंग को गंभीरता से लें।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी विभिन्न शोधों और वैज्ञानिक अध्ययनों पर आधारित है, जिसका उद्देश्य केवल जागरूकता बढ़ाना और शैक्षिक जानकारी प्रदान करना है। इसे किसी बीमारी के उपचार या डॉक्टरी सलाह के रूप में न लें। अपनी जीवनशैली या आहार में कोई भी बदलाव करने से पहले किसी योग्य चिकित्सक या संबंधित विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।