PM Modi WFH: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते रविवार को मौजूदा वैश्विक संकट और तेल की बढ़ती कीमतों के असर से देश की अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए वर्क फ्रॉम होम करने की अपील की है। ऐसे में आइए जानते हैं कि वर्क फ्रॉम होम होगा या नहीं, यह कौन तय करता है।
Work From Home PM Modi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते रविवार, 10 मई 2026 को हैदराबाद में एक जनसभा को संबोधित करते हुए देशवासियों से वर्क फ्रॉम होम यानी घर से काम करने के साथ-साथ ऑनलाइन मीटिंग्स को प्राथमिकता देने की अपील की। यह अपील विशेष रूप से पश्चिम एशिया (US-Iran) में बढ़ते तनाव और वैश्विक आर्थिक दबाव के बीच पेट्रोल-डीजल की बचत करने के उद्देश्य से की गई है। ऐसे में, आइए जानते हैं कि वर्क फ्रॉम होम होगा या नहीं इसका फैसला कौन लेता है और हाइब्रिड वर्क कल्चर क्या होता है।
किसी भी कर्मचारी को घर से काम करने की इजाजत मिलेगी या नहीं, यह सबसे पहले कंपनी की अपनी पॉलिसी पर निर्भर करता है। कंपनी का एचआर (HR) विभाग यह तय करता है कि किन पदों के लिए ऑफिस आना जरूरी है और किन्हें छूट दी जा सकती है। अक्सर यह जानकारी कर्मचारी को जॉइनिंग के समय ही दे दी जाती है।
कई बार कंपनी की जनरल पॉलिसी के बावजूद, आखिरी फैसला टीम लीडर या मैनेजर पर छोड़ दिया जाता है। अगर मैनेजर को लगता है कि टीम घर से रहकर भी आपस में बेहतर तालमेल बना पा रही है और काम की क्वालिटी पर असर नहीं पड़ रहा, तो वह आपको हाइब्रिड मॉडल या WFH की छूट दे सकता है।
जरूरत पड़ने पर कुछ जगहों के लिए सरकार समय-समय पर इसके लिए गाइडलाइन्स जारी करती है। वाणिज्य मंत्रालय ने विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) नियमों में संशोधन कर नियम 43ए के तहत कर्मचारियों को घर से काम करने की अनुमति दी है।
इन सबके अलावा, कोरोना जैसी महामारी या शहरों में बढ़ते गंभीर प्रदूषण के समय सरकार वर्क फ्रॉम होम के निर्देश जारी कर सकती है। ऐसी आपातकालीन स्थिति में कंपनियां सरकारी निर्देशों का पालन करती हैं और ऑफिस बंद रखकर काम को पूरी तरह ऑनलाइन शिफ्ट कर देती हैं।
वर्क फ्रॉम होम के अलावा आजकल हाइब्रिड वर्क कल्चर का चलन भी काफी बढ़ गया है। यह काम करने का एक ऐसा मॉडल है जिसमें कर्मचारी को हफ्ते के कुछ दिन ऑफिस से और बाकी दिन घर या किसी अन्य स्थान यानी रिमोट लोकेशन से काम करने की सुविधा मिलती है।
जब लोग ऑफिस जाने के बजाय घर से काम करते हैं, तो सड़कों पर गाड़ियां कम निकलने लगती हैं। इससे बड़े शहरों में ट्रैफिक जाम की समस्या काफी हद तक कम हो जाती है और वायु प्रदूषण का स्तर भी नीचे आता है। यह न केवल समय बचाता है बल्कि पर्यावरण को सुरक्षित रखने में भी मददगार है।