Women Health and Career Balance: अगर आप भी नौकरी के चक्कर में अपने स्वास्थ्य पर ध्यान नहीं देती हैं, तो हमारी आज की यह स्टोरी आपके लिए मददगार हो सकती है। आज की स्टोरी में हम बताने जा रहे हैं कि कैसे ऑफिस स्ट्रेस और प्रेशर को मैनेज करके आप स्वस्थ रह सकती हैं।
Working Women Health Problems in Hindi: आज के समय में पढ़ाई और करियर के चलते ज्यादातर महिलाएं देर से शादी और फैमिली प्लानिंग कर रही हैं। जिससे कुछ महिलाओं को मां बनने में दिक्कतों का सामना भी करना पड़ रहा है। सिर्फ यही नहीं, मां बनने के बाद दोबारा नौकरी पर लौटना या पीरियड्स और मेनोपॉज जैसी शारीरिक परेशानियों से जूझना भी कामकाजी महिलाओं के करियर पर काफी असर डाल रहा है।
हाल ही में आए कुछ सर्वे इस गंभीर स्थिति की ओर इशारा करते हैं। आइए जानते हैं कि इस बारे में रिपोर्ट्स क्या कहती हैं और महिलाएं इस दबाव से खुद को कैसे बचा सकती हैं।
डेलॉयट की 'वुमन एट वर्क' और 'कैरट' की रिपोर्ट्स के मुताबिक, 40% (यानी हर 10 में से 4) महिलाएं पीरियड्स दर्द के बावजूद चुपचाप काम करती हैं। करियर पर असर पड़ने के डर से वे छुट्टी नहीं मांग पातीं। वहीं, 60% से अधिक (यानी हर 10 में से 6 से ज्यादा) महिलाएं नौकरी पर बुरा असर पड़ने के डर से अपनी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को अनदेखा करती हैं या जरूरी इलाज टाल देती हैं।
इसके साथ ही, 30% (यानी हर 10 में से 3) गर्भवती महिलाएं ऑफिस से सपोर्ट न मिलने की वजह से नौकरी छोड़ देती हैं। वहीं, 20% से 25% महिलाएं मेनोपॉज के भारी लक्षणों के कारण नौकरी छोड़ने के बारे में सोचती हैं।
एक्सपर्ट्स के अनुसार, पिछले कुछ सालों में महिलाओं की बीमारियों का तरीका बदला है। इसका सीधा कनेक्शन 'हाइपोथैलेमस-पिट्यूटरी-ओवेरियन एक्सिस' से है। जब कोई महिला मानसिक तनाव में होती है, तो यह सिस्टम बिगड़ जाता है। लेकिन शरीर के पास खुद को ठीक करने की ताकत होती है। अगर तनाव हार्मोन का संतुलन बिगाड़ सकता है, तो एक शांत और बैलेंस हेल्दी डेली रुटिन उसे वापस पहले जैसा भी बना सकता है।
आयुर्वेद में हार्मोनल बदलाव कोई बीमारी नहीं, बल्कि एक नेचुरल प्रोसेस है। आयुर्वेद में प्राकृतिक जड़ी-बूटियों, लाइफस्टाइल में छोटे-छोटे बदलावों और काउंसलिंग के जरिए गर्भाशय की परत की मोटाई और हैवी ब्लीडिंग को पूरी तरह कंट्रोल किया जा सकता है। योग और ध्यान की मदद से मेनोपॉज के दौरान होने वाली घबराहट को भी एक सामान्य और आसान अनुभव में बदला जा सकता है।
आयुर्वेद के अनुसार अपना डेली रूटीन सेट करें। शाम 7-8 बजे तक रात का खाना खत्म कर लें। जिम में ट्रेडमिल पर दौड़ने के बजाय खुली हवा और हरियाली के बीच टहलें। पसीना बहाना शरीर की गंदगी को बाहर निकालने का एक नेचुरल तरीका है। नहाने के लिए हल्के गुनगुने पानी का इस्तेमाल करें।
घंटों एक ही जगह बैठे रहने के बजाय बीच-बीच में उठें और थोड़ा टहलें। ऑफिस में थकान होने पर हल्का गर्म पानी या जीरा पानी घूंट-घूंट कर पीएं।
सोने से पहले फोन से दूरी बना लें। दिमाग को शांत करने के लिए डायरी लिखने की आदत डालें। तनाव कम करने के लिए जुम्बा, योग, मैराथन जैसी ग्रुप एक्टिविटीज में हिस्सा लें।
कब्ज (Constipation) को हल्के में न लें, आयुर्वेद के अनुसार यह महिलाओं में कई बड़ी बीमारियों की जड़ है। अपनी डाइट में फाइबर वाली सब्जियां, सही मात्रा में चीनी और पर्याप्त पानी शामिल करें।
35-40 की उम्र में हैवी ब्लीडिंग या दूसरी समस्याओं के कारण काम के दबाव में आकर सीधे गर्भाशय निकालने का जल्दबाजी भरा फैसला न लें। आयुर्वेदिक गायनेकोलॉजिस्ट से मिलें। आयुर्वेद में बिना सर्जरी के भी इसके प्राकृतिक समाधान मौजूद हैं।