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How To Keep Children Happy: आज के समय में खुद को और बच्चों को खुश कैसे रखें? जानें क्या कहती है रिसर्च

Parenting Tips: रिसर्च के अनुसार बच्चों की खुशी माता-पिता के व्यवहार और सकारात्मक माहौल पर निर्भर करती है। जानें बच्चों को खुश रखने के आसान तरीके।

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How To Keep Children Happy,Khush Rehne Ka Tarika

बच्चों को खुश कैसे रखें (representative image)| image credit gemini

How To Keep Children Happy: Positive Psychology से जुड़ी रिसर्च बताती है कि बच्चों की खुशी सिर्फ खिलौनों या सुविधाओं पर निर्भर नहीं करती, बल्कि पैरेंट्स के व्यवहार और घर के माहौल का इसमें बड़ा योगदान होता है। अध्ययन के अनुसार इंसान की 90 फीसदी खुशी उसके अपने व्यवहार और सोच पर निर्भर करती है। ऐसे में यदि माता-पिता खुद खुशमिजाज रहें, तो बच्चे भी सकारात्मक और खुशहाल बनते हैं।

बच्चों में स्वीकार्यता की आदत कैसे विकसित करें (Developing the Art of Acceptance)

दुनिया में सबसे ज्यादा दुख इसी बात का होता है कि कुछ मनमाना ना मिला हो। बच्चों को सिखाएं कि वे जो भी करें, हर काम को स्वीकार कर उसे एन्जॉय करें ताकि वे खुशी के सकारात्मक स्तर को महसूस कर सकें। इसके साथ ही, जीवन में कोई अन्य विकल्प मिलने पर या किसी और की सफलता होने पर, वे दूसरों की खुशी को सेलिब्रेट करने और खुद को संभालने का जज्बा भी रखें। वे अपनी खुशियों की चाबी हमेशा खुद के पास रखें।

बच्चों को नेगेटिव सोच से दूर कैसे रखें (Staying Away from Negativity)

आज के दौर में कम उम्र में ही बच्चों में हड़बड़ी, ईर्ष्या, गुस्सा और बदले की भावना उभरने लगी है। पैरेंट्स को चाहिए कि वे खुद को भी इससे दूर रखें और बच्चों को भी इससे निकालें। नकारात्मक सोच जिंदगी की हर खुशी छीन लेती है, जिससे मन से दूसरों और चीजों के प्रति सम्मान गायब हो जाता है। बच्चों को यह जरूर समझाएं कि दुनिया के हर इंसान में अच्छी-बुरी बातें और आदतें होती हैं।

Sharing and Caring से बच्चों में बढ़ती है खुशी (Spreading Happiness Through Sharing and Caring)

खुशियां साझा भाव से बढ़ती हैं। इसी के चलते पिछले वर्ष की इंटरनेशनल डे ऑफ हैप्पीनेस की थीम 'शेयरिंग एंड केयरिंग' विजन 2026 में चर्चा के केंद्र में है। यह थीम दया, करुणा और उदारता के भावों से जुड़ी है और आपसी साझापन के मायने समझाती है।

असल में किसी को खुशी देना, खुद खुश रहने का सबसे बड़ा फॉर्मूला है। बच्चों को सिखाएं कि वे किसी जरूरतमंद की सहायता करें, बुजुर्गों की मदद करें और उनका सम्मान करें। दूसरों में कमियां देखने के बजाय उनमें अच्छायियां खोजें और उनकी तारीफ करें।

मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि खुशी असल में चीजों में नहीं बल्कि हमारी आदतों में होती है। हमारी अच्छी आदतें औरों को भी खुश करती हैं और हमें भी सुख देती हैं। आभार व्यक्त करने से खुश रहने और खुशियां बांटने वालों का सपोर्ट सिस्टम बहुत अच्छा होता है।