लखनऊ

यूपी में 120 नई गौशाला खोलने की तैयारियां, गौसेवकों की भी होगी नियुक्ति, जिलाधिकारियों से मांगा गया प्रस्ताव

- 147 करोड़ रुपए का बजट - गौसेवकों की भी नियुक्ति की जाएगी  

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Dec 22, 2020
गोशाला में एकत्रित किए गए पशु।

पत्रिका न्यूज नेटवर्क.
लखनऊ. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का गौ प्रेम किसी से छिपा नहीं है। बीते तीन वर्षों में इसके मद्देनजर कई गौशालाएं खोली गईं व करोड़ो रुपए इनकी सेवा के लिए दिए गए। अब प्रदेश में 120 नई गौशालाएं खोलने की तैयारियां चल रही हैं। इनके लिए गौसेवकों की भी नियुक्ति की जाएगी। सरकार ने करीब 147 करोड़ रुपए का बजट बना रखा है। इसके लिए मुख्य सचिव आरके तिवारी ने सभी जिलाधिकारियों से प्रस्ताव मांगे हैं। बीते दिनों आवारा गायों, गौशालाओं में उनकी मौत व सही देख-रेख न हो पाने का मुद्दा गर्माया था। इस पर कांग्रेस महासचिव व यूपी प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर ठंड के कारण गायों की मौत, गौशालाओं की स्थिति का मुद्दा उठाया था।

मुख्य सचिव ने मांगा सभी जिलाधिकारियों से प्रस्ताव-
उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव आरके तिवारी ने जिलाधिकारियों को निर्देश देते हुए गौशाला स्थापित करने के प्रस्ताव मांगे हैं। इसमें बताया गया है कि नई गौशालाओं की स्थापना के लिए 147 करोड़ रुपये उपलब्ध हैं, जससे 120 नई गौशालाएं खोली जा सकती है। उन्होंने आगे कहा कि जरूरी होने पर राज्य वित्त आयोग के बजट से गौ सेवक भी रख सकते है ताकि गायों की ठीक तरह से देख रेख की जा सके।

प्रियंका गांधी ने लिखा पत्र-
प्रियंका गांधी ने मामले पर ट्वीट कर लिखा कि प्रदेश की कई गौशालाओं में यही स्थिति है। प्रियंका गांधी ने कहा कि इस समस्या को सुलझाने के मॉडल मौजूद हैं। गौमाता की देखभाल की घोषणाओं के साथ-साथ योजनाओं को अमलीजामा पहनाना जरूरी है। उन्होंने ललितपुर मामले को लेकर लिखा कि वहां के सौजना से आई गौमाता के शवों की तस्वीरों को देखकर मन विचलित हो गया है। उन्होंने कहा कि अभी यह जानकारी नहीं हुई है कि इन गायों की मौत किन हालातों में हुई है।

प्रियंका ने लिखा कि तस्वीरों को देखकर ऐसा लग रहा है कि चारा-पानी नहीं मिलने की वजह से ही इन गौमाताओं की मौतें हुई हैं। इनको देखकर लगता है कि यह सभी कई दिनों से भूखी व प्यासी थीं। प्रियंका गांधी ने कहा कि हर बार इन पर कुछ देर के लिए चर्चा होती है, लेकिन इन मासूम जानवरों की देखभाल के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाते। सवाल उठता है कि इसके लिए जिम्मेदार कौन है।

Published on:
22 Dec 2020 07:06 pm
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