
About Omwati Devi UP: संसद के मानसून सत्र की शुरुआत सोमवार को दिवंगत पूर्व सांसदों और पूर्व विधायकों को श्रद्धांजलि देने के साथ हुई। श्रद्धांजलि सूची में सबसे पहले जिन नेताओं का नाम लिया गया, उनमें उत्तर प्रदेश की वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद ओमवती देवी भी शामिल थीं। उनका इसी साल 8 मई को निधन हो गया था। ओमवती देवी उन नेताओं में गिनी जाती थीं, जिन्होंने एक साधारण किसान परिवार से निकलकर प्रदेश और राष्ट्रीय राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई।
ओमवती देवी का पूरा राजनीतिक जीवन बिजनौर जिले की नगीना सीट के इर्द-गिर्द रहा। नगीना शहर के मंडी मौलगंज स्थित उनका आवास लंबे समय तक क्षेत्रीय राजनीति का प्रमुख केंद्र माना जाता था। यहां रोजाना क्षेत्र के लोगों, कार्यकर्ताओं और विभिन्न दलों के नेताओं का आना-जाना लगा रहता था।
उनकी पहचान केवल एक राजनेता के रूप में नहीं, बल्कि जनता के बीच सहज और सरल स्वभाव वाली जनप्रतिनिधि के रूप में भी थी। स्थानीय लोगों के बीच उनकी मजबूत पकड़ और राजनीतिक सक्रियता की वजह से वे लंबे समय तक प्रभावशाली नेता बनी रहीं।
ओमवती देवी ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत कांग्रेस पार्टी से की थी। साल 1985 में उन्होंने नगीना सुरक्षित विधानसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा और पहली बार विधायक निर्वाचित हुईं। इसी जीत के साथ उनके सार्वजनिक जीवन की औपचारिक शुरुआत हुई।
ओमवती देवी का राजनीतिक सफर कई दलों से जुड़ा रहा, लेकिन उनका जनाधार लगातार मजबूत बना रहा। वह नगीना विधानसभा सीट से कुल 4 बार विधायक चुनी गईं।
उन्होंने साल 1996 और 2022 में समाजवादी पार्टी (SP) के टिकट पर जीत दर्ज की, जबकि साल 2007 में बहुजन समाज पार्टी (BSP) के उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीता। बसपा सरकार बनने के बाद उन्हें स्वतंत्र प्रभार राज्य मंत्री की जिम्मेदारी भी सौंपी गई।
विधानसभा के अलावा ओमवती देवी ने लोकसभा चुनाव भी जीता। उन्होंने 12वीं लोकसभा के लिए बिजनौर संसदीय सीट से समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव जीतकर संसद में प्रवेश किया। इसके साथ ही उनकी सक्रिय भूमिका राष्ट्रीय राजनीति तक पहुंच गई।
लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ओमवती देवी अपने पति और सेवानिवृत्त IAS अधिकारी आर.के. सिंह के साथ भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गईं। इसके बाद भाजपा ने उन्हें 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में टिकट दिया, लेकिन वह चुनाव में समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार मनोज पारस से हार गईं।
ओमवती देवी की पहचान ऐसी नेता के रूप में भी थी, जिनके विभिन्न राजनीतिक दलों के शीर्ष नेताओं से अच्छे संबंध रहे। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, बसपा प्रमुख मायावती, समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव और भाजपा नेता राजनाथ सिंह समेत कई प्रमुख नेताओं के साथ उनके राजनीतिक और व्यक्तिगत संबंधों की चर्चा होती रही।
ओमवती देवी का जन्म बिजनौर जिले के स्योहारा थाना क्षेत्र के ताखावली गांव में एक किसान परिवार में हुआ था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा गांव में हुई। इसके बाद उन्होंने धामपुर स्थित आरएसएम डिग्री कॉलेज से उच्च शिक्षा प्राप्त की। उनका विवाह सरकारी अधिकारी रहे और बाद में आईएएस बने आर.के. सिंह से हुआ। उनके परिवार में तीन बेटियां और एक बेटा हैं। उनके बेटे राजीव सिंह उत्तर प्रदेश पुलिस में अधिकारी हैं, जबकि उनकी बहू हैनरीता राजीव सिंह राजनीति में सक्रिय हैं।
ओमवती देवी का राजनीतिक सफर कई दलों से होकर गुजरा, लेकिन क्षेत्र में उनकी लोकप्रियता और जनसंपर्क हमेशा उनकी सबसे बड़ी ताकत रहे। गांव की पृष्ठभूमि से निकलकर विधायक, मंत्री और सांसद बनने तक का उनका सफर उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबे समय तक याद किया जाएगा।