बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने महिला आरक्षण को लेकर राजद, कांग्रेस और अखिलेश यादव पर परिवारवाद का आरोप लगाया।
Akhilesh Yadav VS Samrat Chaudhary: बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक सभा को संबोधित करते हुए नारी शक्ति वंदन अधिनियम बिल के लोकसभा में गिर जाने पर राजद और कांग्रेस पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि ये पार्टियां महिलाओं को आगे बढ़ने नहीं देना चाहतीं। सम्राट चौधरी ने आरोप लगाया कि राजद और कांग्रेस वाले यही चाहते हैं कि सिर्फ उनके अपने परिवार की महिलाएं ही आगे बढ़ें। राहुल गांधी चाहते हैं कि केवल उनकी बहन प्रियंका गांधी संसद पहुंचें। लालू यादव चाहते हैं कि उनकी बेटी और पत्नी ही सदन में जाएं तथा उनकी पत्नी विपक्ष की नेता बनें।
उन्होंने आगे कहा कि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव भी यही चाहते हैं कि सिर्फ उनकी पत्नी सांसद बनकर लोकसभा जाएं। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चाहते हैं कि देश में 272 बहनें लोकसभा पहुंचें और महिलाओं को सही मायने में सशक्त बनाया जाए।
सम्राट चौधरी के बयान पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने तेज पलटवार किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि जघन्य अपराध करने वाले, अपराध से बचने के लिए उम्र बदलने वाले, विचारहीन और सिद्धांतहीन होकर दल बदलने वाले, किसी को छल से हटाने वाले तथा भ्रष्टाचार के शिरोमणि कहलाने वाले व्यक्ति बिहार के
मुख्यमंत्री कैसे बन सकते हैं?
अखिलेश यादव का यह तीखा हमला बिहार की राजनीति में काफी चर्चा में है। उन्होंने सम्राट चौधरी पर व्यक्तिगत आरोप लगाते हुए कहा कि ऐसे लोग राज्य की कमान संभालने लायक नहीं हैं।
इस पूरे मामले ने यूपी से लेकर बिहार तक राजनीतिक गर्मी बढ़ा दी है। बिहार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने विपक्षी दलों को महिला विरोधी बताते हुए चेतावनी दी कि महिलाओं के साथ किया गया यह अपमान जनता भूल नहीं सकेगी। दूसरी ओर, विपक्षी नेता इसे भाजपा की राजनीति का हिस्सा बता रहे हैं। नारी शक्ति वंदन अधिनियम बिल का मुद्दा अब परिवारवाद बनाम महिलाओं के व्यापक आरक्षण का मुद्दा बन गया है। सम्राट चौधरी ने कहा कि जब भी महिलाओं और पिछड़ों के आरक्षण की बात आती है, तो कांग्रेस और राजद रोड़े अटकाते हैं। उन्होंने इसे महिलाओं के साथ धोखा और अपमान करार दिया।
यह विवाद महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर देशभर में चर्चा का विषय बन गया है। भाजपा की ओर से दावा किया जा रहा है कि मोदी सरकार महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है, जबकि विपक्ष इसे सिर्फ चुनावी मुद्दा बताकर खारिज कर रहा है। दोनों पक्षों के आरोप-प्रत्यारोप से राजनीतिक माहौल गरमा गया है।