लखनऊ

प्रतीक ने कहा था- ‘भैया ज्यादा समझदार, उन्हें ही सौंपो बागडोर’, श्मशान घाट पर उनकी बेटी को चॉकलेट खिलाते भावुक हुए अखिलेश

Prateek Yadav News: अखिलेश और प्रतीक यादव के रिश्तों की वो अनकही कहानी, जो कभी सामने नहीं आई। जानिए बैडमिंटन कोर्ट से लेकर सियासत के गलियारों तक, कैसे दोनों भाइयों ने हमेशा निभाया अपनापन।

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May 16, 2026
श्मशान घाट पर प्रतीक यादव की बेटी पद्मजा को चॉकलेट खिलाकर दुलारते भावुक अखिलेश यादव | फोटो सोर्स- patrika.com

Prateek Yadav News: यूपी की राजनीति के सबसे बड़े मुलायम परिवार को लेकर अक्सर तरह-तरह की बातें होती रहती हैं। मीडिया में कई बार दोनों भाइयों के रिश्तों को लेकर 'सौतेले' जैसे शब्दों का इस्तेमाल भी हुआ। लेकिन असलियत यह है कि अखिलेश यादव और उनके छोटे भाई प्रतीक यादव का रिश्ता हमेशा बहुत मजबूत रहा। हाल ही में लखनऊ के श्मशान घाट से आई एक तस्वीर ने इस बात को साबित भी कर दिया। वहां प्रतीक की छोटी बेटी पद्मजा अपने बड़े ताऊ अखिलेश यादव की गोद में बैठकर मुस्कुराती दिखी और अखिलेश भी अपने सारे दुख भूलकर उसे दुलारते और चॉकलेट खिलाते नजर आए।

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जब सरकारी बंगले पर साथ खेलते थे बैडमिंटन

मुलायम सिंह यादव की पहली पत्नी मालती देवी के बेटे अखिलेश हैं और साधना गुप्ता के बेटे प्रतीक थे। दोनों भाइयों के बीच उम्र का एक बड़ा अंतर था, लेकिन उनके बीच कभी दूरियां नहीं आई। परिवार के करीबी लोग बताते हैं कि जब मुलायम सिंह यादव लखनऊ के विक्रमादित्य मार्ग वाले सरकारी बंगले में रहते थे, तब शाम के समय अखिलेश और प्रतीक अक्सर साथ में बैडमिंटन खेला करते थे।

दोनों को था फिटनेस का शौक, वर्कआउट पर होती थी बातें

दोनों भाइयों में सबसे बड़ी समानता फिटनेस को लेकर थी। एक तरफ जहां प्रतीक यादव बॉडीबिल्डिंग के शौकीन थे और लखनऊ में अपनी जिम चलाते थे, वहीं अखिलेश यादव को भी अपनी फिटनेस और साइकिल चलाने के लिए जाना जाता है। जब भी दोनों भाई आपस में मिलते थे, तो देश-दुनिया की सियासत के बजाय उनके बीच सबसे ज्यादा चर्चा डाइट प्लान और वर्कआउट को लेकर होती थी। यही वजह है कि प्रतीक के अंतिम समय में अखिलेश बहुत दुखी नजर आए।

प्रतीक ने कहा था- 'भैया मुझसे ज्यादा समझदार हैं'

जब समाजवादी पार्टी में इस बात की चर्चा शुरू हुई कि मुलायम सिंह यादव के बाद पार्टी की कमान कौन संभालेगा, तब प्रतीक यादव ने खुद आगे बढ़कर बड़े भाई अखिलेश का सम्मान किया था। ऑस्ट्रेलिया से पढ़ाई पूरी कर लौटे अखिलेश के लिए प्रतीक ने साफ कहा था कि भैया मुझसे ज्यादा समझदार हैं, इसलिए पार्टी की कमान उन्हें ही मिलनी चाहिए। प्रतीक ने खुद को हमेशा राजनीति से दूर रखा और अपना पूरा ध्यान बिजनेस पर लगाया।

हर सुख-दुख में हमेशा एक-दूसरे के साथ खड़े रहे

दोनों भाइयों के बीच एक आपसी समझ थी कि वे एक-दूसरे के काम में कभी दखल नहीं देंगे। अखिलेश ने कभी प्रतीक के बिजनेस पर कोई बात नहीं की और प्रतीक ने कभी राजनीति में दखल नहीं दिया। यह रिश्ता सिर्फ कहने के लिए नहीं था। प्रतीक की शादी में अखिलेश के बेटे अर्जुन सहबाला बने थे, तो डिंपल यादव ने बड़ी भाभी की जिम्मेदारी बहुत अच्छे से निभाई थी। यहां तक कि अखिलेश सरकार के समय मंत्रियों के फैसलों में भी प्रतीक की राय का सम्मान किया गया था। जब मुलायम सिंह यादव का निधन हुआ, तब भी दुख की उस घड़ी में दोनों भाई एक-दूसरे को संभालते और कंधा देते नजर आए थे।

अपर्णा यादव पर कभी नहीं किया निजी हमला

प्रतीक की पत्नी अपर्णा यादव राजनीति में हमेशा से ही काफी एक्टिव रही हैं। साल 2022 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले जब अपर्णा ने भाजपा को चुना, तो राजनीतिक गलियारों में लगा कि अब परिवार में दरार आएगी। लेकिन अखिलेश यादव ने बहुत समझदारी के साथ सिर्फ इतना कहा कि नेताजी ने उन्हें समझाने की कोशिश की थी, लेकिन यह उनका अपना फैसला है।

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