
छात्रा से अभद्र बातचीत के आरोपों में घिरे LU प्रोफेसर, पुलिस जांच तेज (फोटो सोर्स : भाषा WhatsApp News Group)
LU Professor Audio Viral : उत्तर प्रदेश की राजधानी स्थित Lucknow University इन दिनों एक बड़े विवाद को लेकर सुर्खियों में है। विश्वविद्यालय के एक असिस्टेंट प्रोफेसर पर छात्रा से कथित अभद्र बातचीत करने, परीक्षा में अनुचित लाभ देने का प्रलोभन देने और प्रश्नपत्र आउट कराने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हुए कथित ऑडियो के सामने आने के बाद विश्वविद्यालय परिसर में हड़कंप मच गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस दोनों सक्रिय हो गए हैं।
आरोपी प्रोफेसर डॉ. परमजीत सिंह को पुलिस ने हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। वहीं विश्वविद्यालय प्रशासन ने पूरे प्रकरण की जांच के लिए एक समिति गठित की है। घटना के बाद छात्र संगठनों, शिक्षकों और अभिभावकों के बीच भी तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
जानकारी के अनुसार 15 मई 2026 को विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक की ओर से हसनगंज थाना में लिखित तहरीर दी गई। तहरीर में आरोप लगाया गया कि विश्वविद्यालय में कार्यरत असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. परमजीत सिंह ने एक छात्रा से फोन पर आपत्तिजनक और अशोभनीय बातचीत की। आरोप यह भी है कि उन्होंने छात्रा को परीक्षा में अनुचित लाभ दिलाने का लालच दिया। बताया जा रहा है कि छात्रा द्वारा उपलब्ध कराए गए एक कथित ऑडियो क्लिप में प्रोफेसर परीक्षा का प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने जैसी बातें करते सुनाई दे रहे हैं। वायरल ऑडियो में कथित तौर पर प्रोफेसर छात्रा से कहते सुनाई दे रहे हैं-
“डार्लिंग, तुम्हारे लिए पेपर आउट करा दिया है…” इसके अलावा ऑडियो में “एग्जाम से पहले आ जाओ, पेपर दे देंगे” जैसी बातें भी सुनाई देने का दावा किया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर छात्रा कथित रूप से यह कहती सुनाई दे रही है कि “मुझे पेपर नहीं चाहिए… फिर से मोलेस्ट करना चाहते हैं…”हालांकि इस वायरल ऑडियो की सत्यता की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक आधिकारिक रूप से नहीं हुई है। पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन दोनों ही मामले की जांच कर रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक छात्रा ने आरोप लगाया है कि प्रोफेसर लगातार उस पर छुट्टी छोड़कर वापस आने का दबाव बना रहे थे। छात्रा का कहना है कि उसे परीक्षा में मदद और पेपर उपलब्ध कराने का लालच दिया गया। साथ ही उसने यह भी आरोप लगाया कि प्रोफेसर ने उसके साथ उत्पीड़न और मोलेस्ट करने की कोशिश की।
छात्रा के आरोपों के सामने आने के बाद विश्वविद्यालय परिसर में आक्रोश फैल गया। कई छात्र संगठनों ने मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की है। छात्रों का कहना है कि अगर आरोप सही पाए जाते हैं तो यह केवल एक छात्रा के साथ अन्याय नहीं, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र की विश्वसनीयता पर सवाल है।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कथित ऑडियो ने पूरे मामले को सनसनीखेज बना दिया है। ऑडियो वायरल होने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन पर त्वरित कार्रवाई का दबाव बढ़ गया। विश्वविद्यालय से जुड़े कई छात्र और अभिभावक इस घटना को लेकर चिंता जता रहे हैं। शिक्षा जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि शिक्षक और छात्र के बीच संबंध विश्वास और मर्यादा पर आधारित होते हैं। यदि कोई शिक्षक अपने पद का दुरुपयोग करता है तो यह अत्यंत गंभीर मामला माना जाएगा।
हालांकि कुछ लोगों का यह भी कहना है कि जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। उनका मानना है कि तकनीकी जांच के बाद ही ऑडियो की प्रमाणिकता स्पष्ट हो सकेगी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने आंतरिक जांच समिति गठित की है। सूत्रों के अनुसार समिति छात्रा, संबंधित प्रोफेसर और अन्य संभावित गवाहों के बयान दर्ज करेगी। साथ ही वायरल ऑडियो की जांच भी कराई जा सकती है।
विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से फिलहाल आधिकारिक रूप से इतना कहा गया है कि मामला गंभीर है और तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। विश्वविद्यालय की छवि और छात्रों की सुरक्षा दोनों को ध्यान में रखते हुए प्रशासन बेहद सतर्क दिखाई दे रहा है। विश्वविद्यालय के कुछ शिक्षकों ने भी निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि दोषी पाए जाने पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन जांच प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए।
हसनगंज थाना पुलिस के अनुसार परीक्षा नियंत्रक की तहरीर के आधार पर आरोपी प्रोफेसर के खिलाफ सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की विवेचना सहायक पुलिस आयुक्त महानगर द्वारा की जाएगी। जांच के दौरान वायरल ऑडियो, कॉल रिकॉर्ड, मोबाइल डेटा और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की भी जांच की जाएगी।
पुलिस का कहना है कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो आरोपी के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं यदि किसी प्रकार की तकनीकी छेड़छाड़ या गलत आरोप की बात सामने आती है तो उस दिशा में भी कार्रवाई होगी।
घटना सामने आने के बाद विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति भी सक्रिय हो गई है। कई छात्र संगठनों ने परिसर में प्रदर्शन की चेतावनी दी है। छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय परिसर को सुरक्षित और पारदर्शी बनाना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
कुछ छात्र नेताओं ने मांग की है कि आरोपी प्रोफेसर को जांच पूरी होने तक निलंबित किया जाए ताकि जांच प्रभावित न हो। वहीं महिला छात्राओं ने विश्वविद्यालय में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और शिकायत तंत्र को अधिक प्रभावी बनाने की मांग उठाई है। छात्र संगठनों का कहना है कि यदि शिक्षक ही छात्रों पर अनुचित दबाव डालेंगे तो शिक्षा व्यवस्था पर विश्वास कमजोर होगा। ऐसे मामलों में उदाहरण प्रस्तुत करने वाली कार्रवाई की आवश्यकता है।
यह मामला सोशल मीडिया पर भी तेजी से चर्चा का विषय बना हुआ है। कई लोग वायरल ऑडियो को साझा करते हुए आरोपी प्रोफेसर के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। वहीं कुछ लोग यह भी अपील कर रहे हैं कि जांच पूरी होने से पहले किसी को दोषी घोषित करना उचित नहीं होगा।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर शिक्षा व्यवस्था, विश्वविद्यालयों में नैतिकता और महिला सुरक्षा जैसे मुद्दों पर बहस छिड़ गई है। कई यूजर्स ने सवाल उठाया कि यदि पेपर आउट कराने जैसी बातें सच हैं, तो यह परीक्षा प्रणाली की निष्पक्षता पर भी बड़ा सवाल है।
इस पूरे प्रकरण ने उच्च शिक्षा संस्थानों की कार्यप्रणाली और जवाबदेही को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि विश्वविद्यालय केवल शिक्षा देने के केंद्र नहीं होते, बल्कि वे नैतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारियों के भी प्रतीक होते हैं।
यदि किसी शिक्षक पर छात्रा के शोषण या परीक्षा में धांधली जैसे आरोप लगते हैं, तो उसका असर केवल एक संस्थान तक सीमित नहीं रहता। इससे छात्रों और अभिभावकों के बीच पूरे शिक्षा तंत्र के प्रति अविश्वास बढ़ सकता है। शिक्षाविदों का मानना है कि विश्वविद्यालयों में लैंगिक संवेदनशीलता, आचार संहिता और शिकायत निवारण प्रणाली को और मजबूत बनाने की आवश्यकता है। महिला छात्रों के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करना हर शिक्षण संस्थान की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।
कानूनी सलाहकार अनुराग का कहना है कि ऐसे मामलों में डिजिटल साक्ष्य महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वायरल ऑडियो की फॉरेंसिक जांच से यह स्पष्ट किया जा सकेगा कि ऑडियो असली है या उसमें किसी प्रकार की एडिटिंग की गई है।
वहीं मनोवैज्ञानिक डॉक्टर मनीष कश्यप का कहना है कि छात्र-शिक्षक संबंध में शक्ति संतुलन बहुत महत्वपूर्ण होता है। यदि कोई शिक्षक अपने अधिकार का गलत इस्तेमाल करता है तो इसका छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ सकता है। महिला अधिकार कार्यकर्ताओं ने भी मामले की निष्पक्ष जांच और पीड़ित छात्रा को उचित सुरक्षा व सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि छात्राओं को बिना भय के अपनी शिकायत दर्ज कराने का माहौल मिलना चाहिए।
लखनऊ विश्वविद्यालय प्रदेश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में गिना जाता है। ऐसे में इस तरह का विवाद विश्वविद्यालय की छवि के लिए भी चुनौती बन गया है। अभिभावकों और छात्रों के बीच इस घटना को लेकर चिंता देखी जा रही है। विश्वविद्यालय प्रशासन पर अब यह जिम्मेदारी है कि वह मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करे और दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई करे। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
Published on:
16 May 2026 09:08 am
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