
प्रतीक यादव फाइल फोटो पत्रिका
पूर्व मुख्यमंत्री समाजवादी पार्टी के संस्थापक रहे मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे प्रतीक यादव की ओर से दर्ज कराए गए करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी और रंगदारी के मामले की जांच उनकी मौत के बाद भी जारी रहेगी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वादी के बयान पहले ही दर्ज किए जा चुके हैं। अब इस हाई प्रोफाइल मामले की विवेचना गौतमपल्ली थाने से हटाकर हजरतगंज पुलिस को सौंप दी गई है।
लखनऊ में दर्ज करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी, रंगदारी और आईटी एक्ट से जुड़े मामले में पुलिस जांच लगातार आगे बढ़ रही है। यह मामला समाजवादी परिवार से जुड़े प्रतीक यादव द्वारा दर्ज कराया गया था। अधिकारियों के अनुसार, वादी की मौत हो जाने के बावजूद केस बंद नहीं किया जाएगा। क्योंकि उनके बयान और जरूरी दस्तावेज पहले ही पुलिस रिकॉर्ड में शामिल किए जा चुके हैं।
सहायक पुलिस आयुक्त का कहना है कि प्रतीक यादव ने अपने आरोपों से जुड़े बयान लिखित रूप में पुलिस को दिए थे। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर अब आरोपितों से जुड़े साक्ष्य, वित्तीय लेनदेन और अन्य रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि आईटी एक्ट से जुड़े मामलों की विवेचना इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारी द्वारा की जाती है। इसलिए केस को गौतमपल्ली थाने से हजरतगंज स्थानांतरित किया गया है।
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, 13 जुलाई 2025 को गौतमपल्ली थाने में यह मुकदमा दर्ज कराया गया था। शिकायत में रियल एस्टेट कंपनी मोनल इंफ्रा के निदेशक कृष्णानंद पांडेय, उनकी पत्नी वंदना पांडेय और पिता अशोक पांडेय को नामजद किया गया था।
आरोप लगाया गया था कि शहीद पथ के पास जमीन में निवेश कराने के नाम पर करोड़ों रुपये लिए गए। बाद में जब निवेश का हिसाब मांगा गया तो आरोपितों ने कथित तौर पर चार करोड़ रुपये की मांग की। शिकायत में यह भी कहा गया था कि रकम न देने पर फर्जी पॉक्सो केस में फंसाने और सोशल मीडिया के जरिए बदनाम करने की धमकी दी गई।
फिलहाल पुलिस सभी दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि विवेचना पूरी होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
Updated on:
16 May 2026 09:30 am
Published on:
16 May 2026 09:02 am
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