अखिलेश यादव ने लोकसभा चुनाव से पहले निषाद पार्टी से किया गठबंधन, गोरखपुर से प्रवीण कुमार निषाद को बनाया सपा उम्मीदवार...
लखनऊ. लोकसभा चुनाव से पहले गोरखपुर और फूलपुर के उपचुनावों में जीत के लिये सभी दलों ने पूरी ताकत झोंक दी है। कांग्रेस के बाद अब समाजवादी पार्टी ने भी गोरखपुर से अपना प्रत्याशी घोषित कर मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है। रविवार को अखिलेश यादव ने लखनऊ में प्रेसवार्ता की। इस दौरान उन्होंने निषाद पार्टी से गठबंधन करते हुए पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद के बेटे प्रवीण कुमार निषाद को पार्टी का टिकट दे दिया। वह अब समाजवादी पार्टी के चुनाव चिह्न साइकिल पर को लेकर मैदान में उतरेंगे। अखिलेश जब प्रेसवार्ता कर रहे थे, उनके साथ मंच पर पीस पार्टी के अध्यक्ष डॉ. अय्यूब भी थे। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अखिलेश यादव ने अपने पिता मुलायम सिंह यादव की तरह ही मास्टर स्ट्रोक खेला है। तब मुलायम सिंह यादव ने मल्लाह जाति की फूलनदेवी को मिर्जापुर से उतारकर पूरे सियासी समीकरण बदल दिये थे।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि निषाद पार्टी से गठबंधन कर अखिलेश यादव ने बड़ा दांव चल दिया है। गोरखपुर में निषाद समाज की तादाद काफी ज्यादा, तकरीबन 3.5 लाख है। 2014 के लोकसभा चुनाव में योगी आदित्यनाथ गोरखपुर सीट से चुनाव तो जीते थे, तब भी इस सीट से समाजवादी पार्टी की महिला प्रत्याशी राजमती निषाद दूसरे नंबर पर रही थीं। तीसरे नंबर पर बसपा के राम बहुल निषाद रहे थे। मतलब साफ है कि सपा-हो या बसपा दोनों योगी आदित्यनाथ के मुकाबले निषाद चेहरे पर ही दांव लगाते हैं।
निर्णायक स्थिति में है मतदाता
पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में निषाद, बिंद वोटर की संख्या निर्णायक स्थिति में है। बिंद समाज में गोरख प्रसाद निषाद, दरोगा प्रसाद निषाद जैसे बड़े नाम हैं। गोरखपुर मंडल के करीब 28 विधानसभा क्षेत्रों में निषाद बिरादरी बड़ी तादाद में है। इंटरनेट पर मौजूद आंकड़ों की मानें तो निषादों की सबसे ज्यादा संख्या गोरखपुर संसदीय क्षेत्र में है। गोरखपुर में निषाद की संख्या करीब तीन से साढ़े तीन लाख बताई जाती है। ऐसे ही देवरिया में करीब एक लाख, बांसगांव में करीब दो लाख, महराजगंज में करीब ढाई लाख और पड़रौना में करीब तीन लाख निषाद मतदाता हैं।
मुलायम सिंह यादव ने भी खेला था मास्टर स्ट्रोक
अखिलेश यादव उपचुनाव में निषाद पार्टी से गठबंधन करके बड़ा दांव खेला है। उन्होंने अपने पिता मुलायम की तरह ही मास्टर स्ट्रोक खेला है। 1996 में मुलायम सिंह यादव ने मल्लाह जाति की फूलनदेवी को टिकट देकर चुनाव की तस्वीर बदल दी थी। उस चुनाव में फूलनदेवी ने बड़ी जीत दर्ज की।
अब निगाहें बीजेपी कैंडिडेट पर...
समाजवादी पार्टी के बाद अब सभी की नजरें भाजपा कैंडिडेट पर टिकी हैं। देखना दिलचस्प होगा कि भारतीय जनता पार्टी किसे टिकट देगी। गोरखपुर सीट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रतिष्ठा का विषय है। इस सीट पर लंबे समय से बीजेपी का कब्जा रहा है। बता दें कि मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर सीट से इस्तीफा दिया था, अब इस सीट पर उपचुनाव हो रहे हैं। लोकसभा चुनाव में अभी मुश्किल से साल भर का ही समय बचा है, ऐसे में हर दल उपचुनाव में दोनों सीटें (गोरखपुर, फूलपुर) जीतकर कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाना चाहता है।