योगी राज में निरस्त होने वाली यह कोई पहली भर्ती नहीं यूपी सरकार इससे पहले भी कई भर्तियां कर चुकी कैंसिल दो साल में बढ़े साढ़े बारह लाख शिक्षित बेरोजगार
लखनऊ. प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने बीते दिनों कॉन्सटेबल भर्ती का रिजल्ट जारी कर बड़ा रिकॉर्ड बनाया। पुलिस कांस्टेबल की नौकरी पाकर लगभग पचास हजार बेरोजगारों के घर रोशन हुए। एक तरफ यूपी पुलिस को 49568 नए कांस्टेबल मिले तो दूसरी तरफ यूपी की एक और नौकरी भर्ती भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई। यूपी सरकार ने अखिलेश राज में हुई जल निगम की भर्तियों को निरस्त कर दिया। जिससे 853 जूनियर इंजीनियर और 335 लिपिक यानी कुल 1188 लोगों के घर बेरोजगारी के अंधेरे में डूब गए। ये सभी वर्तमान में जल निगम में तैनात थे। आजम खां के नगर विकास मंत्री के कार्यकाल में हुई इन भर्तियों में बड़े पैमाने पर धांधली की शिकायतों के बाद हाईकोर्ट ने एसआईटी को जांच सौंपी थी। एसआईटी की जांच में शिकायतें सही पाए जाने के बाद सरकार ने सोमवार देर रात यह कार्रवाई की। वहीं इस भर्ती के मामले में अब पूर्व सीएम अखिलेश पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं, क्योंकि एसआईटी की जांच उनतक भी पहुंच सकती है।
आजम खान पाए गए दोषी
सपा शासन में हुई जल निगम भर्ती घोटाले की जांच कर रही एसआईटी ने आजम खान को दोषी माना। जिसके बाद आजम खां के नगर विकास मंत्री के कार्यकाल में उत्तर प्रदेश जल निगम में 853 जूनियर इंजीनियर व 335 लिपिकों की हुई भर्तियों को शासन ने निरस्त कर दिया गया। इससे पहले 122 सहायक अभियंताओं की भर्तियां को निरस्त किया गया था। एसआइटी जांच में भर्तियों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी पाए जाने पर योगी आदित्यनाथ सरकार ने निरस्त करने संबंधी आदेश को जारी किया। आजम खां पर आरोप है कि 122 सहायक अभियंता, 853 अवर अभियंता समेत कुल 1300 पद थे, जिनकी भर्ती प्रक्रिया में अनियमितता बरती गई। हालांकि योगी राज में निरस्त होने वाली यह कोई पहली भर्ती नहीं है। यूपी सरकार इससे पहले भी कई भर्तियां कैंसिल कर चुकी है।
2 साल में बढ़े 12.5 लाख शिक्षित बेरोजगार
वहीं भारत के सबसे ज्यादा आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश में पिछले दो साल में 12.5 लाख बेरोजगार बढ़ गए हैं। इसके बाद यूपी में कुल बेरोजगारों की संख्या 34 लाख हो गई है। उत्तर प्रदेश विधानसभा सत्र के दौरान योगी सरकार की ओर से 14 फरवरी को जानकारी दी गई। प्रदेश के मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्या ने कहा कि लेबर डिपार्टमेंट की ओर से संचालित ऑनलाइन पोर्टल पर 7 फरवरी 2020 तक करीब 33.93 लाख बेरोजगार रजिस्टर्ड हुए हैं। हालांकि सरकार की ओर से बेरोजगारी दर बढ़ने की वजह नहीं बताई गई।
- योगी सरकार में अब तक रद्द हुई भर्तियां
4000 उर्दू शिक्षकों की भर्ती रद्द
योगी सरकार ने पूर्ववर्ती समाजवादी पार्टी के शासन के दौरान बेसिक शिक्षा विभाग में आई 4000 उर्दू शिक्षकों की भर्ती रद्द कर दी थी। सरकार की तरफ से तर्क दिया गया था कि विभाग में पहले से ही तय मानक से ज्यादा उर्दू शिक्षक हैं लिहाजा अब और शिक्षकों की जरूरत नहीं है। अखिलेश यादव ने अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल में 15 दिसंबर 2016 को प्राथमिक स्कूलों में 4000 उर्दू शिक्षकों की भर्ती करने की प्रशासनिक मंजूरी दी थी।
32 हजार से ज्यादा युवाओं को झटका
4 हजार उर्दू शिक्षकों की भर्ती निरस्त करने के बाद योगी सरकार ने सपा राज में शुरू की गईं 32 हजार अनुदेशकों की भर्ती प्रक्रिया भी निरस्त कर दी। इतनी बड़ी संख्या में खेलकूद एवं शारीरिक शिक्षा अनुदेशकों की भर्ती प्रक्रिया को रद्द करने के पीछे वजह निशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम के मापदंड के विपरीत होना बताया था।
1364 लेखपाल पदों पर भर्ती कैंसिल
यूपी सरकार ने पिछले साल चकबंदी लेखपाल के 1364 पदों पर सीधी भर्ती की प्रक्रिया को निरस्त करने का फैसला लिया। इन पदों पर भर्ती के लिए OBC और ST के एक भी पद नहीं होने का मुद्दा योगी सरकार ने संज्ञान में लिया और भर्ती निरस्त करने का फैसला लिया।
नहीं हुई 112 पदों पर भर्ती
पिछले साल ही उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने उर्दू अनुवादक सह कनिष्ठ सहायक के 112 पदों की भर्ती प्रक्रिया निरस्त कर दी गई थीं। शासन के सतर्कता विभाग द्वारा नियुक्ति का औचित्य न पाए जाने से इसे निरस्त कर दिया गया है। सपा सरकार में आयोग ने वर्ष 2016 में सम्मिलित उर्दू अनुवादक सह कनिष्ठ सहायक के 112 पदों के लिए विज्ञापन निकालते हुए आवेदन मांगा था। इसकी भर्ती परीक्षा अगस्त 2016 में कराई गई।