
AKTU Innovation Hub: डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (एकेटीयू) के इनोवेशन हब यूपी फाउंडेशन में अटल इनोवेशन मिशन, नीति आयोग के सहयोग से तीन दिवसीय ‘एडवांसिंग इनोवेशन प्रोफेशनल्स फॉर इकोसिस्टम एक्सीलेंस’ प्रशिक्षण कार्यक्रम के दूसरे बैच का सोमवार को शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य प्रतिभागियों को नवाचार, इन्क्यूबेशन, उद्यमिता और स्टार्टअप इकोसिस्टम से जुड़े विभिन्न पहलुओं की व्यावहारिक समझ प्रदान करना है। प्रशिक्षण के पहले दिन विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को नवाचार की बुनियादी अवधारणाओं से लेकर बिजनेस आइडिया को व्यवस्थित रूप देने तक की प्रक्रिया से परिचित कराया।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जे.पी. पांडेय के मार्गदर्शन में आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में नवाचार इकोसिस्टम को मजबूत करने, युवाओं और संस्थानों को उद्यमिता से जोड़ने तथा नए बिजनेस आइडिया को व्यावहारिक रूप देने पर विशेष जोर दिया गया। पहले दिन डिजाइन थिंकिंग, वैल्यू प्रपोजिशन कैनवास और लीन कैनवास जैसे विषयों पर विशेषज्ञ सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों के माध्यम से प्रतिभागियों को यह समझने का अवसर मिला कि किसी समस्या को पहचानकर उसके लिए उपयोगी और बाजार आधारित समाधान कैसे तैयार किया जा सकता है।
कार्यक्रम की शुरुआत नेटवर्किंग सत्र से हुई। इसमें प्रतिभागियों को एक-दूसरे से परिचित होने, अपने अनुभव साझा करने और नवाचार एवं उद्यमिता से जुड़े विचारों पर संवाद करने का अवसर मिला। विशेषज्ञों ने कहा कि मजबूत इकोसिस्टम के निर्माण में नेटवर्किंग की महत्वपूर्ण भूमिका है। अलग-अलग संस्थानों और क्षेत्रों से जुड़े लोगों के बीच संवाद से नए विचारों को सहयोग, मार्गदर्शन और संसाधन मिलने की संभावनाएं बढ़ती हैं। इसके बाद एसोसिएट डीन इनोवेशन डॉ. अनुज कुमार शर्मा ने इनोवेशन हब की ओर से नवाचार और उद्यमिता के क्षेत्र में चलाई जा रही विभिन्न पहलों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इनोवेशन हब का प्रयास विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और नवाचार से जुड़े लोगों को ऐसा मंच उपलब्ध कराना है, जहां वे अपने विचारों को आगे बढ़ाकर उन्हें व्यावहारिक रूप दे सकें।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि यूपी स्टार्टअप मिशन के सीईओ सुमित राजेश महाजन ने नवाचार और उद्यमिता के वर्तमान परिदृश्य के साथ इसके भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने प्रतिभागियों को उत्तर प्रदेश सरकार की स्टार्टअप नीति और उद्यमियों के लिए उपलब्ध विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि स्टार्टअप के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए केवल नया विचार होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उस विचार को बाजार की जरूरतों से जोड़ना और प्रभावी तरीके से क्रियान्वित करना भी जरूरी है। उन्होंने नवाचार आधारित उद्यमों के लिए उपलब्ध सहयोग तंत्र और प्रदेश में तैयार हो रहे स्टार्टअप वातावरण की जानकारी साझा की। प्रशिक्षण में शामिल प्रतिभागियों ने स्टार्टअप शुरू करने, उसे आगे बढ़ाने और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने से जुड़े सवाल भी पूछे।
अटल इनोवेशन मिशन की प्रोग्राम लीड तन्वी मिश्रा ने तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की रूपरेखा और इसके उद्देश्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण को इस तरह तैयार किया गया है, जिससे प्रतिभागियों को केवल सैद्धांतिक जानकारी न मिले, बल्कि वे विभिन्न टूल्स और प्रक्रियाओं को गतिविधियों के माध्यम से समझ सकें। इन सत्रों में प्रतिभागियों की सक्रिय भागीदारी पर विशेष ध्यान दिया गया। उन्हें समूह गतिविधियों, चर्चा और व्यावहारिक अभ्यास के जरिए नवाचार से जुड़ी चुनौतियों को समझने का अवसर मिला। इससे प्रशिक्षण को अधिक संवादात्मक और उपयोगी बनाने का प्रयास किया गया।
इनोवेशन हब के सीईओ डॉ. महीप सिंह ने इनोवेशन हब की भूमिका, गतिविधियों और नवाचार इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संस्थान का उद्देश्य नवाचार और उद्यमिता के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करना है, ताकि नए विचारों को उचित मार्गदर्शन और सहयोग मिल सके। उद्घाटन सत्र के अंत में इनोवेशन हब की सीआईओ वंदना शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इसके बाद प्रशिक्षण के तकनीकी एवं विशेषज्ञ सत्रों की शुरुआत हुई।
‘इनोवेशन इकोसिस्टम एंड इन्क्यूबेटर्स इन इंडिया’ विषय पर विशेष सत्र आयोजित किया गया। इसे मनीष वर्मा, मेंटर एवं ग्रोथ एक्सपर्ट, आईआईएम लखनऊ एंटरप्राइज इनक्यूबेशन सेंटर ने संबोधित किया। उन्होंने भारत में तेजी से विकसित हो रहे नवाचार इकोसिस्टम और उसमें इन्क्यूबेटर्स की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि इन्क्यूबेशन सेंटर नए उद्यमियों को केवल कार्यालय या बुनियादी सुविधाएं ही उपलब्ध नहीं कराते, बल्कि उन्हें मेंटरशिप, नेटवर्किंग, बिजनेस रणनीति और बाजार से जोड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने उद्यमियों के लिए उपलब्ध सहयोग तंत्र और मजबूत इकोसिस्टम तैयार करने की जरूरत पर भी चर्चा की।
जय हिंद कॉलेज की निदेशक और उद्यमिता शिक्षाविद् डॉ. राखी शर्मा ने डिजाइन थिंकिंग प्रक्रिया पर गतिविधि आधारित सत्र लिया। इसमें प्रतिभागियों को किसी समस्या को उपयोगकर्ता के नजरिए से समझने, उसके विभिन्न पहलुओं की पहचान करने और संभावित समाधान विकसित करने की प्रक्रिया से परिचित कराया गया। सत्र के दौरान प्रतिभागियों ने गतिविधियों में भाग लेकर डिजाइन थिंकिंग की अवधारणा को व्यावहारिक रूप से समझा। विशेषज्ञ ने बताया कि किसी भी सफल नवाचार की शुरुआत सही समस्या की पहचान से होती है। इसके बाद उपयोगकर्ता की जरूरतों को समझते हुए समाधान विकसित करना और उसे लगातार बेहतर बनाना जरूरी है।
प्रथम दिवस के अंतिम सत्र में लीन कैनवास की अवधारणा और उसके व्यावहारिक उपयोग पर चर्चा की गई। प्रतिभागियों को बताया गया कि किसी व्यवसायिक विचार को एक व्यवस्थित प्रारूप में किस तरह प्रस्तुत किया जा सकता है। इसमें समस्या, समाधान, लक्षित ग्राहक वर्ग, प्रमुख संसाधन और मूल्य प्रस्ताव जैसे महत्वपूर्ण घटकों को स्पष्ट रूप से समझने पर जोर दिया गया। लीन कैनवास के माध्यम से प्रतिभागियों ने यह समझने का प्रयास किया कि किसी बिजनेस आइडिया की वास्तविक उपयोगिता और संभावनाओं का आकलन किस तरह किया जा सकता है। इससे उन्हें अपने विचार को अधिक स्पष्ट, केंद्रित और व्यावहारिक बनाने में मदद मिली।
पहले दिन की प्रशिक्षण गतिविधियों के समापन के साथ प्रतिभागियों को नवाचार इकोसिस्टम की व्यापक समझ के अलावा डिजाइन थिंकिंग, वैल्यू प्रपोजिशन और लीन कैनवास जैसे व्यावहारिक टूल्स की जानकारी मिली। कार्यक्रम के अगले दो दिनों में भी प्रशिक्षण को आगे बढ़ाते हुए स्टार्टअप और इन्क्यूबेशन से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञ सत्र आयोजित किए जाएंगे। इनमें बिजनेस मॉडल कैनवास, स्टार्टअप कॉस्टिंग, प्रभावी इन्क्यूबेशन कार्यक्रम की योजना, मेंटरशिप, फंडिंग, प्रस्ताव लेखन, ब्रांडिंग और इकोसिस्टम कनेक्ट जैसे विषय शामिल हैं। इन सत्रों के जरिए प्रतिभागियों को स्टार्टअप की योजना तैयार करने से लेकर उसके लिए आवश्यक संसाधन जुटाने और बाजार से जोड़ने तक की प्रक्रिया को समझने का अवसर मिलेगा।
तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का व्यापक उद्देश्य ऐसे इनोवेशन प्रोफेशनल्स को तैयार करना है, जो संस्थानों में नवाचार और उद्यमिता की संस्कृति को मजबूत करने में प्रभावी भूमिका निभा सकें। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि मजबूत स्टार्टअप इकोसिस्टम केवल नए उद्यम शुरू करने से नहीं बनता, बल्कि इसके लिए संस्थानों, इन्क्यूबेटर्स, मेंटर्स, निवेशकों, सरकारी एजेंसियों और उद्यमियों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है।