Monsoon Session: उत्तर प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र कल से शुरू होगा और उससे पहले आज लखनऊ में सर्वदलीय बैठक बुलाई गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, विपक्ष के नेता और सभी प्रमुख दलों के प्रतिनिधि इसमें शामिल होंगे। बैठक में सत्र की कार्यवाही और संभावित एजेंडे पर चर्चा की जाएगी।
UP Assembly Monsoon Session 2025 : उत्तर प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र कल से शुरू होने जा रहा है, और उससे पहले आज एक महत्वपूर्ण सर्वदलीय बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं मौजूद रहेंगे और सभी प्रमुख दलों के नेता भी हिस्सा लेंगे। बैठक का उद्देश्य सत्र की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाने के लिए सभी दलों के बीच आपसी समन्वय और संवाद स्थापित करना है। इसके साथ ही आज कार्यमंत्रणा समिति (Business Advisory Committee) की बैठक भी होगी, जिसमें सत्र के दौरान लिए जाने वाले विषयों और एजेंडे पर चर्चा होगी।
सर्वदलीय बैठक का आयोजन प्रत्येक सत्र से पहले एक परंपरा के रूप में किया जाता है, लेकिन इस बार इसका महत्व और भी बढ़ गया है। मानसून सत्र के दौरान कई महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए जाने की संभावना है, साथ ही विपक्ष सरकार को कानून-व्यवस्था, बेरोजगारी, किसानों की समस्याओं, महंगाई और हालिया प्राकृतिक आपदाओं जैसे मुद्दों पर घेरने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री योगी इस बैठक में सभी दलों से अपील करेंगे कि सत्र में रचनात्मक बहस हो, ताकि जनता के हित से जुड़े मुद्दों पर ठोस निर्णय लिए जा सकें।
कार्यमंत्रणा समिति की बैठक में यह भी तय किया जाएगा कि किन दिनों पर किन विषयों पर चर्चा होगी और कितने घंटे के लिए सदन की कार्यवाही चलेगी।
विपक्ष इस सत्र में कई मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है।
योगी सरकार इस सत्र को विकासपरक संदेश देने के अवसर के रूप में देख रही है। सरकार का फोकस इस बात पर होगा कि पिछले कुछ महीनों में लागू की गई योजनाओं और परियोजनाओं की जानकारी सदन में दी जाए। इसके अलावा, सरकार कुछ नए विधेयक लाने की भी तैयारी में है, जिनमें डिजिटल सेवाओं के विस्तार,महिला सुरक्षा से जुड़ी नीतियां और उद्योग निवेश बढ़ाने के लिए नए प्रावधान शामिल हो सकते हैं।
पिछले कुछ सत्रों में कई बार सदन की कार्यवाही विपक्ष और सत्ता पक्ष के टकराव के कारण बाधित हुई थी। इस बार सर्वदलीय बैठक का मकसद इस तरह की स्थितियों को टालना है। मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष दोनों ही चाहते हैं कि सत्र में अधिकतम समय बहस और विधायी कार्यों में लगाया जाए, न कि नारेबाजी और हंगामे में।
चूंकि मानसून सत्र आमतौर पर महत्वपूर्ण विधायी कार्यों और सरकार की नीतियों की दिशा तय करने में अहम होता है, जनता और मीडिया दोनों की नजर इस पर टिकी रहती है। राज्य के अलग-अलग हिस्सों से लोग उम्मीद करते हैं कि उनके मुद्दे सदन में उठेंगे और समाधान की दिशा में ठोस कदम उठेंगे।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस सत्र में सत्तारूढ़ दल और विपक्ष दोनों के लिए छवि बनाने का अवसर होगा। एक ओर सरकार को अपनी उपलब्धियां गिनाने का मौका मिलेगा, वहीं विपक्ष को जनता के मुद्दों को जोरदार तरीके से उठाने का मंच मिलेगा। वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक डॉ. अनिल श्रीवास्तव के अनुसार, "सर्वदलीय बैठक का असली मकसद संवाद और सहयोग का माहौल बनाना है, लेकिन राजनीतिक परिस्थितियों के चलते अक्सर यह एक औपचारिकता बनकर रह जाती है।"