
UP Politics:भाजपा पिछड़ा वर्ग मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद अमरपाल मौर्य ने समाजवादी पार्टी और उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर परिवारवाद को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय के नाम पर अब केवल परिवार को आगे बढ़ाने की राजनीति नहीं चल सकती। यादव समाज और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लोग जानना चाहते हैं कि दशकों तक समाजवादी पार्टी के लिए काम करने वाले कार्यकर्ताओं को नेतृत्व में कितना अवसर मिला। मौर्य ने बताया कि अखिलेश यादव के नाम एक खुला पत्र तैयार किया गया है, जिसे उनके माध्यम से सपा अध्यक्ष तक पहुंचाया जाएगा।
अमरपाल मौर्य ने बताया कि पार्टी प्रवास के दौरान नई कमेटी के साथ पहली बैठक हुई। इसमें आने वाले समय में ओबीसी मोर्चा की भूमिका और संगठन की गतिविधियों पर चर्चा की गई। उन्होंने कहा कि मोर्चा का उद्देश्य समाज के बीच पहुंचकर केंद्र और प्रदेश सरकार की योजनाओं की जानकारी घर-घर तक पहुंचाना है। संगठन इस दिशा में सक्रियता से काम करेगा, ताकि पिछड़े वर्ग के लोगों को सरकारी योजनाओं और उनके लाभों के बारे में जागरूक किया जा सके। मौर्य ने कहा कि ओबीसी मोर्चा राजनीतिक भागीदारी के साथ सामाजिक स्तर पर भी अपनी भूमिका निभाना चाहता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बैठक का मुख्य उद्देश्य संगठन की आगामी रणनीति पर चर्चा करना था।
भाजपा नेता ने समाजवादी पार्टी की राजनीतिक स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी में नेतृत्व और अवसरों के वितरण को लेकर सवाल उठने चाहिए। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव को उन कार्यकर्ताओं को याद करना चाहिए, जिन्होंने दशकों तक समाजवादी पार्टी के लिए मेहनत की और संगठन को मजबूत बनाने में योगदान दिया। मौर्य ने सवाल किया कि ऐसे कार्यकर्ताओं के कितने बेटे सांसद या विधायक बने और पार्टी में उन्हें कितना प्रतिनिधित्व मिला। उनके मुताबिक, जब परिवार के सदस्यों को विधायक बनाने या राज्यसभा और लोकसभा भेजने की बात आई, तो सपा नेतृत्व की प्राथमिकता परिवार रहा। उन्होंने इन सवालों को यादव समाज और व्यापक ओबीसी समाज से जुड़ा मुद्दा बताया।
अमरपाल मौर्य ने अपने बयान में शिवपाल सिंह यादव के बेटे आदित्य यादव, अखिलेश यादव की पत्नी और सांसद डिंपल यादव, प्रोफेसर रामगोपाल यादव, धर्मेंद्र यादव और तेज प्रताप यादव का उल्लेख किया। उन्होंने सवाल किया कि क्या प्रदेश में यादव समाज के हर घर को नेतृत्व का अवसर मिला है या राजनीतिक प्रतिनिधित्व कुछ परिवारों तक ही सीमित रहा। भाजपा नेता ने कहा कि सामाजिक न्याय की बात करने वाली राजनीति में अवसरों का वितरण व्यापक होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यादव समाज और ओबीसी समाज इन सवालों का जवाब सुनना चाहता है। यदि जवाब नहीं मिलता, तो लोकतंत्र में जनता अपने तरीके से प्रतिक्रिया देती है।
अपने संबोधन में मौर्य ने भाजपा सरकार के फैसलों का उल्लेख करते हुए तीन तलाक की प्रथा से जुड़े कानून और जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार अपने वादों को पूरा करने के लिए काम करती है और कथनी-करनी में अंतर नहीं रखती। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए वोट चोरी के आरोपों का भी उल्लेख किया और कांग्रेस पर इस तरह की राजनीति की शुरुआत करने का आरोप लगाया। ये आरोप उन्होंने राजनीतिक बयान के तौर पर रखे।
अमरपाल मौर्य के बयान से स्पष्ट है कि भाजपा पिछड़ा वर्ग मोर्चा संगठन विस्तार के साथ सरकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार पर भी ध्यान देने की तैयारी में है। वहीं, समाजवादी पार्टी में परिवारवाद और पिछड़े वर्गों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व का मुद्दा उठाकर भाजपा नेता ने विपक्ष को घेरने की कोशिश की है। फिलहाल, अखिलेश यादव को लिखे गए खुले पत्र में उठाए गए सवालों पर समाजवादी पार्टी की प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है। इस मुद्दे पर आगे की राजनीतिक प्रतिक्रिया से प्रदेश की सियासत में पिछड़े वर्गों के प्रतिनिधित्व और परिवारवाद को लेकर बहस तेज होने की संभावना है।