
SIR प्रक्रिया को लेकर भाजपा पर साधा निशाना, बोले-403 सीटों पर नहीं चलने देंगे चार सौ बीसी (फोटो सोर्स : Ritesh Singh )
Akhilesh Yadav statement 403 assembly seats: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आगामी चुनावों को लेकर बड़ा राजनीतिक दावा करते हुए कहा कि चुनाव आएगा तो सरकार समाजवादियों की बनने जा रही है और PDA पूरी तरह जागरूक है। उन्होंने कहा कि जो भी पीड़ित है, वह समाजवादी विचारधारा और PDA से जुड़ा हुआ है। अखिलेश यादव ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया को लेकर भी भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया को नए सिरे से शुरू कर दिया गया, जबकि लोगों को इसकी जानकारी तक नहीं हुई।
अखिलेश यादव ने अपने बयान में PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग की राजनीतिक भागीदारी का मुद्दा उठाया। उन्होंने दावा किया कि इन वर्गों में राजनीतिक जागरूकता बढ़ रही है और समाजवादी पार्टी को उनका समर्थन मिल रहा है। उन्होंने कहा कि जो लोग पीड़ित हैं, वे समाजवादी विचारधारा और PDA के साथ खड़े हैं। उनके इस बयान को आगामी चुनावों के मद्देनजर पार्टी के सामाजिक समीकरण और जनसमर्थन से जोड़कर देखा जा रहा है।
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि पहले हुई SIR प्रक्रिया को शून्य कर दिया गया और फिर नई प्रक्रिया शुरू कर दी गई। उन्होंने कहा, “जो SIR एक्सरसाइज हुई उसे जीरो कर दिया और नया SIR शुरू कर दिया, आपको पता ही नहीं चला।” उन्होंने इस मुद्दे पर भाजपा की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनकी पार्टी चुनावी प्रक्रिया में किसी तरह की गड़बड़ी नहीं होने देगी। हालांकि, SIR प्रक्रिया को लेकर लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
अखिलेश यादव ने अपने बयान में उत्तर प्रदेश विधानसभा की सभी 403 सीटों का उल्लेख करते हुए भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “भारतीय जनता पार्टी की चार सौ बीसी नहीं चलने देंगे 403 पर।” उनके इस बयान को आगामी विधानसभा चुनावों के संदर्भ में भाजपा के खिलाफ राजनीतिक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। सपा अध्यक्ष ने PDA की जागरूकता और मतदाताओं की भागीदारी पर जोर देते हुए अपनी पार्टी की चुनावी संभावनाओं को लेकर विश्वास जताया।
अखिलेश यादव के बयान से उत्तर प्रदेश की राजनीति में मतदाता सूची के पुनरीक्षण, सामाजिक प्रतिनिधित्व और चुनावी पारदर्शिता जैसे मुद्दे फिर चर्चा में आ गए हैं। एक ओर समाजवादी पार्टी PDA के जरिए पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों को जोड़ने पर जोर दे रही है, वहीं SIR को लेकर उठाए गए सवाल चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर राजनीतिक बहस को आगे बढ़ा सकते हैं। आगामी चुनावों में इन मुद्दों का कितना असर पड़ेगा, यह मतदाताओं की प्रतिक्रिया और राजनीतिक दलों के अभियान पर निर्भर करेगा।
Updated on:
12 Oct 2026 01:06 pm
Published on:
12 Oct 2026 01:06 pm
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