Use of RTI:सूचना का अधिकार अधिनियम-2005 (आरटीआई) के जरिए मांगी जा रही अटपटी जानकारियों से अफसर ही नहीं, सरकारी अस्पतालों के डॉक्टर भी हैरान हैं। अस्पतालों में आरटीआई लगाकर लोग ऐसी-ऐसी जानकारियों के लिए आवेदन कर रहे हैं, जिससे आप भी हैरान रह जाएंगे। आगे पढ़ें कि लोग अस्पताल से किस प्रकार की अटपटी सूचनाएं आरटीआई के जरिए मांग रहे हैं…
Use of RTI:आरटीआई के जरिए मांगी गई सूचनाओं के जवाब देने में अफसरों के पसीने छूट रहे हैं। उत्तराखंड के दून अस्पताल में आरटीआई के जरिए ऐसी सूचनाएं मांगी जा रही हैं, जिससे डॉक्टर भी हैरान हैं। इस अस्पताल से आरटीआई में कोई अपना इलाज जानना चाह रहा है तो कोई दूसरे मरीज की मेडिकल हिस्ट्री। कोई दवाई के बारे में पूछ रहा है तो कोई डॉक्टरी इलाज को लेकर जानना चाहता है। एक व्यक्ति ने आरटीआई लगाकर पूछ लिया कि पैरों में आई मोच की सूजन कितने दिनों में ठीक होती है। आरटीआई में मांगी जा रही अटपटी सूचनाओं से अफसर हैरान हैं। दून अस्पताल के एमएस डॉ. अनुराग अग्रवाल के मुताबिक हर रोज औसतन दस आरटीआई आ रही हैं। इनमें से चालीस फीसदी तक आरटीआई दूसरे लोगों के इलाज से जुड़ी होती हैं। कोर्ट केस, इंश्योरेंस, सड़क हादसे, आपसी विवादों के चलते इस तरह की आरटीआई मांगी जा रही है। कहा कि थर्ड पार्टी की सूचना नहीं दी जाती।
दून अस्पताल में आरटीआई को लेकर तमाम अटपटे मामले सामने आ रहे हैं। एक व्यक्ति ने आरटीआई में अपने जानकार एक व्यक्ति की पत्नी के उपचार की ही मेडिकल हिस्ट्री मांग ली। लेकिन, अस्पताल की ओर से यह कहकर इनकार कर दिया गया कि किसी थर्ड पार्टी की सूचना नहीं दी जा सकती है। एक अन्य व्यक्ति ने एक युवती के सड़क हादसे में उपचार की डिटेल मांगी है।
आरटीआई के जरिए एक व्यक्ति ने पूछा कि अस्पताल में डॉक्टर मरीज को कितने दिन की दवा लिख सकते हैं? अस्पताल में जांच-पड़ताल की गई तो ऐसा कोई जीओ नहीं मिला। अस्पताल से कहा गया कि मरीज की बीमारी के हिसाब से दवाएं दी जाती हैं। लंबी बीमारी और दूर क्षेत्र से आने वाले मरीज को ज्यादा दिन की दवाएं दी जा सकती हैं।