लखनऊ

यूपी चुनाव 2027: रामदास आठवले का ’25 सीटों’ वाला दांव, बोले- भाजपा से नहीं बनी बात तो अकेले लड़ेंगे चुनाव

RPI Uttar Pradesh: रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आरपीआई) ने यूपी विधानसभा चुनाव 2027 के लिए अपनी रणनीति साफ कर दी है। पार्टी ने भाजपा से 25 सीटों की मांग की है और मांग पूरी न होने पर अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान किया है।

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Apr 25, 2026
यूपी चुनाव 2027..

UP Assembly Election 2027: रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आरपीआई) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने भाजपा से 25 सीटों की मांग रखते हुए कहा कि पार्टी गठबंधन के तहत चुनाव लड़ना चाहती है, लेकिन यदि यह मांग पूरी नहीं होती है तो आरपीआई प्रदेश में अकेले ही चुनावी मैदान में उतरने के लिए तैयार है।

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आधिकारिक प्रेस नोट जारी

रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आरपीआई) की उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष पवन कुमार गुप्ता ने शनिवार को एक आधिकारिक प्रेस नोट जारी किया। इसमें उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 के लिए पार्टी की रणनीति और संगठन विस्तार की घोषणा की गई।

चुनावी रणनीति और सीटों की मांग

प्रेस नोट के अनुसार, रामदास आठवले ने कहा है कि उनकी पार्टी उत्तर प्रदेश में ब्लॉक स्तर पर मजबूत संगठन तैयार कर रही है, ताकि आगामी विधानसभा 2027 के चुनाव में वह जनता की आवाज को मजबूती से उठा सके। रामदास आठवले ने कहा कि केंद्र की एनडीए सरकार में वह एक महत्वपूर्ण घटक दल है। उत्तर प्रदेश में भी वह भाजपा की सहयोगी पार्टी के रूप में 25 सीटों पर मिलकर चुनाव लड़ेंगे। अगर यह मांग पूरी नहीं होती है तो पार्टी अकेले विधानसभा चुनाव लड़ेगी।

वंचित वर्गों की आवाज बनने का दावा

आठवले ने यह भी कहा कि आरपीआई उत्तर प्रदेश में अति दलित, अति पिछड़े, दबे-कुचले और वंचित तबके की आवाज है। इस तबके के वोट लेकर कुछ दलों ने अपना विकास किया है और इस वर्ग को कुछ भी नहीं दिया।

मुख्यमंत्री से प्रमुख मांग

उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग की कि समाज कल्याण विभाग की ओर से दलित बाहुल्य गांवों में समाज भवन का निर्माण कराया जाए और उसके संचालन की जिम्मेदारी इसी समाज के लोगों को दी जाए।

महिला आरक्षण पर विपक्ष पर आरोप

वहीं, रामदास आठवले ने महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक के पारित न होने पर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी को जिम्मेदार ठहराया। प्रेस नोट के अनुसार, उन्होंने कहा कि ये दोनों दल महिला विरोधी हैं और विधेयक का विरोध करके महिलाओं के विकास में बाधा डालने का कार्य कर रहे हैं।

राजनीतिक समीकरणों पर असर

आरपीआई का यह रुख आगामी चुनावों में भाजपा के साथ गठबंधन की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है। यदि सीटों को लेकर सहमति नहीं बनती है, तो उत्तर प्रदेश में चुनावी मुकाबला और अधिक दिलचस्प और बहुकोणीय हो सकता है।

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