
Azam Khan FIR: सपा नेता आजम खां की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। राज्य हज समिति की जमीन बेचने में गड़बड़ी के आरोप में विजिलेंस ने आजम खां समेत पांच लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। जांच में सामने आया है कि लखनऊ के ऐशबाग क्षेत्र में स्थित हज समिति की करीब 60 हजार वर्गफीट जमीन की बिक्री में नियमों का पालन नहीं किया गया। विजिलेंस के मुताबिक, इस बिक्री से समिति को 2.08 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ। मामले में आमिश डेवलपर्स को भी आरोपी बनाया गया है।
आजम खां उस समय राज्य हज समिति के अध्यक्ष थे। मामले में तत्कालीन सचिवों लईक अहमद और डॉ. एमएए खान के अलावा आमिश डेवलपर्स के प्रोपराइटर मो. अयूब और मुस्तकीम अहमद को भी आरोपी बनाया गया है। विजिलेंस के लखनऊ सेक्टर में इंस्पेक्टर ध्रुव चंद्र मौर्य की तहरीर पर FIR दर्ज की गई है। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, ऐशबाग क्षेत्र के कायमखेड़ा (दुगांवा) में हज समिति की करीब 60 हजार वर्गफीट जमीन थी।
विजिलेंस को शिकायत मिली थी कि जमीन की बिक्री में आजम और अन्य आरोपियों ने निजी फर्म को फायदा पहुंचाने के लिए अपने पद का दुरुपयोग किया। शिकायत में जमीन बेचते समय नियमों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया गया था। राज्य सरकार ने 3 मई 2024 को इस मामले की जांच के आदेश दिए थे। जांच के दौरान सामने आया कि आमिश डेवलपर्स को फायदा पहुंचाने के लिए जमीन की बिक्री में नियमों का पालन नहीं किया गया। जांच पूरी होने के बाद विजिलेंस ने धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत केस दर्ज किया है। मामले की विवेचना इंस्पेक्टर संजय कुमार सिंह को सौंपी गई है।
दूसरी ओर, आजम खां के करीबी माने जाने वाले रामपुर के बिल्डर और ठेकेदार सैयद खालिद से प्रवर्तन निदेशालय पूछताछ करने जा रहा है। ईडी उन्हें समन भेजकर लखनऊ स्थित जोनल कार्यालय में तलब करेगा। सैयद खालिद जौहर एसोसिएट फर्म से जुड़े बताए जाते हैं और दिल्ली समेत कई शहरों में रिहायशी प्रोजेक्ट के निर्माण का काम करते हैं। इसके अलावा आधा दर्जन से अधिक बिल्डर भी ईडी की जांच के दायरे में आ चुके हैं।
ईडी ने बीते महीने जौहर ट्रस्ट से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी की थी। इस दौरान कई बिल्डरों और ठेकेदारों द्वारा ट्रस्ट को चंदा देने के सुराग मिलने की बात सामने आई थी। इनमें रामपुर और दिल्ली के लोग भी शामिल हैं, जिन्हें आजम खां के करीबियों में माना जाता था। जांच में सामने आया कि दिल्ली, लखनऊ, नोएडा, रामपुर, मुरादाबाद, सहारनपुर, मेरठ और बरेली के कई ठेकेदारों, कारोबारियों और शैक्षणिक संस्थानों ने जौहर ट्रस्ट को चंदा दिया था। इनमें से कुछ लोगों से ईडी ने दो साल पहले पूछताछ की थी।
उन्होंने कबूल किया था कि चंदे की रकम का चेक देने के बदले उन्हें नगदी दी गई थी। जांच में करीब 60 करोड़ रुपये की राशि चंदे के तौर पर मिलने और कुछ शेल कंपनियों के इस्तेमाल के सुराग मिलने के बाद मामले की दोबारा जांच की जा रही है।