
आकाश आनंद की वापसी पर मायावती की शर्त (photo- x @jitu_rajoriya)
Akash Anand Political Career:बहुजन समाज पार्टी में आकाश आनंद की सियासी पारी एक बार फिर मायावती के फैसले पर टिकी नजर आ रही है। इस बार मामला सिर्फ आकाश की भूमिका का नहीं, बल्कि उनके ससुर और पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ के राजनीतिक भविष्य से भी जुड़ गया है। मायावती ने संकेत दिया है कि अगर अशोक सिद्धार्थ पूरी तरह सक्रिय राजनीति से संन्यास लेते हैं, तभी आकाश आनंद को पार्टी में पहले जैसी जिम्मेदारी देने पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जा सकता है।
मायावती के इस रुख ने BSP के भीतर चल रही खींचतान को एक नया मोड़ दे दिया है। कुछ ही दिन पहले उन्होंने आकाश आनंद को पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक पद से हटाते हुए कहा था कि फिलहाल उन्हें बड़ी संगठनात्मक जिम्मेदारी देना उचित नहीं होगा। अब उनके राजनीतिक भविष्य को सीधे अशोक सिद्धार्थ के फैसले से जोड़ दिया गया है।
पार्टी से जुड़े सूत्रों के मुताबिक अशोक सिद्धार्थ और BSP नेतृत्व के बीच मतभेद पिछले साल दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान गहराए। उस समय दक्षिण भारत और केरल समेत कुछ राज्यों की जिम्मेदारी संभाल रहे अशोक पर आरोप लगा कि उन्होंने पार्टी नेतृत्व की मंजूरी के बिना दिल्ली में टिकट वितरण और चुनावी फैसलों में दखल देने की कोशिश की। इसी के बाद पार्टी नेतृत्व की नाराजगी बढ़ने की बात सामने आई। हालांकि, चुनावी फैसलों में उनके हस्तक्षेप और संगठन के भीतर उनके प्रभाव से जुड़ी बातें पार्टी सूत्रों के हवाले से हैं।
अशोक सिद्धार्थ लंबे समय तक मायावती के करीबी नेताओं में गिने जाते रहे। बाद में उनकी बेटी की शादी आकाश आनंद से हुई। इसके बाद पार्टी के भीतर उनके प्रभाव को लेकर चर्चाएं तेज हुईं। मायावती ने अब अपने बयान में आरोप लगाया है कि अशोक ने पार्टी के मिशन से ज्यादा निजी और पारिवारिक हितों को महत्व दिया। मायावती का कहना है कि पार्टी ने अशोक को अपनी कार्यशैली सुधारने के कई मौके दिए, लेकिन उनके फैसलों का असर अंततः आकाश आनंद के राजनीतिक सफर पर भी पड़ा।
मायावती के ताजा बयान ने अशोक सिद्धार्थ के सामने साफ तौर पर एक राजनीतिक विकल्प रख दिया है। यदि वह सक्रिय राजनीति से पूरी तरह अलग होते हैं तो आकाश आनंद की पार्टी में भूमिका बहाल करने का रास्ता खुल सकता है। यानी फिलहाल आकाश की सियासी वापसी का अगला कदम अशोक सिद्धार्थ के फैसले से जुड़ गया है। दिलचस्प बात यह है कि अशोक सिद्धार्थ ने मायावती के बयान के बाद अपने संदेश में उनके आदेश को सर्वोपरि बताते हुए बेहद भावुक प्रतिक्रिया दी है। इससे उनके जल्द कोई बड़ा फैसला लेने की अटकलें भी तेज हुई हैं।
इस पूरे घटनाक्रम का असर BSP के चुनावी कार्यक्रमों में भी दिखाई देने की चर्चा है। 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच आकाश आनंद की संगठनात्मक भूमिका को लेकर लगातार बदलाव सामने आ रहे हैं। पार्टी के भीतर अब उनके छोटे भाई ईशान आनंद को भी प्रमुखता मिल रही है। कभी मायावती के बाद BSP के सबसे प्रमुख युवा चेहरों में गिने जाने वाले आकाश के राजनीतिक सफर में यह एक और बड़ा मोड़ है। पहले उन्हें बड़ी जिम्मेदारी मिली, फिर हटाया गया और अब वापसी की संभावना के साथ एक नई शर्त सामने आ गई है।
मायावती ने अपने बयान में यूपी, उत्तराखंड और पंजाब के आगामी विधानसभा चुनावों को BSP और बहुजन आंदोलन के लिए बेहद अहम बताया है। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से व्यक्तिगत या पारिवारिक हितों से ऊपर संगठन और आंदोलन को रखने की अपील की है। यानी 2027 के चुनावी मैदान से पहले BSP में सिर्फ नेतृत्व का चेहरा नहीं बदल रहा, बल्कि पार्टी के भीतर परिवार, संगठन और राजनीतिक महत्वाकांक्षा के बीच संतुलन का सवाल भी बड़ा होता जा रहा है।
Updated on:
10 Sep 2026, 9:09 AM IST
Published on:
10 Sep 2026, 9:05 AM IST
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