
आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ (photo- fb @AshokSiddharthMP)
Akash Anand BSP:बहुजन समाज पार्टी (BSP) में आकाश आनंद की राजनीतिक भूमिका को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने साफ किया है कि आकाश आनंद को पार्टी में जिम्मेदारी देने का रास्ता तभी खुलेगा, जब उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ राजनीति से संन्यास ले लें। यानी आकाश आनंद का सियासी भविष्य फिलहाल सीधे तौर पर अशोक सिद्धार्थ के राजनीतिक सफर से जुड़ गया है। लेकिन सवाल है कि अशोक सिद्धार्थ कौन हैं और मायावती के इस फैसले में उनकी भूमिका इतनी अहम क्यों है?
अशोक सिद्धार्थ BSP के पुराने और प्रभावशाली नेताओं में रहे हैं। वह राज्यसभा के पूर्व सांसद भी रह चुके हैं। पार्टी संगठन में उनकी भूमिका लंबे समय तक महत्वपूर्ण रही और वह मायावती के भरोसेमंद नेताओं में गिने जाते थे। अशोक सिद्धार्थ का नाम इसलिए भी चर्चा में रहा क्योंकि वह आकाश आनंद के ससुर हैं। आकाश आनंद मायावती के भतीजे हैं और लंबे समय तक उन्हें BSP के भविष्य के युवा चेहरे के तौर पर आगे बढ़ाया गया था। ऐसे में पार्टी के भीतर आकाश और उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ की राजनीतिक सक्रियता को लेकर सवाल भी उठते रहे हैं।
आकाश आनंद को मायावती ने 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले बड़ी जिम्मेदारियां दी थीं और उन्हें पार्टी के भविष्य के नेतृत्व के तौर पर भी प्रोजेक्ट किया गया था। लेकिन इसके बाद पार्टी में उनके राजनीतिक सफर में कई उतार-चढ़ाव आए। मायावती ने पहले आकाश को बड़ी जिम्मेदारियों से हटाया और बाद में उन्हें पार्टी से भी बाहर किया गया। इसके बाद उनकी वापसी हुई। इस पूरे घटनाक्रम में अशोक सिद्धार्थ की भूमिका और पारिवारिक प्रभाव को लेकर भी चर्चा होती रही।
अब मायावती ने आकाश आनंद को लेकर एक बार फिर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। उनका कहना है कि BSP में केवल पारिवारिक रिश्ते के आधार पर किसी को पद नहीं दिया जाएगा। आकाश को पार्टी में जिम्मेदारी मिल सकती है, लेकिन इसके लिए अशोक सिद्धार्थ को सक्रिय राजनीति से हटना होगा। यानी मायावती का संदेश साफ है, परिवार के दो सदस्यों को एक साथ पार्टी में अहम राजनीतिक भूमिका नहीं दी जाएगी।
अशोक सिद्धार्थ और मायावती के बीच राजनीतिक समीकरण हमेशा एक जैसे नहीं रहे। 2026 में उन्हें BSP से बाहर भी किया गया था। इससे पहले भी पार्टी के अंदर उनकी भूमिका को लेकर विवाद सामने आते रहे हैं। यही वजह है कि अब मायावती का यह बयान सिर्फ आकाश आनंद की वापसी से जुड़ा फैसला नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे BSP में परिवार, संगठन और नेतृत्व की भूमिका को लेकर एक बड़े संदेश के तौर पर भी देखा जा रहा है।
फिलहाल मायावती के बयान के बाद BSP की सियासत में सबसे ज्यादा चर्चा अशोक सिद्धार्थ के अगले कदम को लेकर है। अगर वह सक्रिय राजनीति से संन्यास लेते हैं, तो आकाश आनंद के लिए पार्टी में दोबारा बड़ी जिम्मेदारी का रास्ता खुल सकता है। हालांकि, मायावती पहले ही आकाश को लेकर परिपक्वता की कमी का हवाला दे चुकी हैं और फिलहाल उन्हें बड़ी जिम्मेदारी देने से इनकार किया था। इस बीच मायावती ने आकाश के छोटे भाई ईशान आनंद को संगठन में अहम जिम्मेदारी दी है, जिससे BSP में परिवार की अगली पीढ़ी की भूमिका को लेकर भी नई चर्चा शुरू हो गई है।
Updated on:
09 Sept 2026 04:54 pm
Published on:
09 Sept 2026 04:54 pm
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