अखिलेश यादव के तंज पर भाजपा ने पलटवार करते हुए कहा कि राजनीति तंज से नहीं, काम से चलती है। प्रवक्ता ने योगी सरकार के विकास और कानून व्यवस्था का बचाव किया।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी का दौर एक बार फिर तेज हो गया है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर किए गए तंज के बाद भारतीय जनता पार्टी ने कड़ा पलटवार किया है। भाजपा के प्रवक्ता आलोक अवस्थी ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राजनीति केवल तंज कसने से नहीं चलती, बल्कि ठोस काम और जनसेवा से चलती है।
भाजपा प्रवक्ता आलोक अवस्थी ने अपने बयान में कहा कि अखिलेश यादव को यह तय करना होगा कि वे राजनीति को केवल तंज और व्यंग्य तक सीमित रखना चाहते हैं या फिर जनता के मुद्दों पर गंभीरता से चर्चा करेंगे। उन्होंने कहा, “क्या आपका राजनीतिक जीवन सिर्फ तंज पर ही आधारित रहेगा या आप कभी गंभीर मुद्दों पर भी बात करेंगे?”
अवस्थी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में हुए विकास कार्यों और कानून-व्यवस्था में सुधार का उल्लेख करते हुए कहा कि जनता ने उन्हें उनके काम के आधार पर चुना है। उन्होंने कहा कि चाहे “काला चश्मा” हो या बिना चश्मे के, जनता ने योगी सरकार को विकास, सुशासन और बेहतर कानून-व्यवस्था के कारण समर्थन दिया है।
भाजपा प्रवक्ता ने 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों का जिक्र करते हुए कहा कि जनता ने स्पष्ट रूप से विकास के पक्ष में अपना मत दिया था। उन्होंने कहा, “जनता ने मजाक या तंज देखकर नहीं, बल्कि काम देखकर आशीर्वाद दिया है।”
आलोक अवस्थी ने सपा सरकार के कार्यकाल पर भी सवाल उठाए। उन्होंने अखिलेश यादव से पूछा कि उनके शासन की पहचान क्या रही। गुंडाराज,दंगाराज या परिवारवाद। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा शासनकाल में कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब थी और प्रदेश दंगों की घटनाओं से प्रभावित रहता था।
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने दंगों की राजनीति से बाहर निकलकर विकास के रास्ते पर कदम बढ़ाया है। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान सरकार ने कानून-व्यवस्था को मजबूत किया है और निवेश, बुनियादी ढांचे और रोजगार के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है।
अपने बयान के अंत में आलोक अवस्थी ने अखिलेश यादव को सलाह देते हुए कहा कि उन्हें तंज कसने के बजाय सकारात्मक कार्यों पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा, “अखिलेश जी तंज नहीं, सुकर्म करिए। जनता अब काम की राजनीति को प्राथमिकता देती है।”
उत्तर प्रदेश की राजनीति में इस तरह की बयानबाजी नई नहीं है, लेकिन आगामी चुनावी माहौल को देखते हुए नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज होता जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के बयान जनता के बीच अपनी-अपनी छवि मजबूत करने की कोशिश का हिस्सा होते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि जहां एक ओर राजनीतिक दल एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं, वहीं जनता महंगाई, रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर ठोस समाधान चाहती है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि राजनीतिक दल इन मुद्दों पर कितना ध्यान देते हैं।