
BJP Uttar Pradesh Rajya Sabha Candidates List:उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के चुनाव के लिए भाजपा ने प्रत्याशियों के नामों पर मंथन तेज कर दिया है। प्रदेश संगठन की ओर से केंद्रीय नेतृत्व को करीब 25 नामों का पैनल भेजा गया है। इनमें केंद्रीय मंत्री, पूर्व मंत्री, पूर्व सांसद, संगठन के पदाधिकारी और अलग-अलग सामाजिक व क्षेत्रीय आधार वाले नेता शामिल हैं। अंतिम आठ नाम केंद्रीय नेतृत्व तय करेगा।
भाजपा के सामने इस बार सात मौजूदा राज्यसभा सीटों को बचाए रखने के साथ आठवीं सीट के लिए अतिरिक्त समर्थन जुटाने का सवाल है। लेकिन प्रत्याशी चयन का राजनीतिक दायरा इससे बड़ा है। आगामी विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी को राज्यसभा के जरिए पुराने चेहरों को राजनीतिक भूमिका में बनाए रखने, संगठन के नेताओं को संसद में जगह देने और जातीय-क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व संतुलित करने का मौका मिलेगा।
पैनल में पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव हरीश द्विवेदी के नाम प्रमुखता से बताए गए हैं। ईरानी अमेठी से लोकसभा चुनाव हारने के बाद संगठन में सक्रिय हैं। द्विवेदी बस्ती से लोकसभा चुनाव हारने के बाद भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव बनाए गए और संगठनात्मक जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
राज्यसभा के जरिए दोनों को संसद में वापस लाने की स्थिति में भाजपा के पास चुनावी हार के बाद भी इन नेताओं को राष्ट्रीय राजनीतिक भूमिका में बनाए रखने का विकल्प होगा।
केंद्रीय मंत्री बीएल वर्मा और पूर्व एटा सांसद राजवीर सिंह के नाम भी पैनल में हैं। दोनों लोधी समाज से आते हैं। राजवीर सिंह पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के पुत्र हैं और एटा से लोकसभा चुनाव हार गए थे।
दोनों नामों में से किसे अंतिम सूची में जगह मिलती है, यह पार्टी के लिए सामाजिक प्रतिनिधित्व के साथ राजनीतिक निरंतरता का सवाल भी होगा।
पैनल में पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान और पूर्व सांसद सत्यपाल सिंह के नाम भी हैं। दोनों पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति से जुड़े जाट चेहरे हैं। राज्यसभा में इनमें से किसी को जगह मिलने पर पश्चिमी यूपी के जाट प्रतिनिधित्व का पक्ष मजबूत होगा।
पिछले विधानसभा चुनाव के लिहाज से पश्चिमी यूपी भाजपा के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र है। इसलिए राज्यसभा के लिए संभावित नामों में इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व भी चर्चा में है।
पूर्व डीजीपी और मौजूदा राज्यसभा सदस्य बृजलाल का नाम भी पैनल में बताया गया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर का नाम भी संभावित दावेदारों में है। कौशल किशोर मोहनलालगंज से लोकसभा सांसद रह चुके हैं और दलित समाज से आते हैं।
दोनों नामों के जरिए भाजपा के संभावित पैनल में दलित प्रतिनिधित्व का पक्ष सामने आता है।
मौजूदा राज्यसभा सदस्य गीता शाक्य का नाम भी संभावित सूची में है। उनके साथ महिला और ओबीसी प्रतिनिधित्व का पक्ष जुड़ा है। पैनल में रेखा वर्मा और प्रियंका रावत जैसे महिला चेहरों के नाम भी बताए गए हैं।
अंतिम आठ नामों में महिला प्रतिनिधित्व को कितनी जगह मिलती है, यह भी आगामी विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा की सामाजिक प्रतिनिधित्व नीति का हिस्सा होगा।
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का नाम भी पैनल में है। उनका राज्यसभा कार्यकाल समाप्त हो रहा है। पैनल में उनके नाम के साथ केंद्रीय मंत्री के रूप में निरंतरता और सिख प्रतिनिधित्व का पहलू भी जुड़ा है।
भाजपा के संभावित नामों में कवि और पूर्व आम आदमी पार्टी नेता कुमार विश्वास का नाम भी है। उनका नाम पार्टी के पारंपरिक संगठनात्मक ढांचे से अलग सार्वजनिक जीवन की पृष्ठभूमि वाले चेहरे के रूप में है।
यदि उन्हें राज्यसभा के लिए चुना जाता है तो भाजपा के उत्तर प्रदेश कोटे से उच्च सदन में सार्वजनिक जीवन और साहित्य की पृष्ठभूमि वाला नया चेहरा आएगा।
पैनल में सुब्रत पाठक, सुरेश राणा, त्र्यंबक त्रिपाठी, दुर्विजय शाक्य, रेखा वर्मा, प्रियंका रावत, कामेश्वर सिंह, दिलीप पटेल, अनिल अग्रवाल, राजेंद्र अग्रवाल, ममतेश शाक्य, रमापति राम त्रिपाठी, रामशंकर कठेरिया और प्रकाश पाल समेत अन्य नाम भी बताए गए हैं। अलग-अलग रिपोर्टों में पैनल में नामों की संख्या 20 से 25 तक बताई गई है; पार्टी की अंतिम सूची अभी जारी नहीं हुई है।
इन नामों में पूर्व सांसदों, संगठन से जुड़े नेताओं और विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले चेहरों का मिश्रण है। अंतिम आठ नाम तय होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि पार्टी ने इनमें से किन सामाजिक और क्षेत्रीय समूहों को प्राथमिकता दी।
राज्यसभा के संभावित नामों में कई ऐसे नेता हैं जो 2024 के लोकसभा चुनाव में हार चुके हैं। स्मृति ईरानी, हरीश द्विवेदी और राजवीर सिंह इसके प्रमुख उदाहरण हैं। राज्यसभा में जगह मिलने की स्थिति में इन नेताओं की राष्ट्रीय राजनीतिक भूमिका बनी रहेगी।
दूसरी ओर संगठन से जुड़े नए चेहरों को मौका मिलने पर विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के दूसरे स्तर के नेताओं को राष्ट्रीय मंच मिलेगा।
इसका असर सीधे विधानसभा टिकट पर नहीं होगा, लेकिन राज्यसभा के जरिए पार्टी जिन नेताओं को राजनीतिक भूमिका देती है, उनके सक्रिय रहने से आगामी विधानसभा की चुनावी टीम के लिए उपलब्ध नेतृत्व का दायरा बदल सकता है।
भाजपा के पैनल में पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पूर्वांचल, अवध और अन्य क्षेत्रों से जुड़े नाम हैं। इसके साथ ब्राह्मण, लोधी, जाट, दलित और ओबीसी पृष्ठभूमि के नेताओं के नाम भी सामने आए हैं। पार्टी के स्तर पर उम्मीदवार चयन में सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन पर भी ज़ोर है।
2027 में भाजपा को अपना दल (एस), निषाद पार्टी, सुभासपा और रालोद जैसे सहयोगी दलों के साथ विधानसभा सीटों का तालमेल करना होगा। इन दलों का अपना-अपना सामाजिक और क्षेत्रीय आधार है।
इसलिए भाजपा के राज्यसभा प्रत्याशियों के सामाजिक संतुलन के साथ विधानसभा चुनाव में सहयोगी दलों को मिलने वाले प्रतिनिधित्व का सवाल भी अलग स्तर पर रहेगा। राज्यसभा के आठ नामों से भाजपा का अपना सामाजिक प्रतिनिधित्व तय होगा, जबकि विधानसभा में सहयोगियों के हिस्से की सीटें भी सामाजिक समीकरण में शामिल होंगी।
आगामी 16 अक्टूबर को राज्यसभा चुनाव के बाद 23 अक्टूबर को विधान परिषद की 11 सीटों के लिए मतदान होना है। भाजपा ने राज्यसभा के साथ विधान परिषद चुनाव के लिए भी संगठनात्मक स्तर पर तैयारी शुरू कर दी है।
लगातार दो उच्च सदन के चुनावों के बाद भाजपा के सामने विधानसभा की 403 सीटों के लिए प्रत्याशी चयन होगा। इसलिए राज्यसभा के आठ नामों में किसे जगह मिलती है, यह केवल उच्च सदन का प्रतिनिधित्व नहीं होगा; इससे यह भी सामने आएगा कि पार्टी पुराने चुनावी चेहरों, संगठन के नेताओं और नए सामाजिक चेहरों के बीच किस तरह राजनीतिक जिम्मेदारियां बांट रही है।
भाजपा की अंतिम सूची आने के बाद ही साफ होगा कि 25 नामों के पैनल में से किन आठ चेहरों को 2027 से पहले राष्ट्रीय राजनीति में भूमिका दी जाती है और जातीय-क्षेत्रीय संतुलन में किसे प्रतिनिधित्व मिलता है।