
राज्यसभा चुनाव से विधानसभा की तैयारी (फोटो एआई)
SP Rajya Sabha Candidates:उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के चुनाव के लिए समाजवादी पार्टी ने अपने दो प्रत्याशियों के नाम घोषित कर दिए हैं। हालांकि तीसरे नाम को लेकर सस्पेंस बरकरार है। पार्टी ने वरिष्ठ नेता प्रो. रामगोपाल यादव के साथ रिलायंस इंडस्ट्रीज से जुड़े धनराज परिमल नथवानी को प्रत्याशी बनाकर एक ओर अपने पुराने संसदीय नेतृत्व को कायम रखा है, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक संगठन से बाहर की कॉरपोरेट पृष्ठभूमि वाले चेहरे को संसद भेजने का फैसला किया है। तीसरे नाम के लिए पूर्व केंद्रीय मंत्री सलीम इकबाल शेरवानी और पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन के नाम चर्चा में हैं।
राज्यसभा चुनाव के कुछ महीने बाद ही प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में सपा के उम्मीदवार चयन में सामाजिक प्रतिनिधित्व के साथ पार्टी के राजनीतिक संपर्कों का विस्तार भी सामने आया है। पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने नथवानी को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद कहा कि उन्हें नई पीढ़ी और नई सोच को राज्यसभा भेजने का अवसर मिला है। उन्होंने उद्योग जगत से जुड़ाव को प्रदेश में उद्योग और निवेश बढ़ाने से भी जोड़ा।
प्रो. रामगोपाल यादव सपा के सबसे वरिष्ठ संसदीय चेहरों में हैं। उन्हें दोबारा प्रत्याशी बनाए जाने से पार्टी के पुराने संसदीय नेतृत्व की निरंतरता बनी रहेगी। उनका नाम पहले से ही संभावित प्रत्याशियों में था।
रामगोपाल यादव का चयन ऐसे समय हुआ है जब पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव के लिए संगठन को सक्रिय कर रही है। राज्यसभा में उनकी मौजूदगी पार्टी के राष्ट्रीय स्तर के संसदीय नेतृत्व को बनाए रखने से जुड़ी है।
सपा के दूसरे प्रत्याशी धनराज परिमल नथवानी का चयन पार्टी के लिए अलग राजनीतिक प्रोफाइल वाला फैसला है। नथवानी रिलायंस इंडस्ट्रीज से जुड़े वरिष्ठ कॉरपोरेट प्रोफेशनल हैं और गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष भी हैं। वे उत्तर प्रदेश की प्रत्यक्ष चुनावी राजनीति से नहीं आते।
अखिलेश यादव ने उनके चयन को उद्योग जगत से जुड़ाव और नई पीढ़ी को अवसर देने से जोड़ा है। उन्होंने कहा कि उद्योग बढ़ने से रोजगार और आय बढ़ेगी तथा प्रदेश में औद्योगिक विकास के लिए उद्योग जगत से जुड़े लोगों का अनुभव उपयोगी हो सकता है।
नथवानी के नामांकन हलफनामे में कुल संपत्ति 705.42 करोड़ रुपए घोषित की गई है। इसमें 77.75 करोड़ रुपए की चल और 627.67 करोड़ रुपए की अचल संपत्ति शामिल है। उनकी देनदारियां 25.93 करोड़ रुपए और वित्त वर्ष 2025-26 की आय 19.61 करोड़ रुपए घोषित है।
नथवानी की उम्मीदवारी के साथ उनका कारोबारी और संस्थागत नेटवर्क भी राजनीतिक चर्चा में आया है। हालांकि सपा ने उनके चयन को 2027 के चुनावी वित्त प्रबंधन से जोड़कर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है।
सपा के तीसरे प्रत्याशी पर फैसला अभी बाकी है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और बदायूं से कई बार सांसद रहे सलीम इकबाल शेरवानी का नाम प्रमुखता से चर्चा में है। शेरवानी ने पार्टी नेतृत्व से मुलाकात कर अपनी दावेदारी भी रखी है। पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन का नाम भी संभावित दावेदारों में है।
शेरवानी को टिकट मिलने पर सपा की राज्यसभा टीम में मुस्लिम प्रतिनिधित्व वाला प्रमुख राजनीतिक चेहरा शामिल होगा। दूसरी ओर आलोक रंजन को मौका मिलने पर प्रशासनिक और नीति संबंधी अनुभव वाला चेहरा फिर उच्च सदन में पहुंच सकता है। पिछले राज्यसभा चुनाव में भी आलोक रंजन सपा के प्रत्याशी रहे थे, लेकिन क्रॉस वोटिंग के कारण चुनाव हार गए थे।
तीसरे नाम का चयन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सपा की 2027 की राजनीति में पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक यानी पीडीए सामाजिक समीकरण प्रमुख है। तीसरे प्रत्याशी का सामाजिक और राजनीतिक प्रोफाइल पार्टी की राज्यसभा टीम में प्रतिनिधित्व का संतुलन तय करेगा।
सपा के पास मौजूदा विधानसभा संख्या के आधार पर दो राज्यसभा सीटों के लिए पर्याप्त वोट हैं। तीसरी सीट के लिए पार्टी को अपने मौजूदा संख्या बल से बाहर समर्थन जुटाना होगा। अखिलेश यादव ने कहा है कि तीसरे उम्मीदवार के बारे में फैसला वोटों की स्थिति स्पष्ट होने के बाद किया जाएगा। उन्होंने कुछ भाजपा विधायकों के संपर्क में होने का दावा भी किया है।
इससे तीसरे उम्मीदवार का चुनाव केवल नाम तय करने तक सीमित नहीं है। उम्मीदवार के सामाजिक आधार के साथ उसके पक्ष में अतिरिक्त समर्थन जुटाने की क्षमता भी पार्टी के सामने है।
राज्यसभा के तीन नाम सीधे विधानसभा के टिकट तय नहीं करते, लेकिन सपा के लिए ये चयन 2027 से पहले राजनीतिक प्रतिनिधित्व की दिशा तय करने वाले फैसले हैं।
रामगोपाल यादव के जरिए पुराना संगठनात्मक और संसदीय नेतृत्व कायम रहता है। नथवानी के जरिए उद्योग और पेशेवर क्षेत्र से संपर्क का चेहरा सामने आता है। तीसरे नाम के रूप में शेरवानी आते हैं तो मुस्लिम प्रतिनिधित्व का पक्ष मजबूत होगा, जबकि आलोक रंजन के चयन से प्रशासनिक पृष्ठभूमि को महत्व मिलेगा।
इसके बाद विधान परिषद और विधानसभा चुनाव के टिकटों में पार्टी किस सामाजिक वर्ग और क्षेत्र को कितना प्रतिनिधित्व देती है, यह आगामी विधानसभा चुनावों में सपा की चुनावी टीम की तस्वीर को और स्पष्ट करेगा।
राज्यसभा के लिए 6 अक्टूबर तक नामांकन और 16 अक्टूबर को मतदान होना है। इससे पहले सपा के तीसरे नाम का फैसला उसके आगामी चुनावी सामाजिक संतुलन की अगली कड़ी के रूप में देखा जाएगा।
Updated on:
02 Oct 2026 02:43 pm
Published on:
02 Oct 2026 02:43 pm
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