लखनऊ

UP Assembly Elections: 2012 से जिन 61 सीटों पर नहीं जीती है भाजपा, वहां 2027 के लिए क्या है प्लान

UP Assembly Elections 2027: यूपी में अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले है। बीजेपी उन 61 विधानसभा सीटों पर विशेष फोकस कर रही है, जहां उसने 2012, 2017 और 2022 के लगातार तीन चुनावों में एक भी जीत दर्ज नहीं की।
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Sep 28, 2026
BJP Strategy
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारी (फोटो एआई)

BJP Strategy For 61 Weak Seats UP Assembly Elections 2027: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारी भाजपा ने काफी पहले शुरू कर दी है। पार्टी उन 61 विधानसभा सीटों पर विशेष फोकस कर रही है, जहां उसने 2012, 2017 और 2022 के लगातार तीन चुनावों में एक भी जीत दर्ज नहीं की। नए प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के नेतृत्व में बूथ स्तर की आउटरीच और लाभार्थी मैपिंग के जरिए इन कमजोर सीटों को मजबूत बनाने की रणनीति बनाई जा रही है।

61 सीटों पर खास ध्यान, क्षेत्रवार बंटवारा

सूत्रों के अनुसार, पंकज चौधरी ने पार्टी नेताओं को निर्देश दिया है कि शुरुआती चरण में इन्हीं 61 सीटों पर काम शुरू किया जाए। इनमें सबसे ज्यादा 22 सीटें पूर्वी उत्तर प्रदेश यानी आजमगढ़, मऊ, जौनपुर, गाजीपुर और मिर्जापुर जिलों में हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सहारनपुर, मुरादाबाद और बिजनौर के इलाकों में करीब 13 सीटें शामिल हैं। बाकी सीटें अवध और मध्य उत्तर प्रदेश के रायबरेली, सुल्तानपुर, प्रतापगढ़, बाराबंकी, उन्नाव, हरदोई, फतेहपुर और अंबेडकर नगर जैसे जिलों में फैली हुई हैं।

2022 के विधानसभा चुनाव में इन क्षेत्रों की कई सीटों पर समाजवादी पार्टी ने कब्जा जमाया था। पूर्वी और पश्चिमी यूपी की 35 सीटों में से सपा ने 27 सीटें जीती थीं। हालांकि, बाद के उपचुनावों में भाजपा ने सुआर, रामपुर और कुंदरकी जैसी कुछ सीटें हासिल कर आत्मविश्वास बढ़ाया है। गठबंधन सहयोगी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (एसबीएसपी) के नेता ओम प्रकाश राजभर अब योगी सरकार में मंत्री हैं, जिससे इन क्षेत्रों में सहयोग की उम्मीद बढ़ी है।

बूथ स्तर की मजबूती और लाभार्थी मैपिंग

पार्टी पहले इन सीटों पर फैक्ट-फाइंडिंग करेगी। जाति समीकरण, चुनावी डेटा और बूथ स्तर का फीडबैक इकट्ठा करने के बाद कैडर की ताकत का इस्तेमाल कर रणनीति बनेगी। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं को सक्रिय बनाने पर जोर दे रहे हैं। हर महीने बूथ से लेकर जिला स्तर तक बैठकें अनिवार्य की गई हैं। कार्यकर्ता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम को सुनने के बाद बैठक करेंगे और नेतृत्व को अपडेट देंगे।

बूथ कार्यकर्ता घर-घर जाकर सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों से मिलेंगे। वे जाँच करेंगे कि लोगों को योजनाओं का लाभ मिल रहा है या नहीं और जरूरत पड़ने पर मदद करेंगे। इसे लाभार्थी मैपिंग कहा जा रहा है, जिससे जमीनी स्तर पर पार्टी की पकड़ मजबूत होगी।

संगठनात्मक बदलाव और आगे की रणनीति

फिलहाल प्रदेश में पूर्णकालिक पार्टी प्रभारी नहीं हैं। सूत्रों के मुताबिक, राष्ट्रीय स्तर पर कार्यभारियों के फेरबदल के बाद जल्द प्रभारी नियुक्त किए जा सकते हैं। पार्टी इन 61 सीटों के लिए अलग-अलग रोडमैप तैयार करेगी, ताकि 2027 में इन पारंपरिक कमजोर क्षेत्रों में सेंध लगाई जा सके।
भाजपा का मानना है कि पिछले दो विधानसभा चुनावों में बड़े बहुमत के बावजूद ये 61 सीटें चुनौती बनी हुई हैं। अब माइक्रो प्लानिंग, गठबंधन सहयोग और सरकारी योजनाओं के प्रचार के जरिए इन्हें जीतने की कोशिश की जाएगी। पूर्वांचल और पश्चिमी यूपी जैसे क्षेत्रों में सपा की मजबूत पकड़ को तोड़ना पार्टी की प्राथमिकता है।

Updated on:
28 Sept 2026 09:47 pm
Published on:
28 Sept 2026 09:47 pm