लखनऊ

एससी-एसटी एक्ट के बहाने मायावती को कमजोर करेगी बीजेपी, गठबंधन पर भी निशाना

मायावती के पर कतरने के लिए मोदी सरकार ने यह यह दांव चला है...

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Aug 02, 2018
एससी-एसटी एक्ट के बहाने मायावती को कमजोर करेगी बीजेपी, गठबंधन पर भी निशाना

लखनऊ. केंद्र की नरेंद्र मोदी कैबिनेट ने एससी-एसटी एक्ट पर संसोधन बिल लाने की तैयारी कर रही है। इसको लेकर सरकार विधेयक के प्रस्ताव को मंजूरी देने के बाद अब इसी संसद सत्र में पास कराने की तैयारी में है। आपको बता दें कि एनडीए के ही कई दलित सांसद इस मुद्दे पर अपनी ही सरकार के खिलाफ बगावती तेवर अपनाए हुए थे। इसमें से कई उत्तर प्रदेश के सांसद भी शामिल थे। जानकारी के मुताबिक इस बिल के पास होने के बाद सर्वोच्च न्यायालय के फैसले से पहले की स्थिति हो जाएगी। क्योंकि मोदी सरकार संशोधन के साथ पुराने कानून को ही लागू करने का विधेयक लेकर आ रही है। सरकार अपने इस दांव से यूपी समेत पूरे देश में दलित आंदोलन को पूरी तरह से खत्म करने की तैयारी में है। साथ ही अपने सहयोगी सांसदों को भी मनाने की कामयाब कोशिश कर रही है।

एनडीए की सोची-समझी रणनीति
मोदी कैबिनेट के इस फैसले को अब विरोधी उसके सहयोगी दलों के दबाव का असर बता रहे हैं जबकि जानकार इसे एनडीए की सोची समझी रणनीति करार दे रहे हैं। दरअसल जानकारों का मानना है कि विपक्ष के बीच मायावती का लगातार बढ़ रहा कद बीजेपी के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। इसीलिए यूपी समेत केंद्र की राजनीति से मायावती के पर कतरने के लिए मोदी सरकार ने यह यह दांव चला है। बीजेपी सूत्रों के मुताबिक बसपा सुप्रीमो मायावती जो यूपी की सत्ता में हाशिये पर पहुंच गई थीं, वह अब धीरे-धीरे मेन रोल में उभर रही हैं और गठबंधन की तरफ से प्रधानमंत्री पद की उम्मीदवार के तौर पर सामने आ सकती हैं।

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मायावती को घेरने की तैयारी
मायावती के बढ़ते कद को बीजेपी किसी भी सूरत में नजरअंदाज नहीं करना चाहती और 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले उनको कमजोर करने में लगी है। दरअसल बीजेपी को ये बात बहुत अच्छे से पता है कि अगर केंद्र सरकार एससी-एसटी एक्ट को नरम करती है तो मायावती इसे दलितों के बीच बड़ा मुद्दा बनाएंगी, जिससे सरकार के खिलाफ गलत संदेश जा सकता है। बीजेपी दलितों के साथ ही अपर कास्ट वोटबैंक को साधने में लगी है। बीजेपी को पता है कि दलितों की हितैषी बनने पर उसे अपर कास्ट वोटबैंक से हाथ भी धोना पड़ सकता है। क्योंकि एससी-एसटी एक्ट अपर कास्ट के लोगों के लिए ही मुसीबत बनेगा। इसीलिए बीजेपी सहयोगी दलों का इस्तेमाल करके मायावती की घेराबंदी करने में लग चुकी है।

गठबंधन पर भी निशाना
मायावती के साथ ही बीजेपी के निशाने पर अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी भी है। बीजेपी आलाकमान ये बात भलीभांति जानती है कि गठबंधन होने की स्थिति में मायावती और अखिलेश उसके लिए उत्तर प्रदेश में मुसीबत खड़ी करेंगे। इसीलिए वह दलित वोटबैंक से अपनी पकड़ कमजोर नहीं करना चाहती। क्योंकि दलितों के रूठने का फायदा सीधे मायावती और अखिलेश के गठबंधन को मिलेगा और वह उसके लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है।

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Published on:
02 Aug 2018 02:50 pm
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