ओम माथुर को कर्नाटक विधानसभा चुनाव में भाजपा को जिताने की अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है...
लखनऊ. लोकसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी भारतीय जनता पार्टी के नेता और मंत्री ग्राम स्वराज अभियान के तहत गांव-गांव जाकर जनता के बीच सकारात्मक संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं, बीजेपी संगठन के एक बड़े पदाधिकारी अपनी उपेक्षा से नाराज हो गये हैं। इनता ही नहीं, उन्होंने पार्टी नेतृत्व के सामने अपना पद छोड़ने की पेशकश भी कर दी है।
सूत्रों की मानें तो विधानसभा चुनाव के बाद से योगी सरकार में अपनी अनदेखी से नाराज भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ओम माथुर ने पार्टी आलाकमान के सामने उत्तर प्रदेश प्रभारी का पद छोड़ने की पेशकश की है। हालांकि, पार्टी आलाकमान की ओर से इस पर कोई जवाब नहीं आया है। उन्हें कर्नाटक विधानसभा चुनाव में भाजपा को जिताने की अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है।
इसलिये नाराज हैं भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष
सूत्रों की मानें तो, गोरखपुर-फूलपुर उपचुनाव के कैंडिडेट्स का चयन हो या फिर संगठन और सरकार की नीतियों की बात हो, उत्तर प्रदेश में योगी सरकार बनने के बाद से उनसे राय न लिये जाने से ओम माथुर नाराज हैं। हाल ही संपन्न हुए दोनों उपचुनाव में बिना उनकी मर्जी के कैंडिडेट सिलेक्ट किये गये। इससे आहत होकर उन्होंने अपना इस्तीफे की पेशकश की है। सूत्रों की मानें, इसकी वजह संगठन के एक वरिष्ठ पदाधिकारी से उनका गहरा मतभेद भी है।
महत्वपूर्ण मौकों पर नदारद रहे ओम माथुर
11 अप्रैल को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने जब लखनऊ का दौरा किया था, तब भी भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व उत्तर प्रदेश प्रभारी ओम माथुर नदारद थे। 20 अप्रैल को जब अमित शाह कांग्रेस को घर में ही घेरने की रणनीति के तहत रायबरेली गये, उस दौरे से भी ओम माथुर ने खुद को दूर रखा था। ओम माथुर आखिरी बार 20 फरवरी को संघ प्रमुख मोहन भागवत के लखनऊ कार्यक्रम के दौरान नजर आये थे। गोरखपुर और फूलपुर उपचुनाव में भी उन्होंने दूरी बनाये रखी। इतना ही नहीं राज्यसभा और विधान परिषद उम्मीदवारों के चयन में पार्टी की किसी भी बैठक में भाग नहीं लिया।
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