लखनऊ में भाजपा नेता पंकज चौधरी से मिलने कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ उमड़ी। नई प्रदेश कार्यकारिणी गठन की सरगर्मी तेज हुई, 200 मंडल अध्यक्षों की घोषणा से संगठन में राजनीतिक हलचल बढ़ गई।
UP Politics Update: उत्तर प्रदेश भाजपा में संगठनात्मक बदलाव की आहट तेज होते ही राजधानी लखनऊ राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बन गई है। नई प्रदेश कार्यकारिणी के गठन को लेकर पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं में उत्साह साफ दिखाई दे रहा है। बुधवार को केंद्रीय राज्य मंत्री एवं वरिष्ठ भाजपा नेता पंकज चौधरी से मिलने बड़ी संख्या में कार्यकर्ता लखनऊ पहुंचे। संगठन में जिम्मेदारी मिलने की उम्मीद के साथ सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और कई नेताओं ने अपना बायोडेटा भी सौंपा।
राजधानी में दिनभर पार्टी कार्यालय और आसपास का इलाका राजनीतिक चर्चाओं से गुलजार रहा। प्रदेशभर से आए कार्यकर्ताओं की भीड़ ने यह संकेत दे दिया कि भाजपा संगठन में होने जा रहे बदलाव को लेकर पार्टी के भीतर व्यापक उत्सुकता है।
भाजपा की नई प्रदेश कार्यकारिणी के गठन की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। पार्टी सूत्रों के अनुसार आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने की रणनीति पर काम किया जा रहा है। इसी कड़ी में मंडल और जिला स्तर पर नए चेहरों को मौका देने की तैयारी चल रही है।
बुधवार देर रात पार्टी द्वारा करीब 200 मंडल अध्यक्षों और जिला प्रतिनिधियों की सूची जारी किए जाने के बाद राजनीतिक सरगर्मी और बढ़ गई। सूची सामने आते ही प्रदेशभर में कार्यकर्ताओं के बीच चर्चा शुरू हो गई कि अगला नंबर जिलाध्यक्षों और प्रदेश पदाधिकारियों की घोषणा का हो सकता है। सूत्रों का कहना है कि संगठन में संतुलन बनाए रखने के लिए सामाजिक समीकरण, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और सक्रिय कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता दी जा रही है।
बुधवार को लखनऊ में पंकज चौधरी से मुलाकात के लिए सुबह से ही कार्यकर्ताओं का आना शुरू हो गया था। विभिन्न जिलों से आए कार्यकर्ता अपने समर्थकों के साथ पहुंचे और संगठन में जिम्मेदारी मिलने की उम्मीद जताई।
कई कार्यकर्ताओं ने अपने राजनीतिक अनुभव, संगठनात्मक कार्य और चुनावी सक्रियता का विवरण देते हुए बायोडेटा सौंपा। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, इस बार संगठन में मेहनती और जमीनी कार्यकर्ताओं को आगे लाने की रणनीति अपनाई जा रही है। कार्यकर्ताओं का उत्साह इस बात से भी झलक रहा था कि कई लोग पारंपरिक स्वागत शैली में उपहार लेकर पहुंचे।
मुलाकात के दौरान एक कार्यकर्ता ने पंकज चौधरी को भगवा गमछा पहनाकर स्वागत किया। इस पर उन्होंने मुस्कुराते हुए सादगी भरा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि इसमें पैसा क्यों खर्च किया? डेढ़-दो सौ रुपए जो खर्च किए, वह तुम्हारे काम आते।” उनकी यह टिप्पणी वहां मौजूद कार्यकर्ताओं के बीच चर्चा का विषय बन गई। पार्टी नेताओं ने इसे कार्यकर्ताओं के प्रति उनकी संवेदनशीलता और सादगीपूर्ण राजनीतिक शैली का उदाहरण बताया।
मुलाकात के दौरान एक अन्य कार्यकर्ता ने पंकज चौधरी को बुलडोजर की छोटी प्रतिकृति भेंट की। इसे देखकर उन्होंने हंसते हुए कहा कि पूरा बुलडोजर ही उठा लाए हो।” इस हल्के-फुल्के अंदाज ने माहौल को सहज बना दिया और कार्यकर्ताओं में उत्साह बढ़ा। भाजपा के राजनीतिक प्रतीकों और सरकार की नीतियों से जुड़े ऐसे प्रतीकात्मक उपहार अब पार्टी कार्यक्रमों में आम होते जा रहे हैं।
पंकज चौधरी ने कार्यकर्ताओं से बातचीत के दौरान स्पष्ट संकेत दिया कि आने वाले चुनावों को देखते हुए संगठन को मजबूत करना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि पार्टी में हर सक्रिय कार्यकर्ता के लिए अवसर मौजूद है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि संगठन सर्वोपरि है,बूथ स्तर पर सक्रियता बढ़ानी होगी। जनता के बीच सरकार की योजनाओं को पहुंचाना होगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि मेहनत करने वालों को संगठन में उचित स्थान मिलेगा।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि जल्द ही पार्टी 14 जिलाध्यक्षों के नामों की घोषणा कर सकती है। हालांकि आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन संगठन के भीतर हलचल तेज हो चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि भाजपा आगामी चुनावों से पहले संगठनात्मक ढांचे को पूरी तरह सक्रिय करना चाहती है। नए जिलाध्यक्षों की नियुक्ति से जिला स्तर पर राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।
भाजपा संगठन के पुनर्गठन में इस बार सामाजिक प्रतिनिधित्व को विशेष महत्व दिए जाने की बात सामने आ रही है। पार्टी नेतृत्व युवाओं, महिलाओं और विभिन्न सामाजिक वर्गों को संगठन में शामिल कर व्यापक राजनीतिक आधार मजबूत करना चाहता है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि भाजपा लंबे समय से “माइक्रो मैनेजमेंट” की रणनीति पर काम करती रही है और यही उसकी चुनावी सफलता का प्रमुख कारण भी माना जाता है।
नई कार्यकारिणी को लेकर सिर्फ लखनऊ ही नहीं बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। जिला और मंडल स्तर के नेता लगातार वरिष्ठ नेताओं से संपर्क साध रहे हैं। पार्टी कार्यालयों में बैठकों का दौर बढ़ गया है और कार्यकर्ता अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रियता दिखाने लगे हैं। कई जिलों में संगठनात्मक बैठकों और कार्यकर्ता संवाद कार्यक्रमों की भी तैयारी चल रही है।
नई टीम के गठन की प्रक्रिया ने कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भर दी है। लंबे समय से संगठन में सक्रिय लोग इस बार जिम्मेदारी मिलने की उम्मीद लगाए हुए हैं। कई कार्यकर्ताओं का मानना है कि संगठन में नई जिम्मेदारी मिलने से स्थानीय स्तर पर राजनीतिक पहचान मजबूत होती है और जनता से जुड़ाव बढ़ता है।